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राजधानी में पानी का संकट गहराता जा रहा है। हर साल की तरह इस बार भी दिल्ली जल बोर्ड ने गर्मियों से पहले बेहतर पानी सप्लाई और मजबूत व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। दिल्ली में जब लोग अपनी शिकायत लेकर दिल्ली जल बोर्ड की हेल्पलाइन पर फोन कर रहे हैं, तो वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिल रही है।

स्थिति यह है कि 24×7 हेल्पलाइन नंबर 1916 के अलावा वेबसाइट पर दिए हुए किसी भी नंबर पर कॉल रिसीव नहीं की गई। हेल्पलाइन नंबर पर तो कॉल करने पर रिकॉर्डेड आवाज आती है कि हमारे सभी अधिकारी व्यस्त हैं। इसके बाद कॉल कट जाती है।

दिल्ली जल बोर्ड की वेबसाइट पर अलग-अलग जनसेवा केंद्रों और अधिकारियों के नंबर जारी किए गए हैं, ताकि लोग अपनी समस्या सीधे दर्ज करा सकें। लोगों का आरोप है कि इनमें से कई नंबर बंद हैं जबकि जो चालू हैं उनपर कोई दूसरा व्यक्ति फोन उठा रहा है। संगम विहार निवासी दानिश ने बताया कि 2 दिन से इलाके में पानी नहीं आया। सुबह से हेल्पलाइन पर कॉल कर रहे हैं, लेकिन फोन नहीं लग रहा है।

शिकायत ही दर्ज नहीं होगी तो समाधान कैसे मिलेगा। दक्षिणपुरी के रहने वाले राहुल ने बताया कि हर बार कहा जाता है कि अधिकारी व्यस्त हैं। आखिर जनता जाए तो कहां जाए। हमारे छोटे बच्चे हैं, घर में पानी खत्म हो गया था। पड़ोस से पानी मांग कर काम चलाना पड़ रहा है। लोगों के अनुसार, हेल्पलाइन केवल दिखावे के लिए रह गई है। कई बार घंटों कोशिश करने के बाद भी कॉल नहीं लगती।

जल बोर्ड के दावों की खुली पोल

दिल्ली जल बोर्ड हर साल यह दावा करता है कि गर्मियों में पानी की सप्लाई बनाए रखने के लिए पूरी तैयारी की गई है। हाल ही में विभाग ने नई शिकायत प्रणाली, मोबाइल एप और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम की भी बात कही थी। मौजूदा हालात इन दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। हेल्पलाइन नंबर काम नहीं कर रहे और टैंकर समय पर नहीं पहुंच रहे, तो लोगों को राहत कैसे मिलेगी। बढ़ती आबादी, पुरानी पाइपलाइन और लीकेज जैसी समस्याएं लगातार संकट को बढ़ा रही हैं। दिल्ली में हर साल मई-जून में कई इलाकों में यही स्थिति देखने को मिलती है। हर बार दावे होते हैं लेकिन गर्मी बढ़ते ही दावों की पोल खुल जाती है। इस बार भी दिल्ली जल बोर्ड की हेल्पलाइन, जनसेवा केंद्र और टैंकर सेवा सभी सवालों के घेरे में हैं।

खुले में चल रहा पानी के कारोबार का खेल

दिल्ली में पानी की किल्लत जितनी गहरी होती जा रही है, उतना तेजी से प्राइवेट टैंकरों का अनौपचारिक बाजार भी फल-फूल रहा है। सरकारी व्यवस्था समय पर पानी नहीं पहुंचा पाती तब लोग मजबूरी में निजी टैंकरों की ओर रुख करते हैं और यहीं से शुरू होता है पानी के कारोबार का खेल। कई इलाकों में सरकारी टैंकरों की कमी और देरी का फायदा निजी टैंकर संचालक उठा रहे हैं। लोगों के अनुसार, एक ही इलाके में अलग-अलग दाम वसूले जाते हैं और संकट के समय मुंहमांगे दाम मांगे जाते हैं। कोटला निवासी सत्यम ने बताया कि पानी जैसे मूलभूत संसाधन का इस तरह बाजार बन जाना सिर्फ प्रशासनिक कमजोरी नहीं, बल्कि एक बड़े सिस्टम फेल्योर की ओर इशारा करता है, जहां जरूरत व्यवस्था से ज्यादा जुगाड़ पर निर्भर हो गई है।

सरकारी टैंकर करवा रहे पानी का इंतजार

दिल्ली के कई इलाकों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं। कहीं सुबह कुछ मिनट ही पानी आ रहा है तो कहीं कई दिनों से सप्लाई पूरी तरह ठप पड़ी है। पानी की किल्लत के बीच लोग अब सरकारी टैंकरों पर निर्भर हो गए हैं। कई इलाकों में लोगों को समय पर टैंकर नहीं मिल रहे। दक्षिणपुरी में स्थानीय लोगों ने बताया कि टैंकर बुलाने के लिए बार-बार शिकायत करनी पड़ती है लेकिन फिर भी कई घंटे इंतजार करना पड़ता है।

कुछ जगहों पर टैंकर आते भी हैं तो पानी कम होने की वजह से सभी लोगों तक सप्लाई नहीं पहुंच पाती। नवादा निवासी अंजलि ने बताया कि आज सुबह से टैंकर का इंतजार कर रहे थे। दोपहर बाद टैंकर आया, लेकिन इतनी भीड़ थी कि आधे लोगों को पानी ही नहीं मिला। संजय कैंप निवासी विकास ने बताया कि लोग घंटों टैंकर का इंतजार करते हैं। लोगों का आरोप है कि टैंकरों की संख्या जरूरत के मुकाबले काफी कम है।

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