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आसाराम ने जोधपुर सेंट्रल जेल में सरेंडर कर दिया। राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद वह गुरुवार को जोधपुर पहुंचा। दोपहर 2:50 बजे आसाराम के आने की सूचना पर जोधपुर एयरपोर्ट पर उसके समर्थकों की भीड़ लग गई। आसाराम ने भी गाड़ी से समर्थकों को आशीर्वाद दिया।
आसाराम एयरपोर्ट से सीधे पाल गांव स्थित अपने आश्रम पहुंचा। वहां से एम्स गया, जांच करवाने के बाद शाम करीब 5 बजे सेंट्रल जेल में सरेंडर कर दिया।
दरअसल, बुधवार को हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने नाबालिग से रेप के मामले में आसाराम की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए अंतरिम जमानत रद्द कर दी थी। कोर्ट की ओर से तत्काल गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश के बाद आसाराम बुधवार देर शाम ही हरिद्वार से दिल्ली के लिए रवाना हो गया था।
जोधपुर एयरपोर्ट से बाहर निकलता आसाराम।
जोधपुर एयरपोर्ट पर आसाराम के समर्थकों की भीड़ को पीछे करती पुलिस।
आसाराम ने गाड़ी में चढ़कर समर्थकों की तरफ हाथ हिलाया और आशीर्वाद दिया।
हरिद्वार से जोधपुर तक का घटनाक्रम
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जब आसाराम की अपील खारिज करते हुए उसकी अंतरिम जमानत को रद्द किया, उस समय वह उत्तराखंड के हरिद्वार में था।
कोर्ट का फैसला आने और तत्काल गिरफ्तारी वारंट जारी होने की जानकारी मिलने के बाद आसाराम सड़क मार्ग से हरिद्वार से दिल्ली के लिए रवाना हो गया था।
आसाराम समर्थकों का दावा है कि सड़क मार्ग से सफर के चलते तबीयत बिगड़ गई थी। इसी वजह से दिल्ली एम्स में भर्ती हो गया।
सूत्रों की मानें तो आसाराम पक्ष की कोशिश यही थी कि सरेंडर नहीं करना पड़े और सुप्रीम कोर्ट में अपील होने तक मेडिकल ग्राउंड का बहाना बना ले लेकिन कानूनी जानकारों से राय मशवरा करने के बाद यह विचार त्याग दिया गया।
हाईकोर्ट ने बरकरार रखी है उम्रकैद
हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने इस चर्चित मामले में अपना विस्तृत फैसला सुनाया था। कोर्ट ने निचली अदालत की ओर से सुनाई गई उम्रकैद (प्राकृतिक जीवन के शेष समय तक जेल में रहने) की सजा को पूरी तरह से बरकरार रखा था।
कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि ‘आरोपी की कैद की तो दीवारें हैं लेकिन पीड़िता को जो मानसिक आघात और आजीवन पीड़ा दी गई है, उसकी कोई दीवार नहीं है।’ इसी आदेश के तहत कोर्ट ने उसकी अंतरिम जमानत रद्द कर तुरंत गिरफ्तारी वारंट जारी करने के निर्देश दिए थे।
सह-आरोपियों को मिल चुकी है राहत
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में मामले के दो अन्य सह-आरोपियों, हॉस्टल वार्डन शिल्पी और गुरुकुल के निदेशक शरत चंद्र को बड़ी राहत देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया था। अदालत ने माना था कि इन दोनों सह-आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश में शामिल होने का कोई पुख्ता सबूत नहीं है।
गौरतलब है कि अगस्त 2013 में जोधपुर के मनई आश्रम में कुटिया के अंदर एक नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था, जिसमें निचली अदालत ने अप्रैल 2018 में दोषियों को सजा सुनाई थी। अब सरेंडर के बाद आसाराम को दोबारा जेल भेज दिया गया है। —
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राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने नाबालिग रेप मामले में बुधवार को आसाराम की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखते हुए 92 पन्नों के फैसले की शुरुआत इन्हीं शब्दों से की। (पढ़िए पूरी खबर)
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