देश में तेजी से बढ़ती बिजली की मांग के पीछे शहरों में बढ़ रही गर्मी, यानी ‘अर्बन हीट आइलैंड’ (यूएचआई) प्रभाव को बड़ी वजह माना जा रहा है। एक नए विश्लेषण के अनुसार, शहर आसपास के इलाकों की तुलना में 2 से 10 डिग्री सेल्सियस तक अधिक गर्म हो रहे हैं। इससे लोग एसी, कूलर और पंखों का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसके कारण बिजली की खपत तेजी से बढ़ रही है।
दिल्ली की जलवायु अनुसंधान संस्था ‘क्लाइमेट ट्रेंड्स’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि तेजी से हो रहे शहरीकरण ने शहरों को हीट ट्रैप (कंक्रीट और ग्रीनहाउस गैसें गर्मी को फंसा लेती हैं, जिससे तापमान असहनीय हो जाता है) में बदल दिया है। कंक्रीट, सड़कें, ईंट और धातु जैसी सतहें दिन में गर्मी सोख लेती हैं और रात में उसे बाहर छोड़ती हैं। इससे रात के समय भी तापमान कम नहीं होता और गर्मी बनी रहती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, औद्योगिक क्षेत्र की बिजली मांग लगभग स्थिर है, लेकिन घरों में बिजली का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। खासकर शाम और रात के समय खपत में बड़ा उछाल देखा जा रहा है। हाल ही में 21 मई को देश में बिजली की मांग 270.8 गीगावाट तक पहुंच गई, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है।
विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि एयर कंडीशनर समस्या को और बढ़ा रहे हैं। एसी बाहर गर्म हवा छोड़ते हैं, जिससे शहरों का तापमान और बढ़ जाता है। विशेषज्ञों ने हल्के रंग की और गर्मी परावर्तित करने वाली छतों के इस्तेमाल की सलाह दी है। इससे छतों का तापमान 25 डिग्री तक कम हो सकता है। साथ ही पार्क, जलाशय, हरित क्षेत्र और ग्रीन रूफ जैसे उपाय अपनाने पर भी जोर दिया गया है।
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