गृह मंत्री ने बताया कि राशन वितरण प्रणाली को पारदर्शी और अचूक बनाने की इस जंग में ‘निर्मल’, ‘आशा’ और ‘सक्षम’ प्रधानमंत्री के वो तीन सबसे भरोसेमंद दोस्त हैं जो राशन की हर बोरी और हर गरीब के हक पर चौबीसों घंटे पहरा देंगे. ये कोई साधारण नाम नहीं बल्कि वो अत्याधुनिक एआई (AI) सिस्टम हैं जो कोटेदारों की मनमानी, अनाज की चोरी और दफ्तरों के चक्कर काटने की मजबूरी को हमेशा-हमेशा के लिए दफन कर देंगे. जब तक ये तीन दोस्त तैनात हैं तब तक किसी गरीब का निवाला कोई दूसरा नहीं छीन पाएगा. आइए जानते हैं कि आखिर ये तीन दोस्त किस तरह देश की पूरी राशन व्यवस्था का कायाकल्प करने वाले हैं.
सार्थक-पीडीएस को पांच सालों के लिए मंजूरी
केंद्रीय कैबिनेट ने राशन परिवहन, हैंडलिंग और पीडीएस ऑटोमेशन सहायता योजना यानी सार्थक-पीडीएस को अगले पांच वर्षों के लिए जारी रखने की मंजूरी दे दी है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट ब्रीफिंग में बताया कि यह योजना 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक संचालित होगी. इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य देश के करीब 81.35 करोड़ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) लाभार्थियों की खाद्य सुरक्षा को पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित बनाना है.
AI, मशीन लर्निंग, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग की तिकड़ी
इस योजना के तहत राशन वितरण प्रणाली (PDS) को पूरी तरह से आधुनिक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML), नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) और ब्लॉकचेन जैसी उन्नत तकनीकों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा. गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस फैसले की सराहना करते हुए कहा कि गरीब कल्याणकारी योजनाओं को टेक्नोलॉजी से लैस करने से भ्रष्टाचार और लीकेज पर पूरी तरह लगाम लगेगी. इस योजना के तहत स्मार्ट-पीडीएस के अगले चरण में तीन विशेष एआई-संचालित मॉड्यूल—’निर्मल’ (NIRMAL), ‘आशा’ (ASHA) और ‘सक्षम’ (SAKSHAM) को पेश किया गया है जो अनाज की आवाजाही से लेकर जनता की शिकायतों को दूर करने तक का काम संभालेंगे.
अनाज वितरण में सौ प्रतिशत पारदर्शिता
तकनीकी विकास के साथ-साथ यह योजना राज्यों को आर्थिक मोर्चे पर भी बड़ी राहत देगी. इसके तहत राज्यों के भीतर खाद्यान्नों के परिवहन और हैंडलिंग पर होने वाले खर्च के लिए केंद्रीय सहायता मानदंडों में संशोधन किया गया है. साथ ही, उचित मूल्य की दुकानों (FPS) यानी राशन डीलरों के मार्जिन और पारिश्रमिक में भी वृद्धि की जाएगी ताकि उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो सके. आधार सीडिंग, ई-पॉस (e-PoS) ऑटोमेशन और कंप्यूटरीकृत सप्लाई-चेन प्रबंधन को इस फेज-2 में और अधिक विस्तार दिया जाएगा, जिससे अनाज वितरण में सौ प्रतिशत पारदर्शिता सुनिश्चित होगी.
सार्थक-पीडीएस योजना की 5 मुख्य बातें
• भारी-भरकम बजट और अवधि: ‘सार्थक-पीडीएस’ योजना को 16वें वित्त आयोग की अवधि (2026 से 2031) के लिए ₹25,530 करोड़ के कुल बजट के साथ मंजूरी दी गई है.
• 81 करोड़ से अधिक को लाभ: यह एकीकृत योजना देश के 81.35 करोड़ एनएफएसए (NFSA) लाभार्थियों की खाद्य सुरक्षा को अधिक पुख्ता और पारदर्शी बनाएगी.
• तीन नए AI मॉड्यूल लॉन्च: स्मार्ट-पीडीएस के तहत तीन मुख्य एआई-इनेबल्ड प्लेटफॉर्म पेश किए गए हैं—’निर्मल’ (बेनिफिशियरी रजिस्ट्री), ‘आशा’ (शिकायत निवारण) और ‘सक्षम’ (सप्लाई चेन).
• डीलर मार्जिन और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट: राज्यों के भीतर अनाज परिवहन के खर्च में वित्तीय सहायता दी जाएगी और उचित मूल्य दुकानों (FPS) के डीलरों के मार्जिन को बढ़ाया जाएगा.
• पर्यावरण और पैसों की बचत: खाद्यान्न की यात्रा दूरी 15 से 50% तक कम होगी जिससे सालाना ₹280 करोड़ की बचत होने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में 35% की कमी आएगी.
सार्थक-पीडीएस योजना पूरी तरह बदल देगी सिस्टम
‘सार्थक-पीडीएस’ योजना का यह दूसरा चरण भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पूरी तरह से बदलने का दम रखता है. अब तक राशन वितरण में सबसे बड़ी चुनौतियां अनाज की चोरी (लीकेज), फर्जी लाभार्थी और परिवहन के दौरान होने वाली गड़बड़ियां रही हैं. सरकार ने इस बार इन समस्याओं की जड़ पर चोट करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया है. ‘सक्षम’ मॉड्यूल के तहत जीपीएस ट्रैकिंग, क्यूआर कोड टैगिंग और रूट ऑप्टिमाइजेशन लागू होने से गोदाम से लेकर राशन की दुकान तक अनाज की हर बोरी पर लाइव नजर रखी जा सकेगी, जिससे कालाबाजारी की गुंजाइश खत्म होगी.
इसके अलावा, ‘निर्मल’ प्लेटफॉर्म के जरिए विभिन्न मंत्रालयों और योजनाओं का डेटा आपस में जुड़ेगा, जिससे केवल वास्तविक और एलिजिबल गरीबों तक ही लाभ पहुंचना सुनिश्चित होगा. आशा चैटबॉट के माध्यम से आम नागरिक अपनी क्षेत्रीय भाषा में शिकायत दर्ज करा सकेंगे जिससे जवाबदेही बढ़ेगी. आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह योजना बेहद प्रभावी है; रूट ऑप्टिमाइजेशन के कारण अनाज लाने-ले जाने की दूरी घटेगी, जिससे न केवल करोड़ों रुपये का डीजल बचेगा बल्कि 35% तक कार्बन उत्सर्जन कम होगा, जो पर्यावरण अनुकूल विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. राशन डीलरों का मार्जिन बढ़ाना भी एक व्यावहारिक कदम है, जिससे वे ईमानदारी से काम करने के लिए प्रेरित होंगे.
सार्थक-पीडीएस योजना से जुड़े 5 सवाल-जवाब
‘सार्थक-पीडीएस’ योजना के लिए कैबिनेट ने कितनी राशि मंजूर की है और यह कब तक चलेगी?
केंद्रीय कैबिनेट ने इस योजना के लिए ₹25,530 करोड़ के केंद्रीय व्यय को मंजूरी दी है. यह योजना पांच वर्षों की अवधि के लिए यानी 1 अप्रैल 2026 से लेकर 31 मार्च 2031 तक संचालित की जाएगी.
इस योजना के अंतर्गत पेश किया गया ‘NIRMAL’ मॉड्यूल क्या काम करेगा?
‘निर्मल’ (NIRMAL) एक एआई-संचालित रियल-टाइम लाभार्थी रजिस्ट्री प्लेटफॉर्म है. यह अलग-अलग मंत्रालयों के डेटा को आपस में जोड़ेगा (इंटर-मिनिस्ट्री इंटीग्रेशन) ताकि पात्र लाभार्थियों की पहचान सटीक तरीके से हो सके.
नागरिकों की शिकायतों के निपटारे के लिए ‘ASHA’ मॉड्यूल में क्या सुविधाएं हैं?
‘आशा’ (ASHA) एक बहुभाषी एआई फूड सुरक्षा असिस्टेंट है. इसके जरिए नागरिक अपनी पसंदीदा भाषा में कॉल, वॉट्सऐप, आईवीआरएस (IVRS) या चैटबॉट के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकेंगे. यह रोजाना 3 लाख तक की बातचीत संभालने में सक्षम है.
खाद्यान्न की सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने के लिए ‘SAKSHAM’ प्लेटफॉर्म का उपयोग कैसे होगा?
‘सक्षम’ (SAKSHAM) प्लेटफॉर्म के माध्यम से राशन ले जाने वाले वाहनों की जीपीएस (GPS) ट्रैकिंग की जाएगी. इसके अलावा, अनाज की बोरियों पर क्यूआर कोड ट्रैसेबिलिटी, मांग का पूर्वानुमान (डिमांड फोरकास्टिंग) और रूट ऑप्टिमाइजेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग होगा.
इस नई योजना से देश को आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से क्या लाभ होने की उम्मीद है?
तकनीक के उपयोग से खाद्यान्न की परिवहन दूरी 15 से 50 प्रतिशत तक कम होगी. इससे हर साल लगभग ₹280 करोड़ की बचत होगी और वाहनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में भी 35 प्रतिशत तक की भारी कमी आएगी.
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