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दीनदयाल शोध संस्थान केवीके गोपाल ग्राम कि गृह वैज्ञानिक डॉ. ममता त्रिपाठी लोकल 18 से बताती है कि संस्थान में बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां सिलाई का प्रशिक्षण लेने के लिए पहुंच रही हैं. यहां उन्हें सिलाई मशीन चलाने से लेकर विभिन्न प्रकार के कपड़ों की कटिंग, डिजाइनिंग और सिलाई की बारीकियां सिखाई जाती हैं. प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षक महिलाओं को व्यावहारिक जानकारी भी देते हैं, ताकि वे आसानी से इस काम को सीख सकें.

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गोंडा: जिले में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में दीनदयाल शोध संस्थान गोपाल ग्राम सराहनीय कार्य कर रहा है. संस्थान द्वारा महिलाओं और युवतियों को निशुल्क सिलाई प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे हुनर सीख कर अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें.

दीनदयाल शोध संस्थान केवीके गोपाल ग्राम कि गृह वैज्ञानिक डॉ. ममता त्रिपाठी लोकल 18 से बताती है कि संस्थान में बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां सिलाई का प्रशिक्षण लेने के लिए पहुंच रही हैं. यहां उन्हें सिलाई मशीन चलाने से लेकर विभिन्न प्रकार के कपड़ों की कटिंग, डिजाइनिंग और सिलाई की बारीकियां सिखाई जाती हैं. प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षक महिलाओं को व्यावहारिक जानकारी भी देते हैं, ताकि वे आसानी से इस काम को सीख सकें.

महिलाओं के लाभदायक साबित हो रहा

प्रशिक्षण प्राप्त कर रहीं महिलाओं का कहना है कि यह कार्यक्रम उनके लिए काफी लाभदायक साबित हो रहा है. पहले उन्हें सिलाई का कोई विशेष ज्ञान नहीं था, लेकिन अब वे कपड़े सिलना सीख रही हैं. इससे भविष्य में घर बैठे रोजगार शुरू करने का अवसर मिलेगा और परिवार की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी. डॉ. ममता त्रिपाठी का कहना है कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है. ग्रामीण क्षेत्रों में कई महिलाएं ऐसी हैं, जो हुनर होने के बावजूद अवसरों की कमी के कारण आगे नहीं बढ़ पातीं. ऐसे में उन्हें मुफ्त प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है.

घर से शुरू कर सकती हैं व्यवसाय

डॉ. ममता त्रिपाठी बताती है कि सिलाई का काम ऐसा व्यवसाय है जिसे महिलाएं घर से भी शुरू कर सकती हैं. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वे अपने गांव या आसपास के क्षेत्रों में सिलाई का काम करके अच्छी आमदनी कमा सकती हैं. त्योहारों, शादी-विवाह और अन्य अवसरों पर सिलाई का काम बढ़ने से रोजगार के अवसर भी अधिक मिलते हैं. संस्थान द्वारा समय-समय पर महिलाओं के लिए अन्य कौशल विकास कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं. इन कार्यक्रमों का उद्देश्य महिलाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है. सिलाई प्रशिक्षण भी इसी पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

आत्मनिर्भर बनेंगी महिलाएं

इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं के लिए काफी उपयोगी हैं. इससे न केवल उन्हें नया हुनर सीखने का मौका मिलता है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ता है. कई महिलाएं प्रशिक्षण के बाद अपना छोटा व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रही हैं. डॉ. ममता त्रिपाठी बताती है कि दीनदयाल शोध संस्थान की यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है. निशुल्क सिलाई प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाएं नया कौशल सीख रही हैं और आत्मनिर्भर बनने की ओर आगे बढ़ रही हैं. इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ समाज में उनकी भागीदारी भी बढ़ रही है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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