आज नौतपा का दूसरा दिन है और जैसलमेर की गर्मी अपने चरम पर है। यहां के वर्ल्ड फेमस सोनार किले (सोने जैसा चमकने वाला) की दीवारें तपने लगी हैं।
सैलानियों से भरी रहने वाली गलियां, हवेलियां, फोर्ट, लेक सब सूने हैं। गर्मी में मंदी से निपटने के लिए 40% डिस्काउंट पर पैकेज दिया जा रहा है। टूरिज्म सेक्टर से जुड़े व्यापारी सैलानियों को जैसलमेर आने के लिए बजट फ्रेंडली पैकेज दे रहे हैं।
सिर्फ टूरिज्म नहीं, यहां की 1 महीने तक खराब न होने वाली घोटुआ मिठाई का कारोबार भी 50% तक डाउन है। व्यापारी कहते हैं- हलवाई भट्ठी के पास बैठना पसंद नहीं कर रहे, सुबह-सुबह जितनी मिठाई बन जाए उसी से काम चला रहे हैं।
दोपहर में काम न के बराबर है। गर्मी और लू का असर इस महीने के आखिर तक जारी रहने की आशंका है। पढ़िए- नौतपा की रिपोर्ट…
पटवा हवेलियां सूनी, सोनार का किला तप रहा
कभी पर्यटकों से गुलजार रहने वाली पटवा हवेली और सोनार का किला अब सूना पड़ा है। यहां पर्यटक न के बराबर है। वहीं प्रशासन ने शहर की सड़कों को ठंडा करने के लिए पानी का छिड़काव किया है। सोनार किले की दीवारें इतनी गर्म हैं कि उन्हें छूना भी मुश्किल है। भीषण गर्मी के कारण टूरिज्म बिजनेस ठप हो गया है।
सोनार किला लिविंग फोर्ट है। इसके अंदर करीब 4 हजार लोग रहते हैं। इसकी बलुआ पत्थरों से बनी दीवारें काफी ज्यादा गर्म हो रही हैं।
तस्वीर, पटवा हवेलियों की है। यहां की हवेलियां देखने दुनियाभर से टूरिस्ट आते हैं। इन दिनों ये सुनसान हैं।
टूरिस्ट के लिए 40% डिस्काउंट
होटल इंडस्ट्री से जुड़े मयंक भाटिया कहते हैं- इस वक्त जैसलमेर में टूरिस्ट न के बराबर हैं। काम-धंधा बेहद धीमा हो गया है। सैलानियों को आकर्षित करने के लिए हमने पैकेज काफी सस्ते कर दिए हैं।
सीधा 40 फीसदी का डिस्काउंट दे रहे हैं। यानी सर्दियों में जो पैकेज (वन रूम नाइट स्टे, डेजर्ट सफारी और राजस्थानी फूड) 10 हजार रुपए का मिलता था, उसे अभी हम मात्र 5 से 6 हजार रुपए में ऑफर कर रहे हैं।
पर्यटकों से भरी रहने वाली टेंट सिटी भी खाली पड़ी है।
सीजन बजट फ्रेंडली
विश्वप्रसिद्ध पटवा हवेली पर सन्नाटा पसरा है, गाइड का काम करने वाले ललित मालपानी कहते हैं- जो लोग शांति से घूमना पसंद करते हैं और भीड़भाड़ से परहेज है।
उनके लिए यह सीजन बजट फ्रेंडली हो सकता है। हालांकि, दिन में यहां जला देने वाली गर्मी और लू का असर ज्यादा है, लेकिन शाम ढलते ही मौसम ठीक हो जाता है। ऐसे में, सैलानी रात में ‘डेजर्ट सफारी’ का आनंद ले सकते हैं।
आधा हुआ घोटुआ मिठाई का कारोबार
गर्मी का असर जैसलमेर की प्रसिद्ध घोटुआ मिठाई के कारोबार पर देखने को मिल रहा है। मांग घटने और भयंकर तपिश के कारण इसका उत्पादन आधा रह गया है।
मिठाई विक्रेता विनय भाटिया ने बताया- गर्मी के इस सीजन में बाजार पूरी तरह ठप है। मिठाई का प्रोडक्शन 50 फीसदी तक डाउन हो गया है। फिलहाल वीकेंड पर नाममात्र के सैलानी जैसलमेर आ रहे हैं, मगर उनकी संख्या बेहद कम है।
घोटुआ मिठाई बनाने के कारीगर सोनू कुमार कहते हैं- भट्टी के पास बैठकर काम करना इस मौसम में सजा के जैसा है। गर्मी के कारण हमने काम का समय बदल दिया है।
व्यापारियों का कहना है इस साल गर्मी बहुत ज्यादा है। इस कारण लोकल डिमांड भी कम हो गई है।
1999 में 49 डिग्री था पारा
22 मई 1999 को पारा 49 डिग्री दर्ज किया गया था। यह मौसम विभाग के इतिहास में जैसलमेर का ऑल-टाइम हाई रिकॉर्ड है। 5 मई 2016 में भी तापमान 49 डिग्री तक पहुंच गया था। 27 अप्रैल 2026 को 46.4 डिग्री पारे ने पिछले 10 साल में अप्रैल का सबसे गर्म दिन होने का नया रिकॉर्ड बना दिया।
शहर में गर्मी से बचाव के लिए सड़क पर फायर ब्रिगेड से पानी का छिड़काव किया जा रहा है।
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