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मथुरा में मान्यता है कि यमुना को कृष्ण की पटरानी का दर्जा द्वापर युग में मिला, पुजारी नारायण तिवारी के अनुसार यमुना का पूजन करने से कृष्ण भक्ति और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. कहा जाता है कि पौराणिक मान्यता और द्वापर युग के अनुसार भगवान कृष्ण ने यमुना को अपनी पटरानी का दर्जा दिया था. इस पौराणिक मान्यता के अनुसार जहां भी कृष्ण का नाम आता है और यमुना का जहां भी जिक्र होता है.

मथुरा: तीन लोक से मथुरा न्यारी और यहां कृष्ण की अनेक लीलाओं का बखान आपको मिल जाएगा. यहां बाल्यावस्था में कृष्ण ने अनेकों लीलाओं को किया. मथुरा से होकर गुजरने वाली यमुना जी आखिर कृष्ण की पटरानी कैसे बनी और इसके पीछे की मान्यता क्या है. पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान कृष्ण को लेकर जब वासुदेव जी गोकुल आए थे. तो यमुना जी उनके चरण छूने के लिए टोकरी तक पहुँचने के लिए अपना विशाल रूप धारण किया. कृष्ण के चरण छूने के बाद वह पुन अपनी यात्रा रूप में आ गई और तभी कृष्ण की पटरानी नाम उनका दिया गया.

यमुना कैसे बनी कृष्ण की पटरानी

16 कलाओं में निपुण भगवान श्रीकृष्ण देवकी के आठवें पुत्र के रूप में जाने जाते हैं. मथुरा के राजा कंस के वध का कारण भी कृष्ण ही बने. लेकिन एक मान्यता योगीराज श्री कृष्ण की पटरानी से जुड़ी हुई है. यमुना जी को श्री कृष्ण की पटरानी के रूप में आज भी लोग जानते हैं. यमुना का पूजन द्वापर युग से ही चला आ रहा है. यमुना जी यमराज की बहन थी और कृष्ण की पटरानी बनने के पीछे की कहानी द्वापर युग से जुड़ी हुई है.

लोकल 18 से बातचीत करते हुए स्थानीय पुजारी नारायण तिवारी ने बताया कि द्वापर युग में जब भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था. कंस के भाई से वासुदेव जी अपनी आठवीं संतान को लेकर यमुना मार्ग से होते हुए वह मध्य रात्रि में गोकुल पहुंचे. वासुदेव जी गोकुल पहुंचने से पहले यमुना को जब पर कर रहे थे तब यमुना जी को पता चला कि भगवान कृष्ण को वासुदेव की टोकरी में रखकर गोकुल ले जा रहे हैं, तो उन्होंने कृष्ण के चरण छूने के लिए धीरे-धीरे अपना रूप बढ़ाया और वासुदेव जी के गले तक यमुना जल पहुंचने के बाद जैसे ही वासुदेव जी डूबने लगे तो कृष्ण ने अपने पैरों को यमुना जी से स्पर्श कर कर यमुना जी को शांत कर दिया. कहा जाता है कि पौराणिक मान्यता और द्वापर युग के अनुसार भगवान कृष्ण ने यमुना को अपनी पटरानी का दर्जा दिया था. इस पौराणिक मान्यता के अनुसार जहां भी कृष्ण का नाम आता है और यमुना का जहां भी जिक्र होता है.

यमुना का आशीर्वाद के बाद ही कृष्ण भक्ति होती है पूरी

वहां कृष्ण की पटरानी के रूप में मां यमुना को जाना जाता है. इतना ही नहीं हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने के लिए मथुरा वृंदावन पहुंचते हैं. मां यमुना का आशीर्वाद लेने पर ही कृष्ण की भक्ति पूरी होती है. नारायण तिवारी ने लोकल 18 से बातचीत के दौरान यह भी बताया कि गोकुल में जो भी भक्त आता है और ठकुरानी घाट पर मां यमुना का पूजन करता है. उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इतना ही नहीं जो भी भक्त जिस भाव में आता है. मां यमुना अपने उस भक्त को उसी भाव में दर्शन देकर आशीर्वाद प्रदान करती हैं.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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