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-नगर निगम का बड़ा कदम, 10 करोड़ 54 लाख की लागत से 193 नलकूपों का होगा ऑटोमेटिक संचालन
-नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने देखा प्रेजेंटेशन, जून के पहले सप्ताह से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
-मोबाइल से होगी निगरानी, बिजली बचत के साथ मोटरों की सुरक्षा भी होगी सुनिश्चित

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। नगर निगम अब आधुनिक तकनीक के जरिए शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को और अधिक मजबूत और हाईटेक बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। नगर निगम ने इंदिरापुरम और कविनगर जोन में लगे बड़े और छोटे नलकूपों के संचालन को स्वचालित बनाने के लिए स्काडा प्रणाली लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू होने वाली इस योजना के तहत 193 नलकूपों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा, जिससे जलापूर्ति व्यवस्था अधिक सुगम, सुरक्षित और प्रभावी बन सकेगी। शुक्रवार को नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने स्काडा प्रणाली को लेकर विभिन्न कंपनियों द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रेजेंटेशन का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों के साथ तकनीकी पहलुओं और इसके लाभों पर विस्तृत चर्चा की। नगर आयुक्त ने कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से नगर निगम की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी तथा प्रभावी बनाया जा रहा है। स्काडा प्रणाली लागू होने के बाद नलकूपों के संचालन और मॉनिटरिंग में काफी आसानी होगी। नगर निगम के अनुसार इस परियोजना के तहत 20 से 40 एचपी क्षमता वाले 113 नलकूप और 20 एचपी से कम क्षमता वाले 80 नलकूप पहले चरण में स्काडा प्रणाली से जोड़े जाएंगे। इस परियोजना पर लगभग 10 करोड़ 54 लाख रुपये की लागत आएगी। अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में नलकूपों के संचालन और रखरखाव पर होने वाले खर्च की तुलना में यह प्रणाली अधिक किफायती और प्रभावी साबित होगी।

स्काडा प्रणाली लागू होने के बाद नलकूपों का संचालन पूरी तरह ऑटोमेटिक हो जाएगा। निर्धारित समय के अनुसार नलकूप स्वत: चालू और बंद होंगे। इससे अनावश्यक बिजली खर्च पर नियंत्रण लगेगा और जलापूर्ति व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा। इसके साथ ही अधिकारियों को मोबाइल फोन पर ही प्रतिदिन की रिपोर्ट उपलब्ध होगी, जिससे निगरानी आसान और तेज हो जाएगी। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बताया कि स्काडा तकनीक के माध्यम से बिजली की खपत पर भी विशेष निगरानी रखी जाएगी। वोल्टेज में उतार-चढ़ाव की स्थिति में मोटर या अन्य उपकरणों के खराब होने की संभावना कम हो जाएगी। यदि किसी नलकूप से पानी आना बंद हो जाता है या मोटर व्यर्थ में चल रही होती है तो सिस्टम तुरंत अलार्म जारी करेगा, जिससे सुपरवाइजर और संबंधित टीम को तत्काल सूचना मिल जाएगी। इससे समय रहते समस्या का समाधान किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तकनीक के बिना किसी भी व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित करना संभव नहीं है।

नगर निगम लगातार नई तकनीकों को अपनाकर नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहा है। स्काडा प्रणाली भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे शहर की जलापूर्ति व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। महाप्रबंधक जल कामाख्या प्रसाद आनंद ने जानकारी देते हुए बताया कि परियोजना के लिए एएस इलेक्ट्रिकल्स, केएमबी इलेक्ट्रिकल्स और सर्वेश बिल्डर सहित तीन कंपनियों ने प्रेजेंटेशन दिया। इन कंपनियों ने अन्य शहरों में स्काडा प्रणाली के माध्यम से संचालित हो रही जलापूर्ति व्यवस्थाओं के उदाहरण भी प्रस्तुत किए। अधिकारियों ने तकनीकी गुणवत्ता, कार्य क्षमता और संचालन व्यवस्था का विस्तृत मूल्यांकन किया। उन्होंने बताया कि स्काडा प्रणाली लागू होने से नलकूपों के संचालन में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी। इसके अलावा उपकरणों की सुरक्षा भी बेहतर तरीके से हो सकेगी। समय पर मॉनिटरिंग होने से खराबी की स्थिति में तुरंत कार्रवाई संभव होगी, जिससे जलापूर्ति बाधित होने की समस्या भी कम होगी। नगर निगम अधिकारियों का मानना है कि यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो भविष्य में शहर के अन्य क्षेत्रों में भी इस प्रणाली को लागू किया जाएगा। इससे पूरे शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को आधुनिक और स्मार्ट बनाया जा सकेगा।

परियोजना के तहत ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रेजेंटेशन के दौरान अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार, लेखाधिकारी अनुराग और जलकल विभाग की अन्य टीम भी मौजूद रही। अधिकारियों ने परियोजना को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने की रणनीति पर चर्चा की। नगर निगम का लक्ष्य जून के पहले सप्ताह से इंदिरापुरम और कविनगर क्षेत्र में स्काडा प्रणाली के माध्यम से नलकूप संचालन शुरू करना है। नगर निगम की इस पहल को शहर के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह तकनीक न केवल जलापूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाएगी, बल्कि बिजली बचत, उपकरण सुरक्षा और पारदर्शी संचालन के जरिए नगर निगम की कार्यक्षमता को भी नई पहचान देगी।

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