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-दिल्ली मेडिकल काउंसिल के चुनाव में 38 प्रत्याशी मैदान में, 31 मई को होगा मतदान
– ‘नई ऊर्जा, बेहतर डीएमसी’ के नारे के साथ डॉक्टरों के बीच पहुंच रहे डॉ. सुशील कुमार विमल
-पारदर्शिता, डॉक्टर सुरक्षा और आसान पंजीकरण व्यवस्था को बनाया चुनावी एजेंडा

उदय भूमि संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएमसी) की गवर्निंग काउंसिल के आठ सदस्यों के चुनाव को लेकर चिकित्सा जगत में हलचल तेज हो गई है। इस बार चुनावी मैदान में कुल 38 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। 8 मई शुक्रवार शाम को उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी की गई थी, जबकि 16 प्रत्याशियों ने अपने नाम वापस ले लिए। आगामी 31 मई को सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक मतदान होगा, जिसमें करीब 60 हजार पंजीकृत डॉक्टर अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इस चुनाव में जिन उम्मीदवारों की सबसे अधिक चर्चा हो रही है, उनमें डॉ. सुशील कुमार विमल प्रमुख नाम बनकर उभरे हैं। चिकित्सा, प्रशासन और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में लंबे अनुभव के कारण डॉ. सुशील कुमार विमल डॉक्टर समुदाय के बीच एक मजबूत और भरोसेमंद चेहरे के रूप में देखे जा रहे हैं।  ‘नई ऊर्जा, बेहतर डीएमसी’ के संदेश के साथ वह लगातार डॉक्टरों के बीच जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। डॉ. सुशील कुमार विमल एमबीबीएस, एमडी गोल्ड मेडलिस्ट, डीएनबी और एमएनएएमएस जैसी प्रतिष्ठित उपाधियों से सम्मानित हैं। वर्तमान में वह भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में उप आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं। इसके साथ ही वह इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की पत्रिका के अतिथि संपादक के रूप में भी सेवाएं दे रहे हैं।

चुनावी प्रचार के दौरान डॉ. सुशील कुमार विमल ने डीएमसी को पारदर्शी और डॉक्टर हितैषी संस्था बनाने का संकल्प दोहराया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली मेडिकल काउंसिल केवल प्रशासनिक संस्था नहीं, बल्कि डॉक्टरों के सम्मान, अधिकार और सुरक्षा की मजबूत आवाज बननी चाहिए। डॉ. सुशील कुमार विमल ने अपने बयान में कहा डीएमसी को डॉक्टरों के लिए अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सहयोगी संस्था बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। मेरा उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि डॉक्टरों की वास्तविक समस्याओं का समाधान करना है। मैं चाहता हूं कि युवा डॉक्टरों से लेकर वरिष्ठ चिकित्सकों तक सभी को सम्मान और सुरक्षित कार्य वातावरण मिले।

उन्होंने कहा आज डॉक्टरों को कई प्रशासनिक परेशानियों, झूठी शिकायतों और असुरक्षा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यदि मुझे मौका मिलता है तो डीएमसी को ऐसा मंच बनाया जाएगा, जहां डॉक्टरों की समस्याओं का त्वरित और निष्पक्ष समाधान हो सके। अपने विजन डॉक्यूमेंट में डॉ. विमल ने डीएमसी पंजीकरण प्रक्रिया को आसान और परेशानी मुक्त बनाने का वादा किया है। उन्होंने कहा कि विदेशी विश्वविद्यालयों से पढ़ाई कर लौटने वाले भारतीय छात्रों के लिए इंटर्नशिप और पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा। साथ ही डॉक्टरों के खिलाफ झूठी और दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

डॉ. सुशील कुमार विमल ने फर्जी डॉक्टरों और झोलाछाप चिकित्सकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के कारण न केवल मरीजों की जान खतरे में पड़ती है, बल्कि योग्य चिकित्सकों की प्रतिष्ठा भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि डीएमसी को इस दिशा में अधिक सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभानी होगी। अपने चुनावी अभियान में उन्होंने रेजिडेंट डॉक्टरों और सेवा चिकित्सकों की कार्य परिस्थितियों को बेहतर बनाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है। उनका कहना है कि लंबे समय तक दबाव में काम करने वाले डॉक्टरों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिलना चाहिए। इसके साथ ही छोटे क्लीनिक और लैब संचालित करने वाले डॉक्टरों के हितों की रक्षा करने का भी उन्होंने भरोसा दिलाया। डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने गंभीर चिंता जताई। डॉ. सुशील कुमार विमल ने कहा कि अस्पतालों और क्लीनिकों में डॉक्टरों पर बढ़ते हमले बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि डीएमसी को ऐसे मामलों में डॉक्टरों के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

डॉ. सुशील कुमार विमल का चिकित्सा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में लंबा अनुभव रहा है। वह इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की केंद्रीय कार्यकारिणी समिति और दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन की केंद्रीय समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने आईएमए (ईडीबी) के उपाध्यक्ष और संपादक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य किया है। उन्हें चिकित्सा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। इनमें भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दिया गया  ‘ऑथर अमंग डॉक्टर्स अवॉर्ड ‘, दिल्ली सरकार का  ‘स्टेट लेप्रोसी अवॉर्ड ‘, आईएमए का  ‘डॉ. केतन देसाई युवा लीडर अवॉर्ड ‘, डीएमए का  ‘एमिनेंट मेडिकल पर्सन अवॉर्ड’ और दैनिक जागरण समूह द्वारा दिया गया  ‘कोरोना वॉरियर अवॉर्ड’ शामिल हैं। डीएमसी चुनाव को लेकर डॉक्टरों में इस बार खासा उत्साह दिखाई दे रहा है। डॉक्टरों का मानना है कि यह चुनाव चिकित्सा व्यवस्था की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण अवसर है। ऐसे में अब सभी की निगाहें 31 मई को होने वाले मतदान और उसके परिणामों पर टिकी हुई हैं।

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