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Global Growth Update : संयुक्‍त राष्‍ट्र ने ईरान युद्ध की वजह से दुनियाभर की अर्थव्‍यवस्‍थाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई है. यूएन के अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि हालात जल्‍द सुधरे नहीं तो ग्‍लोबल इकनॉमी 100 साल में सबसे ज्‍यादा सुस्‍त पड़ जाएगी. सभी देशों को महंगाई का सामना करना पड़ेगा.

यूएन की चेतावनी- 100 साल में जो नहीं हुआ, वो अब होगा, रेंगती नजर आएगी दुनियाZoom

संयुक्‍त राष्‍ट्र ने महंगाई और विकास दर को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है.

नई दिल्‍ली. अभी तक आपने यह कहावत सुनी होगी कि दो के झगड़े में तीसरे का फायदा. लेकिन, ईरान और अमेरिका के युद्ध ने इसके मायने ही बदलकर रख दिए हैं. अब तो ऐसा लग रहा कि दो के झगड़े से सबका नुकसान, की नई कहावत बन जाएगी. कम से कम संयुक्‍त राष्‍ट्र की हालिया चेतावनी को देखकर तो यही लग रहा है. यूएन यानी संयुक्‍त राष्‍ट्र के अर्थशास्त्रियों ने पूरी दुनिया को चेताया है कि ईरान युद्ध की वजह से सभी अर्थव्‍यवस्‍थाएं रेंगती नजर आएंगी. महंगाई भी बढ़ेगी और कोरोना महामारी से अब तक जो भी ग्रोथ हुई है, वह दोबारा मिट्टी में मिल जाएगी.

संयुक्‍त राष्‍ट्र के अर्थशात्रियों ने ग्‍लोबल जीडीपी को लेकर नई चेतावनी जारी की है. उन्‍होंने कहा है कि मिडल ईस्‍ट में जारी संकट और कच्‍चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ेगी और ग्‍लोबल इकनॉमी पर दबाव पड़ेगा. इकनॉमिस्‍ट ने कहा है कि साल 2026 में ग्‍लोबल इकनॉमी की विकास दर 2.5 फीसदी रहने का अनुमान है. इससे पहले जनवरी में इसकी विकास दर का अनुमान 2.7 फीसदी लगाया गया था. अगर हालात ज्‍यादा खराब हुए तो यह विकास दर 2.1 फीसदी के आसपास भी जा सकती है.

100 साल की सबसे सुस्‍त रफ्तार
यूएन के आर्थिक एवं सामाजिक मामलात विभाग के निदेशक शांतंनु मुखर्जी ने कहा कि यह एक शताब्‍दी यानी 100 साल में सबसे सुस्‍त विकास दर होगी. ऐसा तो कोविड-19 महामारी और 2008 की आर्थिक महामंदी में भी नहीं हुआ था. उन्‍होंने कयास लगाए क‍ि ईरान संकट की वजह से ग्‍लोबल महंगाई की दर इसी साल 3.9 फीसदी तक पहुंच जाएगी, जो जनवरी में लगाए गए अनुमान से 0.80 फीसदी ज्‍यादा है. होर्मुज जलडमरूमध्‍य के ब्‍लॉक होने से दुनिया के तमाम देशों को तेल, प्राकृतिक गैस, फर्टिलाइजर्स व अन्‍य पेट्रो उत्‍पादों की सप्‍लाई पर असर पड़ रहा है.

हर चीज पर असर डालता है ईंधन
मुखर्जी ने कहा कि ईंधन ऐसी चीज है, जिसका असर लगभग हर उत्‍पाद पर दिखाई देता है. महंगे क्रूड से रिफाइनरियों का खर्च बढ़ेगा और औद्योगिक उत्‍पादन व कॉमर्शियल ट्रांसपोर्ट सुस्‍त पड़ जाएगा. इससे दुनिया के ज्‍यादातर देश महंगाई का सामना करेंगे. धनी और विकसित देशों में महंगाई की दर साल 2026 में ही 2.6 फीसदी से बढ़कर 2.9 फीसदी तक जा सकती है, जबकि विकासशील देशों में यह 4.2 फीसदी से बढ़कर 5.2 फीसदी तक हो सकती है. महंगा ईंधन न सिर्फ परिवहन की लागत बढ़ाएगा, बल्कि कमाई पर भी असर डालेगा.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

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