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देश में लोगों के बीच विटामिन और पोषक तत्वों की कमी लगातार बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। दिल्ली में नई स्टडी में सामने आया है कि बाजरे पर आधारित डाइट, यदि विटामिन और मल्टीविटामिन सप्लीमेंट्स के साथ ली जाए, तो यह शरीर में विटामिन बी12, विटामिन डी और हीमोग्लोबिन के स्तर को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। 

यह अध्ययन यूरोपियन जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन एंड फूड सेफ्टी में प्रकाशित हुआ है। इस शोध को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), सीलिएक सोसाइटी ऑफ इंडिया और डॉ. डैंग्स लैब के शोधकर्ताओं ने मिलकर तैयार किया। यह शोध दिल्ली-एनसीआर स्थित नेशनल एसोसिएशन ऑफ द ब्लाइंड (एनएबी) में 18 से 45 वर्ष के वयस्कों पर किया गया।

अध्ययन का उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या बाजरे से भरपूर भोजन, विटामिन सप्लीमेंट्स के साथ लेने पर, अकेले सप्लीमेंट्स की तुलना में अधिक फायदा पहुंचा सकता है। रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल के तहत कुल 54 प्रतिभागियों को दो समूहों में बांटा गया।

एक समूह को केवल विटामिन डी, विटामिन बी12 और मल्टीविटामिन सप्लीमेंट्स दिए गए, जबकि दूसरे समूह को इन्हीं सप्लीमेंट्स के साथ बाजरे पर आधारित भोजन भी दिया गया। यह अध्ययन 60 दिनों तक चला। शोध के नतीजों में पाया गया कि बाजरे वाली डाइट लेने वाले समूह विशेषकर महिलाओं में विटामिन बी12 और विटामिन डी के स्तर में अधिक सुधार देखने को मिला। 

अध्ययन के अनुसार, बाजरे वाला भोजन लेने वाले समूह में विटामिन बी12 का स्तर औसतन 302 पिकोग्राम प्रति मिलीलीटर तक बढ़ा, जबकि केवल सप्लीमेंट लेने वाले समूह में यह बढ़ोतरी 78 पिकोग्राम प्रति मिलीलीटर रही। महिलाओं में विटामिन डी के स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। इसके अलावा हीमोग्लोबिन का स्तर भी बेहतर पाया गया।

बाजरा फाइबर, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर

शोधकर्ता चंद्रकांत एस पांडव ने बताया कि बाजरा फाइबर, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, जो शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाने में मदद करता है। पोषण विशेषज्ञ इशी खोसला ने बताया कि बाजरे को नियमित डाइट में शामिल करने से मोटापा और कई पुरानी बीमारियों का खतरा भी कम हो सकता है।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भोजन की मात्रा और समय का ध्यान रखना जरूरी है। एक अन्य शोधकर्ता कपिल यादव ने बताया कि विटामिन डी और बी12 के स्तर में सुधार का मुख्य कारण सप्लीमेंट्स थे, जबकि बाजरे से अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना दिखाई दी। उन्होंने माना कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ज्यादा सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। इसके पीछे पुरुष प्रतिभागियों की कम संख्या को एक कारण माना गया।

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