बॉलीवुड के इतिहास में ‘डोला रे डोला’ उन गिने-चुने गानों में शामिल है, जिसने दो बड़ी हस्तियों माधुरी दीक्षित और ऐश्वर्या राय को एक मंच पर ला दिया. साल 2002 में आई संजय लीला भंसाली की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘देवदास’ का यह गाना आज भी उतना ही ताजा है, जितना 24 साल पहले था. लेकिन इस गाने के पर्दे के पीछे एक ऐसा राज था जो शायद ही किसी को पता हो. माधुरी दीक्षित उस वक्त चार महीने की प्रेग्नेंट थीं और उन्हें तेज बुखार के साथ चक्कर आ रहे थे. फिर भी, उन्होंने एक ही स्टेप को सही करने के लिए 13 घंटे तक रिहर्सल की.
नई दिल्ली. माधुरी दीक्षित का ‘एक दो तीन’, ‘धक-धक करने लगा’, ‘चने के खेत में’, ‘मार डाला’ और ‘डोला रे डोला’ जैसे और न जाने कितने गाने सिर्फ सुपरहिट डांस नंबर नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा की पहचान बन चुके हैं. अपनी मुस्कान, एक्सप्रेशंस और बेहतरीन डांस से माधुरी ने हर गाने को यादगार बनाया, लेकिन ‘डोला रे डोला’ के पीछे छिपी कहानी शायद ही कोई जानता हो. ‘देवदास’ का आइकॉनिक गाना ‘डोला रे डोला’ की शूटिंग के दौरान माधुरी चार महीने की प्रेग्नेंट थीं. उन्हें तेज बुखार था, बार-बार चक्कर आ रहे थे, फिर भी उन्होंने घंटों तक रिहर्सल और शूटिंग जारी रखी. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस आइकॉनिक गाने के पीछे दर्द, संघर्ष और जबरदस्त मेहनत की कहानी छिपी हुई थी. अब करीब 24 साल बाद इस गाने से जुड़ा एक बड़ा खुलासा सामने आया है.
दिग्गज कोरियोग्राफर सरोज खान की टीम में काम कर चुकीं रुबीना खान ने हाल ही में बताया कि ‘डोला रे डोला’ की शूटिंग के दौरान माधुरी दीक्षित चार महीने की प्रेग्नेंट थीं. रुबिना ने बताया कि गाने का एक खास स्टेप (जिसमें माधुरी घूमकर बैठती हैं) को सही करने के लिए करीब 13 घंटे तक रिहर्सल चली. माधुरी को चक्कर आ रहे थे और बुखार भी था, फिर भी उन्होंने कभी स्टेप बदलने को नहीं कहा.
बॉलीवुड ठिकाना को दिए इंटरव्यू में रुबीना ने बताया कि इस गाने को शूट होने में 17 दिन लगे थे. रिहर्सल कम से कम एक महीने तक चली. हम अलग रिहर्सल करते थे और लीड एक्टर्स अलग से रिहर्सल करते थे. उन्होंने बताया, ‘गाने में एक स्टेप है जिसमें माधुरी मैम टर्न लेकर बैठती हैं. वह शॉट सुबह 9 बजे से रात 10 बजे तक चलता रहा, क्योंकि वह चार महीने की प्रेग्नेंट थीं. इसलिए वह ठीक से टर्न नहीं ले पा रही थीं और उन्हें चक्कर आ रहे थे.’
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रुबीना ने यह भी बताया कि उस दौरान माधुरी दीक्षित को तेज बुखार भी था. फिर भी उन्होंने कभी अपनी गुरु सरोज खान से स्टेप बदलने की गुजारिश नहीं की. बातचीत में उन्होंने आगे बताया, ‘वो कभी नहीं कहती थीं कि मास्टर जी, ये स्टेप मुश्किल है, इसे बदल दीजिए. जो मास्टर जी कहती थीं, वही आखिरी सच होता था. नए कलाकार अक्सर कहते हैं कि ये स्टेप बहुत टफ है, लेकिन मास्टर जी शायद ही कभी अपना स्टेप बदलती थीं.
केवल माधुरी ही नहीं, सरोज खान भी शूटिंग के दौरान बेहद बीमार थीं. संजय लीला भंसाली ने इस बारे में बताया था कि सरोज खान दर्द से कराह रही थीं, लेकिन गानां छोड़ा नहीं. फर्श पर लेटकर डांसरों को निर्देश देती रहीं. उन्होंने 15 दिन शूटिंग की. फिल्म रिलीज होने के दिन सरोज खान अस्पताल में थीं. भंसाली और ऐश्वर्या उनसे मिलने गए तो वह पूरी तहह होश में नहीं थीं. अर्ध-बेहोशी में सरोज खान ने पूछा, ‘ढोला रे ढोला पे पैसे मिले या नहीं?’ उनकी इस लगन को देखकर भंसाली ने उन्हें ‘कोरियोग्राफी की सलीम-जावेद’ नाम दिया.
हालांकि, संजय लीला भंसाली और सरोज के बीच हमेशा मधुर संबंध नहीं रहे. साल 2020 में सरोज खान के निधन से पहले, उन्होंने ‘टॉकिंग सिनेमा’ चैनल पर आरोप लगाया था कि भंसाली ने उनकी कोरियोग्राफी चुरा ली. 2013 की फिल्म ‘राम-लीला’ के गाने ‘राम चाहे लीला’ में उनके स्टेप्स का इस्तेमाल हुआ, लेकिन उन्हें न तो पैसे मिले और न ही क्रेडिट… जिससे सरोज खान नाराज थीं.
माधुरी ने 1999 में अमेरिका में रहने वाले सर्जन श्रीराम नेने से शादी की थी और बॉलीवुड छोड़कर डेनवर में बस गई थीं. संजय लीला भंसाली ने ही उन्हें ‘देवदास’ में चंद्रमुखी का किरदार देकर वापस लाया. शूटिंग खत्म होने के बाद 2003 में उनके बेटे अरिन का जन्म हुआ और 2005 में रायन का जन्म हुआ. ‘ढोला रे ढोला’ आज भी बॉलीवुड का सबसे पॉपुलर डांस डुएट माना जाता है. इसने सरोज खान को नेशनल अवॉर्ड दिलाया और 17 अन्य अवॉर्ड्स जीते.
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