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CM Vijay Thalapathy Latest News: टीवीके ने जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं किया और वो फिर भी चुनाव जीत गए पर कैसे… ऐसा ही बयान आया है डीएमके चीफ स्टालिन की तरफ से. तमिलनाडु के तंजावुर में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सत्ताधारी टीवीके ने जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं किया, लेकिन सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके लोगों को प्रभावित करते हुए 23 अप्रैल के विधानसभा चुनाव जीतने में कामयाब रही.
स्टालिन ने बताया कि विजय थलापति की टीवीके कैसे विधानसभा चुनावों में जीती (Photo AI)
थंजावुर (तमिलनाडु). द्रमुक (DMK) अध्यक्ष एम के स्टालिन को आखिरकार पता चल ही गया कि विजय थलापति की पार्टी टीवीके विधानसभा चुनाव में कैसे जीत गई. स्टालिन ने कहा है कि मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ टीवीके ने जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं किया. इसके बावजूद उसने 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव सोशल मीडिया के माध्यम से मतदाताओं को प्रभावित करके चुनाव जीत लिया.
थंजावुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्टालिन ने अपनी पार्टी की ओर से किए गए कई कदमों का जिक्र किया, जिनमें सम्मेलनों का आयोजन और मतदाता सूची की स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन (SIR) से जुड़ा फील्ड वर्क भी शामिल था. उन्होंने कहा कि द्रमुक कार्यकर्ता घर-घर और क्षेत्र-क्षेत्र जाकर काम कर रहे थे.
टीवीके पर लगया क्या आरोप
स्टालिन ने बिना सीधे तौर पर टीवीके का नाम लिए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल ने द्रमुक की तरह कोई फील्ड वर्क नहीं किया. फिर भी चुनाव जीतने में सफल रहा. उन्होंने दावा किया कि कई जगहों पर टीवीके ने मतगणना एजेंट तक नियुक्त नहीं किए, इसके बावजूद नतीजे उसके पक्ष में गए.
कैसे जीती टीवीके स्टालिन ने बताया?
द्रमुक अध्यक्ष ने फिर से टीवीके का नाम लेने से बचते हुए कहा कि सोशल मीडिया का इस तरह इस्तेमाल किया गया कि बच्चों के माध्यम से परिवार के अन्य सदस्यों को प्रभावित किया गया और ‘यह हमारी नजर से चूक गया’. उन्होंने स्वीकार किया कि अब द्रमुक को इस चाल का अहसास हो चुका है और पार्टी भविष्य में बेहद सतर्क रहेगी.
अब क्या है डीएमके की रणनीति?
स्टालिन ने कहा कि पार्टी ने ऐसी सोशल मीडिया आधारित पहलों को नाकाम करने के लिए योजनाएं तैयार कर ली हैं. उनके अनुसार द्रमुक अब जमीनी काम के साथ-साथ ऑनलाइन मोर्चे पर भी मजबूत रणनीति अपनाएगी ताकि मतदाताओं तक हर स्तर पर प्रभावी तरीके से पहुंचा जा सके. पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन ने याद दिलाया कि 1949 में स्थापित द्रमुक ने अपने लंबे राजनीतिक सफर में कई बार चुनावी जीत और हार दोनों देखी हैं लेकिन हर बार पार्टी ‘फीनिक्स’ की तरह राख से फिर उठ खड़ी हुई है.उन्होंने दावा किया कि इस बार भी द्रमुक हालात का गहराई से विश्लेषण कर रही है और आने वाले समय में खुद को और मजबूत रूप में पेश करेगी.
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