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-बहुमंजिला भवनों, अस्पतालों और सोसायटियों में चला व्यापक अग्नि सुरक्षा अभियान
-अग्निशमन टीमों ने किया निरीक्षण, कमियों पर जारी हुए नोटिस
-प्रशिक्षण और जागरूकता से आपदा प्रबंधन को बनाया मजबूत
-सुरक्षित भवन और जागरूक नागरिक ही रोक सकते हैं बड़ी आपदा : राहुल पाल

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जनपद में बढ़ती बहुमंजिला इमारतों, अस्पतालों और भीड़भाड़ वाले परिसरों को ध्यान में रखते हुए कमिश्नरेट गाजियाबाद द्वारा अग्नि सुरक्षा को लेकर व्यापक स्तर पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। 01 मई  से संचालित एक सप्ताह के विशेष अग्नि सुरक्षा जागरूकता अभियान के अंतर्गत 15 एवं 16 मई (शनिवार) को जनपद के विभिन्न हाईराइज भवनों, अस्पतालों, संस्थानों और औद्योगिक परिसरों में बड़े पैमाने पर मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस अभियान का उद्देश्य आग जैसी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता विकसित करना तथा आम नागरिकों को अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना रहा। मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल के निर्देशन में अग्निशमन विभाग की टीमों ने अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर फायर रिस्क निरीक्षण, सुरक्षा परीक्षण और मॉक रेस्क्यू अभ्यास कराए। विभाग की कार्यशैली इस दौरान पूरी तरह सक्रिय, सतर्क और तकनीकी दृष्टि से मजबूत दिखाई दी। अधिकारियों ने स्वयं मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की और भवन प्रबंधन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

अभियान के दौरान इंदिरापुरम स्थित गुलमोहर रेजीडेंसी शक्तिखंड-2, गोविंदपुरम का शिवालिक हॉस्पिटल, अशोक नगर स्थित ओम नर्सिंग होम और अग्रवाल मैटरनिटी एंड सर्जिकल सेंटर, बजरिया डाकघर, निस्तौली टीला मोड़ स्थित भारत सिटी सोसायटी फेज-2, सिकंदरपुर का शांति भवन बैंकट हॉल, राजेंद्र नगर सेक्टर-5 की ए.के. चिल्ड्रन एकेडमी, भोजपुर क्षेत्र की कृपा राम डेरी, ट्रॉनिका सिटी लोनी स्थित तेजस फ्लेक्सीपैक प्राइवेट लिमिटेड तथा चमन विहार लोनी के जोगिंदर पैलेस सहित अनेक महत्वपूर्ण परिसरों में मॉक ड्रिल कराई गई। मॉक ड्रिल के दौरान फायर टेंडरों के साथ टीमों ने भवनों के प्रवेश एवं निकास मार्गों की जांच की, अग्निशमन यंत्रों की कार्यशीलता का परीक्षण किया तथा आपातकालीन निकासी प्रक्रिया का वास्तविक अभ्यास कराया। कर्मचारियों, निवासियों, मरीजों और आम नागरिकों को अग्निशमन उपकरणों के प्रयोग, आग लगने पर प्राथमिक प्रतिक्रिया, धुएं से बचाव तथा सुरक्षित निकासी के तरीकों की विस्तृत जानकारी दी गई।

मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल ने बताया कि आग की घटनाओं में अधिकतर नुकसान लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण होता है। उन्होंने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल निरीक्षण करना नहीं बल्कि लोगों को प्रशिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में शुरुआती प्रतिक्रिया तुरंत दी जा सके और बड़ी दुर्घटना को रोका जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षित भवन निर्माण और नियमित सुरक्षा ऑडिट ही अग्नि दुर्घटनाओं की रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय है। निरीक्षण के दौरान जिन भवनों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था में कमियां पाई गईं, वहां सुधार हेतु नोटिस जारी किए गए। साथ ही भवन स्वामियों और प्रबंधन को विद्युत सुरक्षा प्रणाली का ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने यह भी सुनिश्चित कराया कि सभी अग्निशमन प्रणालियां ऑटो मोड में कार्यशील रहें तथा आपातकालीन निकास मार्गों पर किसी प्रकार का अवरोध न हो।

अभियान के अंतर्गत अग्निशमन विभाग ने विशेष रूप से हाईराइज इमारतों और अस्पतालों पर ध्यान केंद्रित किया, क्योंकि ऐसे स्थानों पर आग लगने की स्थिति में जोखिम अधिक होता है। विभाग की टीमों ने भवन प्रबंधन को यह भी समझाया कि नियमित मॉक ड्रिल आयोजित करना और कर्मचारियों को प्रशिक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। सीएफओ राहुल पाल ने आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि अग्नि सुरक्षा केवल विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन करे, विद्युत उपकरणों का सावधानीपूर्वक उपयोग करे और सुरक्षा प्रणालियों को सक्रिय रखे, तो बड़ी जनहानि और आर्थिक नुकसान से बचा जा सकता है।

कमिश्नरेट गाजियाबाद द्वारा चलाया जा रहा यह विशेष अभियान जनसुरक्षा के प्रति प्रशासन की गंभीरता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मॉक ड्रिल और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से न केवल संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है, बल्कि नागरिकों में भी आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ी है। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार के अभियान भविष्य में संभावित अग्नि दुर्घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और गाजियाबाद को सुरक्षित शहर बनाने की दिशा में यह प्रयास एक मजबूत कदम साबित होगा।

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