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पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की जिंदगी का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। महंगाई अब पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रही, बल्कि रसोई से लेकर सड़क तक इसका असर दिखने लगा है। ईंधन महंगा होने से ढुलाई लागत बढ़ेगी, जिसका असर राशन, फल-सब्जियों और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर पड़ना तय है। आम आदमी की जेब के साथ अब उसकी बचत और उम्मीदों पर भी असर पड़ने लगा है।

आईटीओ, लक्ष्मी नगर, आईएनए, द्वारका, करोल बाग और मयूर विहार समेत कई पेट्रोल पंपों पर शुक्रवार सुबह लोगों की भीड़ देखने को मिली। कई लोग पुरानी दर पर तेल भराने पहुंचे, लेकिन बढ़ी कीमतों की जानकारी मिलने पर नाराजगी जताई। आईएनए स्थित एक पेट्रोल पंप कर्मचारी रमेश ने बताया कि सुबह अचानक गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं और कई ग्राहक बढ़े दाम को लेकर सवाल करने लगे।

अक्षरधाम के पास पेट्रोल भरवा रहे बाइक चालक अमित शर्मा ने बताया कि पहले बाइक पर करीब चार हजार रुपये मासिक खर्च होता था, जो अब पांच हजार से ऊपर जाएगा। घर का किराया, बच्चों की फीस और राशन पहले ही महंगा है, अब पेट्रोल ने अलग बोझ बढ़ा दिया है।

नौकरीपेशा सबसे ज्यादा प्रभावित

राजधानी में लाखों लोग निजी वाहनों से रोज दफ्तर आते-जाते हैं। पेट्रोल 97.77 रुपये प्रति लीटर पहुंचने के बाद अब लोग विकल्प तलाशने लगे हैं। नोएडा में काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रियांशु ने कहा कि कार से ऑफिस जाना महंगा पड़ने लगा है। ट्रैफिक और बढ़ते खर्च के बीच अब मेट्रो बेहतर विकल्प लग रही है।

सीएनजी चालकों पर भी बढ़ा दबाव

राजधानी में बड़ी संख्या में ऑटो और टैक्सी सीएनजी पर निर्भर हैं। आईटीओ स्थित स्टेशन पर ऑटो चालक राजू यादव ने बताया कि पहले सीएनजी सस्ती मानी जाती थी, लेकिन अब उसमें भी राहत नहीं बची। वहीं एप आधारित टैक्सी चालक मोहम्मद आरिफ का कहना है कि खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन कमाई नहीं।

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