1972 में के दशक में आई इस हॉरर फिल्म ने भारतीय सिनेमा में ऐसा डर और सस्पेंस पैदा किया था कि लोग रातों की नींद तक भूल गए थे. असली कब्रिस्तान में हुई शूटिंग, जॉम्बी जैसी कहानी और शूटिंग के दौरान शव मिलने के दावे ने इसे उस दौर की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल कर दिया था. कम बजट में बनी इस मूवी ने बॉक्स ऑफिस पर भी ऐसा कमाल किया कि सालों बाद तक इसके किस्से लोगों के बीच डर और रोमांच के साथ सुनाए जाते रहे. क्या आप जानते हैं कौन सी है यह फिल्म? चलिए जानते हैं…
आज हॉरर और जॉम्बी फिल्मों का क्रेज लोगों के सिर चढ़कर बोलता है, लेकिन हिंदी सिनेमा में एक समय ऐसा भी था जब इस तरह की फिल्में बनाना किसी बड़े रिस्क से कम नहीं माना जाता था. 70 के दशक में आई एक फिल्म ने भारतीय सिनेमा में ऐसा डर और सस्पेंस पैदा किया कि लोग हैरान रह गए थे. कम बजट में बनी इस फिल्म की कहानी से लेकर शूटिंग तक हर चीज चर्चा में रही. यहां तक कि शूटिंग के दौरान असली लाश मिलने का दावा भी किया गया था. यही वजह है कि आज भी इस फिल्म का नाम भारतीय हॉरर सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में लिया जाता है. (फोटो साभारः imdb)
सिर्फ 40 दिनों में पूरी हुई शूटिंग:आज जहां एक फिल्म को बनने में कई महीने या साल लग जाते हैं, वहीं ‘दो गज जमीन के नीचे’ की शूटिंग सिर्फ 40 दिनों में पूरी कर ली गई थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म का बजट करीब साढ़े तीन लाख रुपये था.जबकी इसने 45 लाख रुपए की कमाई की थी. कम बजट होने के बावजूद मेकर्स ने फिल्म के डर और सस्पेंस पर पूरा ध्यान दिया. यही वजह रही कि रिलीज के बाद दर्शकों के बीच इसे लेकर काफी चर्चा हुई. (फोटो साभारः imdb)
असली कब्रिस्तान में हुई शूटिंग: फिल्म को ज्यादा रियल दिखाने के लिए इसकी शूटिंग असली कब्रिस्तान में की गई थी. उस समय इस तरह की लोकेशन पर शूट करना आसान नहीं माना जाता था, लेकिन मेकर्स चाहते थे कि दर्शकों को हर सीन बिल्कुल असली लगे. फिल्म के कई सीन उसी वजह से काफी डरावने और अलग महसूस होते थे. (फोटो साभारः imdb)
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शूटिंग के दौरान मिला था शव?:फिल्म से जुड़ा सबसे चर्चित किस्सा शूटिंग के दौरान सामने आया था. रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि एक सीन की शूटिंग के दौरान खुदाई करते वक्त वहां असली शव मिल गया था. यह घटना सुनकर पूरी टीम घबरा गई थी और कुछ समय के लिए शूटिंग भी रोकनी पड़ी थी.यह किस्सा सालों तक लोगों के बीच चर्चा का हिस्सा बना रहा.
(फोटो साभारः imdb)
युवाओं के बीच बना अलग क्रेज: रिलीज के बाद कई लोगों ने इसे बी-ग्रेड हॉरर फिल्म कहा, लेकिन इसके बावजूद युवाओं के बीच इसका अलग ही क्रेज देखने को मिला. छोटे शहरों और कस्बों में लोग डर और रोमांच के लिए यह फिल्म देखने सिनेमाघरों तक पहुंच रहे थे. धीरे-धीरे फिल्म ने कल्ट हॉरर मूवी का दर्जा हासिल कर लिया.
रामसे ब्रदर्स बने हॉरर के किंग:‘दो गज जमीन के नीचे’ के बाद रामसे ब्रदर्स ने ‘पुराना मंदिर’, ‘वीराना’ और ‘बंद दरवाजा’ जैसी कई हॉरर फिल्में बनाईं. उनकी फिल्मों का बैकग्राउंड म्यूजिक, डरावना माहौल और रहस्यमयी कहानियां लोगों को खूब पसंद आती थीं. एक समय ऐसा था जब टीवी पर उनकी फिल्में आते ही लोग परिवार के साथ बैठकर देखा करते थे. (फोटो साभारः imdb)
कम बजट और नए कलाकारों के साथ बनी ‘दो गज जमीन के नीचे’ ने यह साबित कर दिया था कि अगर कहानी दमदार हो तो फिल्म लोगों के दिल और दिमाग दोनों पर असर छोड़ सकती है. यही वजह है कि इतने साल बाद भी इस फिल्म के किस्से आज तक लोगों के बीच दिलचस्पी के साथ सुने जाते हैं.
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