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भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में स्थित भरत कुंड आस्था त्याग और तपस्या का अद्भुत प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पवित्र स्थल को प्राचीन समय में नंदीग्राम कहा जाता था. मान्यता है कि यहां नंदेश्वर महादेव मंदिर विराजमान हैं. जिसके कारण इस क्षेत्र को नंदीग्राम के नाम से पहचान मिली. पवन दास शास्त्री बताते हैं कि जब भगवान श्रीराम वनवास गए थे तब उनके छोटे भाई भरत ने अयोध्या का राजसिंहासन स्वीकार नहीं किया. उन्होंने प्रभु श्रीराम की खड़ाऊं को सिंहासन पर स्थापित कर स्वयं नंदीग्राम में रहकर तपस्वी जीवन व्यतीत किया.

अयोध्या: मंदिर और मूर्तियों की नगरी अयोध्या प्राचीन रहस्य और स्थलों से जानी और पहचानी जाती है. धर्म नगरी अयोध्या में कई ऐसे प्राचीन स्थल आज भी स्थित है. जो त्रेता युग की भी गवाही देते हैं. ऐसे में भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में स्थित भरत कुंड आस्था त्याग और तपस्या का अद्भुत प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पवित्र स्थल को प्राचीन समय में नंदीग्राम कहा जाता था. मान्यता है कि यहां नंदेश्वर महादेव मंदिर विराजमान हैं. जिसके कारण इस क्षेत्र को नंदीग्राम के नाम से पहचान मिली.

नंदीग्राम में रहकर तपस्या करते थे भरत

पवन दास शास्त्री बताते हैं कि जब भगवान श्रीराम वनवास गए थे तब उनके छोटे भाई भरत ने अयोध्या का राजसिंहासन स्वीकार नहीं किया. उन्होंने प्रभु श्रीराम की खड़ाऊं को सिंहासन पर स्थापित कर स्वयं नंदीग्राम में रहकर तपस्वी जीवन व्यतीत किया. कहा जाता है कि भरत जी ने पूरे 14 वर्षों तक राजमहल का सुख त्यागकर साधु-संतों की तरह जीवन जिया और यहीं से अयोध्या राज्य का संचालन किया.

कुश पर बैठ कर भरत करते थे शासन

धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि भरत जी कुश के आसन पर बैठकर राज्य की व्यवस्था संभालते थे. उनका जीवन त्याग, धर्म और भाई प्रेम की सबसे बड़ी मिसाल माना जाता है. यही कारण है कि नंदीग्राम का महत्व केवल एक धार्मिक स्थल के रूप में नहीं बल्कि आदर्श शासन और समर्पण के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है.मान्यता यह भी है कि वनवास से लौटने के बाद भगवान श्रीराम ने इसी पवित्र भूमि पर अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान किया था.इस कारण भरत कुंड को पितरों की शांति और मोक्ष से जुड़ा अत्यंत पुण्य स्थल माना जाता है. यहां स्थित पवित्र कुंड में श्रद्धालु स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं.

आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भरत कुंड पहुंचकर दर्शन-पूजन करते हैं. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.अयोध्या की धार्मिक यात्रा में भरत कुंड का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि यह स्थान त्याग, सेवा, धर्म और भाईचारे की अमर गाथा को जीवंत करता है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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