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21 घंटे पहले

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NTA ने 3 मई को हुए NEET UG 2026 का एग्जाम को रद्द कर दिया। NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह के मुताबिक, 7-10 दिन में रि-एग्जाम के लिए शेड्यूल जारी किया जाएगा।

किसी भी कैंडिडेट को इसके लिए वापस से रजिस्टर या एग्जाम फीस नहीं देना होगा। दोबारा से सभी के लिए एडमिट कार्ड जारी होगा। कैंडिडेट्स को पिछले सेंटर ही एलॉट होंगे।

NTA के इस फैसले पर कई टीचर्स और पॉलिटिशियंस के रिएक्‍शंस सामने आए हैं।

खान सर बोले- NTA मतलब ‘नेवर ट्रस्टेबल एजेंसी’

मशहूर एजुकेटर और यूट्यूबर खान सर ने कहा, ‘2024 में भी ऐसी घटना हुई, CBI जांच हुआ पर कोई नतीजा नहीं निकला। उनका मनोबल बढ़ गया और ये फिर हुआ। सबसे हास्यास्पद है कि पेपर लीक की जानकारी खुद बच्चों ने सरकार को दी, जबकि सरकारी एजेंसियों को पहले पता चलना चाहिए था।’

उन्होंने कहा, ‘समझ नहीं आता NTA को ये जिम्मेदारी पेपर कराने की दी गई है या पेपर लीक कराने के लिए। NTA का नाम होना चाहिए ‘नेवर ट्रस्टेबल एजेंसी’।’

‘CBI इज लाइक अ नोकिया मोबाइल

खान सर ने आगे कहा कि अगर CBI को जांच की जिम्मेदारी दी है, तो बच्चों का MBBS कंप्लीट होने तक इनकी जांच ही चलती रहेगी। CBI इज लाइक अ नोकिया मोबाइल। 1946 में अंग्रेजों ने मुद्दों को दबाने के लिए CBI बनाया था। सरकार भी वही कर रही।

प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट को भी इसमें इन्वॉल्व होना चाहिए और गुनाहगारों को कड़ी से कड़ी सजा दिलानी चाहिए। इससे राष्ट्रीय छवि खराब होती है। बच्चों का मनोबल भी टूटता है।

NTA वाले करोड़पति हैं, लेकिन बच्चे कर्ज लेकर एग्जाम देने पहुंचते हैं। ऐसे में फीस नहीं लेंगे कह देना आसान है।

अलख पांडे बोले- ‘कोचिंग वाला शामिल हो तो फांसी पर चढ़ाएं’

NEET 2026 के कैंसिलेशन पर एजुकेटर और ‘फिजिक्स वाला’ के को-फाउंडर अलख पांडे बोले, ‘इससे अच्छा तो स्कूल का एग्जाम होता है। मैंने नहीं सुना स्कूल का कोई एग्जाम इतनी आसानी से लीक होते।’

‘एग्जाम से 2-3 दिन पहले NTA ने स्टेटमेंट जारी कर कहा था कि ये कोई स्कूल का एग्जाम नहीं है। ये नेशनल लेवल का एग्जाम है। आप चैन से सो जाओ। हम इसे संभाल लेंगे। फूल-प्रूफ सिस्टम है।’

‘ऐसा बार-बार होने से बच्चों का पूरे सिस्टम से भरोसा उठता है। अगर पहले से पेपर लीक का अंदेशा हो गया था तो पेपर क्यों नहीं बदला गया?’

‘ढीले कपड़े पहनो, पजामा पहनो, जूता-घड़ी नहीं पहनो। जैकेट नहीं पहनो, जेब नहीं होनी चाहिए, प्लास्टिक की बोतल होनी चाहिए। सारी चेकिंग, सारी पोलिसिंग बच्चों पर कर रहे थे, और इनके सिस्टम के अंदर बैठकर जो पेपर लीक कर रहा था, वो इनको पता नहीं चल रहा था।’

‘ये नेशनल लेवल पर बहुत बड़ा लीक है और इसमें सिस्टम के लोग इसमें शामिल हैं। जिन अमीरों ने पेपर खरीदा, उन अमीरों को सजा मिले। ये कौन अमीर लोग थे जो अपने बच्चों के लिए पेपर खरीदकर लाए थे, गरीब बच्चों के साथ अन्याय कर रहे थे। कोई कोचिंग वाला शामिल है तो उसे फांसी पर चढ़ाएं।’

सचिन पायलट बोले- ‘जांच के नाम पर मामले को टालना चाहते हैं’

कांग्रेस लीडर और राजस्थान के फॉर्मर डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने कहा, ‘केंद्र सरकार ने CBI के नाम पर एक बार फिर खुद को बचाने की कोशिश की है। जांच के नाम पर मामले को टालना चाहते हैं। दो साल पहले भी जांच बिठाई थी, उसकी रिपोर्ट कहां है? किसको सजा हुई? जांच के नाम पर पल्ला झाड़ दें, ये नाकाफी है।’

उन्होंने कहा कि लगभग 9-10 दिन बाद परीक्षा को रद्द किया। सोशल मीडिया पर पूरा खुलासा होने के बाद मजबूरन सरकार को परीक्षा को रद्द करना पड़ा है। उन्होंने सवाल किया, ‘कब तक जांच बिठाकर बात को दरी के नीचे डालते रहेंगे?’

‘CBI को जांच सौंपी है। CBI को फुरसत कहां है? CBI को तो विपक्षी नेताओं की जांच करनी है, उनके यहां छापे डालने हैं, उनका मुंह बंद करना है।’

सचिन पायलट ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग ने इसको अपने हाल पर छोड़ रखा है वरना इतने व्यापक स्तर पर पेपर लीक नहीं हो सकता। उन्होंने आगे कहा, ‘NTA बनाई गई थी ताकि पेपर लीक को बंद कर सकें। एक एयर टाइट मेकेनिज्म हो ताकि व्यवस्था को नियंत्रित कर सकें। अब वो एजेंसी कोलैप्स कर गई है, इसके लिए जिम्मेदार कौन है?’

इसमें एक ज्युडिशियल प्रोब हो जो सरकार के दायरे के बाहर हो। साथ ही टाइम बाउंड हो।

राहुल गांधी बोले- ‘पीएम का अमृतकाल, देश के लिए विषकाल बना’ कांग्रेस लीडर राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री का तथाकथित अमृतकाल, देश के लिए विषकाल बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हर बार पेपर माफिया बच निकलते हैं और ईमानदार छात्रों को इसकी सजा भुगतनी पड़ती है।

उन्होंने कहा, ‘अब लाखों छात्र फिर से वही मानसिक तनाव, आर्थिक बोझ और अनिश्चितता झेलेंगे। अगर अपनी तकदीर मेहनत से नहीं, पैसे और पहुंच से तय होगी, तो फिर शिक्षा का मतलब क्या रह जाएगा?’

‘जेन-Z , ऐसे ही चलेगा या कुछ करना है?’- केजरीवाल

AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘2017, 2021, 2024 में पेपर लीक हुए थे। उस समय CBI को जांच सौंप दी गई। क्या CBI ने कुछ किया? इस बार भी CBI को जांच सौंपी गई है। क्या CBI कुछ करेगी?’

उन्होंने कहा, ‘2024 में तो हद हो गई। पेपर लीक के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया। 90 दिन के अंदर चार्जशीट फाइल होनी थी, पर नहीं किया। तथाकथित मास्टरमाइंड को बेल मिल गई।’

आगे बताया, ‘आपको लगता है CBI ने इतनी इनएफिशिएंट है? तो CBI इनएफिशिएंट नहीं है, उसमें बहुत अच्छे लोग हैं। CBI उन्हीं लोगों को रिपोर्ट करती है जो पेपर लीक करवा रहे हैं। CBI इसमें किसी को सजा दिलवा ही नहीं सकती।’

‘देश के जेन-Z से पूछना है, ऐसे ही चलेगा या कुछ करना है? अगर नेपाल-बांग्लादेश का जेन-Z सड़कों पर उतरकर अपने देश की सरकारों को बदल सकता है, तो हमारे देश का जेन-Z, पेपर लीक करने वालों को जेल नहीं भेज सकता? भेज सकता है। मुझे अपने देश के जेन-Z पर पूरा भरोसा है। ये देश आपका है। इस देश के नेताओं को इस देश में कोई इंट्रस्ट नहीं है। नेताओं के बच्चे विदेशों में पढ़ते हैं।’

नितिन विजय बोले- ‘पेन एंड पेपर मोड में चीटिंग के चांसेज ज्यादा’

एजुकेटर और मोशन एजुकेशन के फाउंडर नितिन विजय ने कहा कि NEET को कंप्यूटर बेस्ड कर देना चाहिए क्योंकि उसमें चीटिंग के चांसेज काफी कम हो जाते हैं। वहीं पेन एंड पेपर मोड में चीटिंग के चांसेज बहुत ज्यादा होते हैं।

उन्होंने कहा, ‘इस पूरी एग्जाम प्रक्रिया में कई लोग शामिल होते हैं। ये कहीं से भी लीक हो सकता है। इसमें कौन सबसे शुद्ध है, तय नहीं कर सकते। ये बिलकुल ऐसा है कि एक सोने से भरे जाते ट्रक को कोई लूटने की कोशिश नहीं करेगा। वो भी तब जब पूरी दुनिया को पता है कि ट्रक सोने से भरा है।’

आनंद कुमार बोले- ‘कोचिंग सेंटर्स क्वेश्चन पेपर लीक करवा रहे’

‘सुपर 30’ एजुकेशनल प्रोग्राम के फाउंडर आनंद कुमार बोले, ‘कई कोचिंग संचालक इसमें लिप्त हैं। उन्हें सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। कोचिंग सेंटर्स क्वेश्चन पेपर लीक करवा रहे ताकि गाढ़ी कमाई कर सकें।’

उन्होंने कोचिंग माफिया से कहना चाहते हैं कि शिक्षा को व्यवासाय ना बनाएं। साथ ही सरकार से आग्रह किया कि इस पर सिर्फ एक बार कार्रवाई करने से बात नहीं बनेगी। इस पर लगातार कड़ी नजर रखें और ऐसे कानून बनाएं कि ये दोबारा न हो।

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