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Who Is Shubham Khairnar:  NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में अब महाराष्ट्र कनेक्शन सामने आने के बाद जांच एजेंसियां और सतर्क हो गई हैं . इस पूरे मामले में नासिक के 30 वर्षीय शुभम खैरनार का नाम सामने आया है, जिसे सीबीआई ने गिरफ्तार किया है . जांच एजेंसियों के मुताबिक शुभम ने कभी मेडिकल कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं की, लेकिन वह लाखों रुपये में नीट का पेपर बेचने वाले नेटवर्क का अहम हिस्सा बन गया .

सीबीआई का दावा है कि शुभम खैरनार ने 10 लाख रुपये में नीट-UG 2026 का प्रश्नपत्र खरीदा और फिर उसे 15 लाख रुपये में बेच दिया . इस सौदे में उसने करीब 5 लाख रुपये का मुनाफा कमाया . जांच में सामने आया है कि यही पेपर बाद में छह राज्यों तक फैल गया .

गिरफ्तारी से बचने के लिए बदला हुलिया

जांच एजेंसियों के मुताबिक, शुभम खैरनार गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहा था . उसने अपने बाल छोटे करा लिए थे ताकि पहचान छिपाई जा सके . लेकिन पुलिस ने पुराने फोटो के आधार पर उसकी पहचान कर ली और उसे मंदिर जाते समय पकड़ लिया. राजस्थान पुलिस और नासिक क्राइम ब्रांच की मदद से सीबीआई ने उसे हिरासत में लिया. बाद में मुंबई की किला कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे ट्रांजिट कस्टडी में दिल्ली ले जाने की अनुमति मिली.

कॉलेज में दाखिला लिया, लेकिन कभी क्लास नहीं की

जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि शुभम ने 2021 में मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित श्री सत्य साई यूनिवर्सिटी में बीएएमएस यानी बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी कोर्स में एडमिशन लिया था . लेकिन यूनिवर्सिटी रिकॉर्ड के मुताबिक वह कभी क्लास में नहीं गया, किसी परीक्षा में शामिल नहीं हुआ और न ही किसी शैक्षणिक गतिविधि में हिस्सा लिया. यूनिवर्सिटी ने भी खुद को उससे पूरी तरह अलग बताते हुए कहा है कि उसका संस्थान से कोई सक्रिय संबंध नहीं था.

नासिक और भोपाल में चलाता था एजुकेशन कंसल्टेंसी

कॉलेज से दूरी के बावजूद शुभम ने नासिक और भोपाल में एसआर कंसल्टेंसी नाम की एजुकेशन कंसल्टेंसी शुरू कर रखी थी. जांच एजेंसियों को शक है कि इसी नेटवर्क के जरिए वह छात्रों और एजेंटों के संपर्क में आया और बाद में पेपर लीक रैकेट का हिस्सा बन गया. सीबीआई के अनुसार शुभम को प्रश्नपत्र फिजिकल फॉर्मेट में एक सहयोगी के जरिए कुरियर से मिला था. इसके बाद उसने उसे पीडीएफ में बदला और व्हाट्सऐप के जरिए गुरुग्राम के एक खरीदार को भेज दिया.

ऐसे छह राज्यों तक पहुंचा पेपर

जांच में पता चला है कि गुरुग्राम के खरीदार ने आगे इस पेपर को राजस्थान के सीकर और जयपुर समेत जम्मू-कश्मीर, बिहार और केरल तक पहुंचाया. पेपर को सीधे लीक पेपर बताने के बजाय गेस पेपर के नाम पर टेलीग्राम और व्हाट्सऐप ग्रुप्स में फैलाया गया ताकि किसी को शक न हो. अधिकारियों के मुताबिक छात्रों से एक कॉपी के लिए 25 हजार रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक वसूले गए. इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह पूरा नेटवर्क करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार में बदल चुका था.

ऐसे खुली पूरे रैकेट की परतें

इस मामले का खुलासा राजस्थान के सीकर से शुरू हुआ. वहां कुछ शिक्षकों ने देखा कि परीक्षा में पूछे गए सवाल पहले से वायरल एक गेस पेपर से काफी मिलते-जुलते हैं. उन्होंने इसकी शिकायत ईमेल के जरिए NTA को भेजी . इसके बाद NTA ने मामला इंटेलिजेंस ब्यूरो को सौंपा और फिर राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी SOG ने जांच शुरू की. जांच का दायरा बढ़ता गया और आखिरकार कनेक्शन हरियाणा होते हुए महाराष्ट्र के नासिक तक पहुंच गया.

भाई भी जांच के घेरे में

CBI ने शुभम के भाई भावेश खैरनार को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है. एजेंसी ने उसके घर पर तलाशी भी ली. हालांकि अभी तक उसके खिलाफ कोई औपचारिक आरोप नहीं लगाया गया है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या भावेश इस नेटवर्क में सक्रिय रूप से शामिल था या नहीं.

परिवार ने आरोपों से किया इनकार

शुभम के पिता डॉ. मधुकर खैरनार ने बेटे पर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है. उन्होंने दावा किया कि शुभम पिछले छह महीनों से नासिक में BAMS की प्रैक्टिस कर रहा था और वह परिवार को हर महीने पैसा भेजता था. उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि उनका बेटा निर्दोष साबित होगा. हालांकि उन्होंने जांच में सहयोग करने की बात भी कही.

अभी और बड़े खुलासे संभव

CBI का मानना है कि नासिक इस पूरे नेटवर्क का सिर्फ एक हिस्सा है. कई आरोपी अभी भी पहचान से बाहर हैं और जांच एजेंसियां देशभर में फैले इस संगठित रैकेट की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी हैं. अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले दिनों में इस मामले में कई और गिरफ्तारियां और बड़े खुलासे हो सकते हैं.

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