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Purnia News: दोनों बेटियों ने लोकल18 लोकल टीम से बातचीत में बताया कि उनके पिता नहीं है. बचपन से उनकी परवरिश सिर्फ मां ने ही की है. वे बताती है कि उनकी मां हमेशा भारतीय सभ्यता और संस्कृति का सम्मान करने और पढ़ाई पर ध्यान देने की सीख देती है. सुहानी प्रवीण कहती है कि उनकी मां का सपना है कि दोनों बेटियां बड़ी होकर अच्छे मुकाम पर पहुंचें. यही वजह है कि दोनों बहनें अपनी मां के सपने को सच करने के लिए दिन-रात मेहनत कर पढ़ाई कर रही है.

पूर्णियाः कहा जाता है कि अगर शिक्षा हो तो इंसान कभी भूखा नहीं मरता. अच्छे काम कर अच्छा पैसा कमाता है और सम्मानजनक जीवन जीता है. दरअसल शिक्षा की अहमियत सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं है, बल्कि अच्छे विचार अच्छे संस्कार और बेहतर व्यवहार ही शिक्षा की असली पहचान है. यही वजह है कि शिक्षित होना बेहद जरूरी है.

पूर्णिया के हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, रणभूमि मैदान के पास रहने वाली एक महिला इस बात की जीती-जागती मिसाल है. वसी खातून नाम की यह महिला दो बेटियों की मां है. एक बेटी का नाम सुहानी प्रवीण है जो कक्षा 7 में पढ़ती है, जबकि दूसरी बेटी सोनम खातून कक्षा 8 में पढ़ती है.

दोनों बेटियों ने लोकल18 लोकल टीम से बातचीत में बताया कि उनके पिता नहीं है. बचपन से उनकी परवरिश सिर्फ मां ने ही की है. वे बताती है कि उनकी मां हमेशा भारतीय सभ्यता और संस्कृति का सम्मान करने और पढ़ाई पर ध्यान देने की सीख देती है. सुहानी प्रवीण कहती है कि उनकी मां का सपना है कि दोनों बेटियां बड़ी होकर अच्छे मुकाम पर पहुंचें. यही वजह है कि दोनों बहनें अपनी मां के सपने को सच करने के लिए दिन-रात मेहनत कर पढ़ाई कर रही है.

हाल ही में सुहानी प्रवीण ने अपनी कला और संस्कृति की प्रतिभा के दम पर भारतीय कला संस्कृति विभाग की ओर से लोक संगीत के क्षेत्र में छात्रवृत्ति हासिल की है. इस छात्रवृत्ति से अब उसे आगे बढ़ने और अपने लक्ष्य तक पहुंचने में मदद मिलेगी.

दोनों बहनों का कहना है कि भले ही उनके पिता नहीं है. लेकिन मां ने ही उन्हें मां और पिता दोनों का प्यार दिया है. उनकी मां वसी खातून दूसरे के घरों में चौका-बर्तन और पोछा-पोंछी कर किसी तरह घर चलाती है. ताकि अपनी बेटियों को अच्छी परवरिश और बेहतर शिक्षा दे सकें. वे लगातार बेटियों की पढ़ाई को लेकर सजग रहती है.

वसी खातून कहती है कि बिना पति के सहारे भी उन्होंने ठान लिया है कि दोनों बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाकर उन्हें शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना है. इसके लिए वे दिन-रात मेहनत कर दूसरे के घरों में काम करती है. वे बताती हैं कि आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने कभी बेटियों की पढ़ाई नहीं रुकने दी. उनका कहना है कि उन्हें अच्छी तरह पता है कि शिक्षा का असली महत्व क्या है.

वसी खातून स्वीकारती है कि उन्होंने खुद अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की इसलिए आज उन्हें दूसरों के घरों में काम करना पड़ रहा है. वे कहती है कि अगर वे पढ़-लिख लेती तो शायद आज किसी अच्छे पद पर होती और बेहतर जीवन जी रही होती. यही सोचकर वे चाहती है कि उनकी दोनों बेटियां बड़े अधिकारी बनें. इसी सपने को पूरा करने के लिए वे चौका-बर्तन कर हर मुश्किल सहते हुए भी दिन-रात काम कर रही है.

उधर दोनों बेटियां भी मां की यह जद्दोजहद देखकर पीछे हटने को तैयार नहीं है. वे लगातार मेहनत कर पढ़ाई और लोक संगीत के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रही है. दोनों बहनों में से एक का सपना IAS बनने का है, जबकि दूसरी बहुत बड़ी आर्टिस्ट बनना चाहती है. दोनों का लक्ष्य साफ है. किसी भी कीमत पर मां का सपना पूरा करना.

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