-कथित अभद्र बयान पर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज, सामाजिक सम्मान की रक्षा की उठी मांग
-टीवी बहसों के बहिष्कार की अपील, समाज से एकजुट होकर विरोध दर्ज कराने का आह्वान
-लोकतांत्रिक संवाद में मर्यादित भाषा अपनाने की दी सलाह, राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी पर जोर
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। ब्राह्मण समाज को लेकर की गई कथित टिप्पणी को लेकर गाजियाबाद में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। समाजसेवी एवं सोशल चौकीदार के संस्थापक केके शर्मा ने राजकुमार भाटी द्वारा दिए गए कथित बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे समाज विशेष की भावनाओं को आहत करने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में इस प्रकार की भाषा का प्रयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। केके शर्मा ने अपने बयान में आरोप लगाया कि राजकुमार भाटी द्वारा ब्राह्मण समाज के प्रति अभद्र शब्दों का प्रयोग किया गया, जो न केवल आपत्तिजनक है बल्कि सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाला भी है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी भी समाज या वर्ग के सम्मान पर टिप्पणी करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी से जुड़े नेता होने के बावजूद इस प्रकार की भाषा का प्रयोग राजनीतिक शालीनता पर सवाल खड़ा करता है। शर्मा के अनुसार राजनीति में विचारों की लड़ाई होनी चाहिए, न कि समाजों और जातियों को लक्ष्य बनाकर बयान दिए जाएं। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान समाज में अनावश्यक तनाव उत्पन्न करते हैं और सामाजिक समरसता को नुकसान पहुंचाते हैं।
समाजसेवी केके शर्मा ने समाज के लोगों से अपील करते हुए कहा कि जिन टेलीविजन चैनलों की बहसों में राजकुमार भाटी को आमंत्रित किया जाता है, उन कार्यक्रमों का शांतिपूर्ण बहिष्कार किया जाए। उनका मानना है कि यदि दर्शक ऐसे कार्यक्रमों को देखना बंद कर देंगे तो समाचार चैनल भी विवादित बयान देने वाले व्यक्तियों को मंच देना बंद कर देंगे। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के माध्यम से ही सकारात्मक संदेश दिया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी से जुड़े ब्राह्मण समाज के लोगों को इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि समाज में भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। शर्मा ने कहा कि सामाजिक सम्मान किसी एक व्यक्ति या संगठन का नहीं बल्कि पूरे समाज का विषय होता है और ऐसे मामलों में स्पष्ट रुख आवश्यक है। केके शर्मा ने सामाजिक स्तर पर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने का अधिकार सभी को है, लेकिन वह मर्यादा और संवैधानिक सीमाओं के भीतर होना चाहिए। उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों से एकजुट होकर सम्मानजनक संवाद की परंपरा को मजबूत करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि राजनीति में सक्रिय सभी दलों और नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे अपनी भाषा और व्यवहार में संयम बनाए रखें। सार्वजनिक मंचों पर दिए जाने वाले वक्तव्य समाज पर गहरा प्रभाव डालते हैं, इसलिए नेताओं को शब्दों के चयन में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। गाजियाबाद में सामने आया यह मामला अब सामाजिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय स्तर पर लोग सार्वजनिक जीवन में शालीन भाषा और पारस्परिक सम्मान बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज हो सकती हैं, वहीं समाज के विभिन्न संगठनों द्वारा भी अपनी राय व्यक्त किए जाने की संभावना है। समाजसेवी केके शर्मा ने अंत में कहा कि लोकतंत्र की मजबूती आपसी सम्मान, संवाद और संवेदनशीलता से ही संभव है तथा किसी भी समाज के सम्मान से समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||


