- देश का पहला नगर निगम बना गाजियाबाद, सीवेज गैस से ऊर्जा उत्पादन की ऐतिहासिक शुरुआत
- पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन का संगम बनेगी बायो-सीएनजी परियोजना: सुनीता दयाल
- अपशिष्ट जल से राजस्व और ऊर्जा दोनों, आत्मनिर्भर नगर निगम की मजबूत शुरुआत: विक्रमादित्य सिंह मलिक
- पर्यावरण संरक्षण के साथ नगर निगम को मिलेगा स्थायी राजस्व और रोजगार के अवसर
- हरित ऊर्जा मॉडल की ओर बड़ा कदम, आधुनिक शहरी प्रबंधन में गाजियाबाद की नई पहचान
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। स्वच्छता, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में गाजियाबाद नगर निगम ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए डूंडाहेड़ा स्थित 70 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज शोधन संयंत्र (एसटीपी) पर बायो-सीएनजी प्लांट स्थापित करने की औपचारिक शुरुआत कर दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के साथ गाजियाबाद देश का पहला नगर निगम बन गया है जिसने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाली गैस का वैज्ञानिक उपयोग कर बायो-सीएनजी उत्पादन की दिशा में ठोस कदम उठाया है। यह परियोजना केवल एक तकनीकी प्रयोग नहीं बल्कि शहरी प्रशासन की सोच में आए परिवर्तन का प्रतीक मानी जा रही है, जहां कचरे और अपशिष्ट को समस्या नहीं बल्कि संसाधन के रूप में देखा जा रहा है। नगर निगम मुख्यालय में बुधवार को आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान महापौर सुनीता दयाल तथा नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक की उपस्थिति में परियोजना से संबंधित अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए। जलकल विभाग के महाप्रबंधक कामाख्या प्रसाद आनंद और निजी कंपनी वीए टेक वाबैग लिमिटेड के सीईओ शैलेश कुमार ने समझौते को अंतिम रूप दिया। यह परियोजना सार्वजनिक-निजी सहभागिता यानी ट्रिपल पी (पीपीपी) मॉडल पर विकसित की जाएगी। इसके अंतर्गत निजी कंपनी संयंत्र का निर्माण, संचालन और तकनीकी प्रबंधन करेगी, जबकि नगर निगम को बिना निवेश के राजस्व प्राप्त होगा। अधिकारियों के अनुसार यह मॉडल शहरी निकायों के लिए आर्थिक रूप से टिकाऊ और भविष्य उन्मुख माना जा रहा है।
महापौर सुनीता दयाल ने कहा कि गाजियाबाद नगर निगम शहर को स्वच्छ, हरित और ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि डूंडाहेड़ा बायो-सीएनजी परियोजना ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की सोच को साकार करने वाली पहल है। सीवेज से बनने वाली बायो-सीएनजी का उपयोग नगर निगम के वाहनों में किया जाएगा, जिससे ईंधन खर्च कम होने के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण में भी बड़ी मदद मिलेगी। महापौर ने कहा कि यह परियोजना गाजियाबाद को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगी और आने वाले समय में शहर को ग्रीन सिटी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बताया कि इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि नगर निगम को इसमें प्रत्यक्ष वित्तीय निवेश नहीं करना पड़ेगा।
निजी कंपनी संयंत्र स्थापित कर संचालन करेगी और उत्पादित गैस से होने वाली आय का निर्धारित हिस्सा नगर निगम को मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह मॉडल भविष्य में नगर निगम की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा। साथ ही यह अन्य शहरों के लिए भी एक उदाहरण बनेगा कि किस प्रकार सीमित संसाधनों में भी आधुनिक तकनीक अपनाकर राजस्व के नए स्रोत विकसित किए जा सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान अपर नगर आयुक्त जंग बहादुर यादव, अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार, मुख्य अभियंता निर्माण नरेंद्र कुमार चौधरी, उद्यान प्रभारी डॉ. अनुज कुमार सिंह सहित नगर निगम के कई वरिष्ठ अधिकारी और परियोजना से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
सीवेज से ऊर्जा: कैसे काम करेगा बायो-सीएनजी प्लांट
डूंडाहेड़ा एसटीपी में प्रतिदिन लगभग 70 मिलियन लीटर गंदे पानी का शोधन किया जाता है। सामान्यत: इस प्रक्रिया के दौरान मीथेन, हाइड्रोजन सल्फाइड और अन्य गैसें उत्पन्न होती हैं, जो वातावरण में मिलकर प्रदूषण बढ़ाती हैं। नई परियोजना के तहत इन गैसों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से एकत्र किया जाएगा। वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए गैसों को शुद्ध कर बायो-सीएनजी में परिवर्तित किया जाएगा। अनुमान है कि संयंत्र से प्रतिदिन करीब 1700 किलोग्राम बायो-सीएनजी गैस का उत्पादन होगा। यह गैस नगर निगम के वाहनों, कचरा उठाने वाली गाडिय़ों और अन्य उपयोगों में इस्तेमाल की जाएगी। यह मॉडल शहरी अपशिष्ट प्रबंधन को ऊर्जा उत्पादन से जोडऩे का उत्कृष्ट उदाहरण है।
ईंधन लागत में कमी और प्रदूषण नियंत्रण की दोहरी उपलब्धि
महापौर सुनीता दयाल ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि नगर निगम प्रधानमंत्री की ‘वेस्ट टू वेल्थ’ अवधारणा को जमीन पर उतारने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि तैयार होने वाली बायो-सीएनजी नगर निगम के वाहनों में उपयोग की जाएगी, जिससे डीजल और सीएनजी पर होने वाला खर्च कम होगा। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से नगर निगम की ईंधन लागत घटेगी, कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार होगा, पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।
ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में आएगी कमी
अब तक सीवेज शोधन संयंत्रों से निकलने वाली गैसें सीधे वातावरण में मिलकर वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस प्रभाव को बढ़ाती थीं। बायो-सीएनजी परियोजना के लागू होने के बाद इन गैसों को नियंत्रित कर उपयोगी ऊर्जा में बदला जाएगा। मीथेन गैस का नियंत्रित उपयोग जलवायु परिवर्तन नियंत्रण में सहायक होगा, कार्बन फुटप्रिंट कम होगा, शहर की पर्यावरणीय रैंकिंग बेहतर होगी, सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। यह परियोजना स्मार्ट और सतत शहरों की अवधारणा को मजबूत करने वाली पहल मानी जा रही है। बायो-सीएनजी प्लांट सर्कुलर अर्थव्यवस्था मॉडल का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें अपशिष्ट को पुन: उपयोग कर आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ प्राप्त किए जाते हैं। गंदे पानी से ऊर्जा उत्पादन, ऊर्जा से परिवहन संचालन और उससे बचत—यह पूरी प्रक्रिया संसाधनों के पुनर्चक्रण को दर्शाती है। आने वाले समय में नगर निगम यदि ठोस अपशिष्ट, जैविक कचरा और सीवेज प्रबंधन को एकीकृत कर देता है तो गाजियाबाद ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर शहर बन सकता है।
अन्य एसटीपी पर भी लागू होगा मॉडल
नगर निगम अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि डूंडाहेड़ा परियोजना सफल होने के बाद शहर के अन्य सीवेज शोधन संयंत्रों पर भी इसी तकनीक को लागू किया जाएगा। इसके लिए प्रारंभिक तकनीकी अध्ययन शुरू कर दिया गया है। नगर निगम पहले से ही कई पर्यावरणीय अभियानों पर कार्य कर रहा है। बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान, वर्षा जल संचयन योजनाएं धूल प्रदूषण नियंत्रण हेतु नियमित पानी छिड़काव, स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन सुधार कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन पहलों के साथ बायो-सीएनजी परियोजना शहर के पर्यावरणीय ढांचे को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। गंदे पानी से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन की यह पहल भविष्य के हरित, ऊर्जा सक्षम और स्मार्ट शहरों की दिशा में मजबूत कदम मानी जा रही है। गाजियाबाद नगर निगम की यह पहल साबित करती है कि आधुनिक तकनीक, दूरदर्शी प्रशासन और पर्यावरणीय प्रतिबद्धता मिलकर किसी भी शहर की पहचान बदल सकते हैं। आने वाले वर्षों में डूंडाहेड़ा बायो-सीएनजी प्लांट न केवल प्रदूषण कम करेगा बल्कि शहर को आर्थिक और ऊर्जा के स्तर पर भी नई मजबूती प्रदान करेगा।
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