Greater Noida West Gaur Chowk Underpass : ग्रेटर नोएडा वेस्ट की गौर चौक अंडरपास परियोजना पूरी होने के बाद छह लेन का अंडरपास नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, ग्रेटर नोएडा वेस्ट, गौर सिटी और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के बीच सीधा और तेज कनेक्शन उपलब्ध कराएगा. इससे गौर चौक पर लगने वाले भारी ट्रैफिक दबाव में बड़ी कमी आने की उम्मीद है. लेकिन फिलहाल लोगों को अगले कुछ महीने तक धैर्य रखना होगा और मानसून में जाम की चुनौती झेलनी पड़ेगी.
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के गौर चौक अंडरपास का अपडेट जानिए..
रिपोर्ट के मुताबिक, परियोजना का करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. हालांकि अंडरपास के कुल 26 सेक्शन में से अभी तक केवल 20 सेक्शन का निर्माण पूरा हुआ है. बाकी छह सेक्शन पर काम जारी है. निर्माण एजेंसियों के अनुसार, जिन हिस्सों पर काम बाकी है, वहां खुदाई, रिटेनिंग वॉल का निर्माण, क्योरिंग, वाटरप्रूफिंग और स्लोप लेवलिंग जैसे कार्य किए जा रहे हैं.
गौर चौक का यह अंडरपास ताज हाईवे के दोनों कॉरिडोरों पर बन रहा है. निर्माण कार्य के कारण यहां लगातार बैरिकेडिंग और डायवर्जन लागू हैं. अभी ताज हाईवे के दोनों ओर ट्रैफिक प्रतिबंध लागू हैं, जबकि सर्विस लेन पर भारी दबाव है. यही वजह है कि सुबह और शाम पीक ऑवर में यहां लंबा जाम लग रहा है.
नोएडा अथॉरिटी के सीईओ लोकेश एम ने बताया कि परियोजना का नक्शा और डिजाइन ट्रैफिक डी-कंजेशन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था. उनका कहना है कि अंडरपास शुरू होने के बाद ग्रेटर नोएडा वेस्ट से नोएडा और दिल्ली आने-जाने वाले लाखों लोगों को राहत मिलेगी. फिलहाल निर्माण कार्य और मानसून की परिस्थितियों को देखते हुए परियोजना को पूरा होने में करीब तीन महीने और लग सकते हैं.
इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 89.2 करोड़ रुपये बताई जा रही है. निर्माण कार्य जुलाई 2024 में शुरू हुआ था, लेकिन बाद में डिजाइन और ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत लगे प्रतिबंधों की वजह से काम की गति प्रभावित हुई. इसके अलावा बरसात के मौसम में भी निर्माण कार्य धीमा पड़ने की आशंका है.
गौर चौक, तिगरी रोटरी और शाहबेरी इलाका इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं. यहां बड़ी संख्या में हाईराइज सोसाइटियां हैं और रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं. गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्ट और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाला ट्रैफिक इसी मार्ग से होकर गुजरता है. ऐसे में थोड़ी सी बाधा भी कई किलोमीटर लंबे जाम में बदल जाती है.
स्थानीय निवासियों का कहना है कि शाम के समय हालात सबसे खराब हो जाते हैं. दफ्तरों से लौटने वाले लोगों को कई बार घंटों तक जाम में फंसे रहना पड़ता है. लगातार डायवर्जन बदलने और सर्विस लेन पर ट्रैफिक शिफ्ट होने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है.
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Sandeep Kumar | Senior Assistant Editor, News18 Hindi…
I currently serve as a Senior Assistant Editor at News18 Hindi, leading State & Local18 operations across Uttar Pradesh, Uttarakhand, Delhi, Himachal …और पढ़ें
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