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-डीएम को सौंपी उच्च स्तरीय रिपोर्ट, शॉर्ट सर्किट और साजिश दोनों से इंकार
-डी-टावर के 22 फ्लैट आग की चपेट में आए, फायर सेफ्टी सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। इंदिरापुरम स्थित गौर ग्रीन एवेन्यू सोसायटी में 29 अप्रैल को लगी भीषण आग की जांच के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने में असफल रही है। समिति ने मंगलवार को अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ को सौंप दी, जिसमें आग लगने की मुख्य वजह स्पष्ट नहीं हो सकी। जिलाधिकारी द्वारा घटना के तुरंत बाद गठित इस समिति में विभिन्न विभागों के चार वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया था। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के सचिव विवेक कुमार मिश्रा को समिति का अध्यक्ष बनाया गया था, जबकि अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व सौरभ भट्ट, मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल और विद्युत सुरक्षा विभाग के सहायक निदेशक सौरभ कुमार सिंह सदस्य रहे। समिति ने तकनीकी जांच, मौके का निरीक्षण और स्थानीय निवासियों से बातचीत के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की। जांच रिपोर्ट के अनुसार घटना के समय न तो शॉर्ट सर्किट होने के कोई साक्ष्य मिले और न ही सीसीटीवी फुटेज में किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर आग लगाने का प्रमाण सामने आया। ऐसे में आग लगने के वास्तविक कारणों का अंतिम निर्धारण नहीं हो पाया। समिति ने आगे की विस्तृत जांच स्थानीय पुलिस और विशेषज्ञ तकनीकी एजेंसियों से कराने की संस्तुति की है, ताकि घटना के पीछे की सच्चाई सामने लाई जा सके।

समिति की जांच में सामने आया कि सोसायटी के डी-टावर की नौवीं मंजिल से आग की शुरुआत हुई, जिसने तेजी से ऊपरी मंजिलों को अपनी चपेट में ले लिया। आग की इस घटना में कुल 22 फ्लैट प्रभावित हुए। हालांकि राहत की बात यह रही कि बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए जाने के बावजूद किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। अग्निशमन विभाग ने 17 फायर टेंडर, दो हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म और लगभग 70 अग्निशमन कर्मियों की मदद से आग पर काबू पाया। जांच के दौरान कई निवासियों ने समिति को बताया कि हादसे के समय फायर अलार्म सिस्टम प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रहा था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि भवन में स्थापित फायर सेफ्टी सिस्टम का रखरखाव संतोषजनक नहीं पाया गया। अग्निशमन सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े प्रशिक्षित स्टाफ और संबंधित एजेंसियों का विवरण भी उपलब्ध नहीं कराया जा सका, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। समिति ने पाया कि भवन के खुले क्षेत्र और फायर ड्राइव-वे में स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण एवं अवरोध विकसित कर दिए गए थे। टावर-डी के सामने ग्रीन एरिया, स्विमिंग पूल और क्लब हाउस क्षेत्र में बनाई गई बाउंड्री वॉल और अस्थायी संरचनाओं ने अग्निशमन वाहनों की आवाजाही को प्रभावित किया। इन अवरोधों के कारण राहत एवं बचाव कार्य में देरी हुई और फायर फाइटिंग ऑपरेशन को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।

जांच रिपोर्ट में भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए गए हैं। इसमें सभी आवासीय एवं व्यावसायिक परिसरों में स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण और अतिक्रमण तत्काल हटाने, फायर ड्राइव-वे और ओपन एरिया को पूरी तरह अवरोधमुक्त रखने, फायर सेफ्टी सिस्टम का नियमित निरीक्षण एवं रखरखाव सुनिश्चित करने तथा प्रशिक्षित फायर सेफ्टी स्टाफ की अनिवार्य नियुक्ति जैसे निर्देश शामिल हैं। साथ ही अग्निशमन उपकरणों, फायर अलार्म और हाइड्रेंट सिस्टम को हमेशा क्रियाशील रखने तथा समय-समय पर मॉकड्रिल आयोजित करने पर जोर दिया गया है। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ ने बताया कि जांच समिति द्वारा दिए गए सुझावों के आधार पर आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे। प्रशासन अब जनसुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जनपद की सभी ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में फायर सेफ्टी मानकों की समीक्षा करने की तैयारी कर रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में नुकसान को न्यूनतम किया जा सके। गौर ग्रीन एवेन्यू अग्निकांड ने एक बार फिर बहुमंजिला आवासीय परिसरों में सुरक्षा व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी है। आग लगने का कारण भले स्पष्ट न हो सका हो, लेकिन जांच रिपोर्ट ने सुरक्षा मानकों और रखरखाव की गंभीर कमियों को सामने लाकर प्रशासन और सोसायटी प्रबंधन दोनों के लिए चेतावनी जरूर दे दी है।

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