उत्तर प्रदेश में चाइनजी मांझे की खरीद-बिक्री को लेकर हाईकोर्ट ने एक बार फिर सवाल किया है. हाईकोर्ट ने सरकार से सवाल किया कि कैसे इसे रोकेंगे आप तो सरकार ने जवाब देते हुए कहा कि चाइनीज मांझे पर बैन लगा दिया है. इसपर हाईकोर्ट ने कहा कि केवल बैन लगाना ही पर्याप्त नहीं है.
चाइनीज मांझे को लेकर हाईकोर्ट ने पूछा सवाल.
चाइनीज मांझे को लेकर कोर्ट में सरकार ने क्या कहा
वहीं हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर गृह और पर्यावरण विभाग के सचिव से ऊपर स्तर के अफसर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित रहने का आदेश दिया. मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी. यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए पारित किया. सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार के वकील राजकुमार सिंह ने अदालत को सूचित किया कि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण द्वारा सीसे और नायलॉन से लेपित मांझे के उपयोग पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया गया है.
‘केवल बैन लगाना ही पर्याप्त नहीं है’
पीठ ने टिप्पणी की कि केवल प्रतिबंध लगाना पर्याप्त नहीं है और यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अनुपालन सुनिश्चित करे और उन स्थानों की जांच करे, जहां इस तरह का मांझा बनाया और बेचा जा रहा है.
इस बीच, लखनऊ की पतंग एसोसिएशन ने हस्तक्षेप याचिका दायर कर आरोप लगाया कि पुलिस और अन्य अधिकारी चीनी मांझे के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर उसके सदस्यों को परेशान कर रहे हैं. अदालत ने कहा कि एसोसिएशन के सदस्यों को प्रतिबंधित मांझे पर रोक लगाने के प्रयासों में सहयोग करना चाहिए और सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि किसी को भी परेशान न किया जाए.
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