राजनीतिक विशलेष्कों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से सांसद हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के जीत का अंतर कम था. इसके अलावा सपा के पीडीए की काट और गाजीपुर की घटना को ध्यान में रखते हुए हंसराज विश्वकर्मा को मंत्री बनाया गया है.
योगी सरकार का दूसरी बार हुआ कैबिनेट का विस्तार
कैसे बढ़ता गया योगी कैबिनेट में बनारस का दबदबा
बता दें कि योगी सरकार के पहले कार्यकाल में लखनऊ से बृजेश पाठक, आशुतोष टंडन और दिनेश शर्मा मंत्रिमंडल में शामिल थे. लेकिन इस दूसरे कार्यकाल में वाराणसी का दबदबा है. दूसरे कैबिनेट विस्तार के बाद वाराणसी से चार मंत्री हैं. इनमें दयाशंकर मिश्र (ब्राह्मण), अनिल राजभर (ओबीसी), रविन्द्र जायसवाल (ओबीसी) और नए मंत्री हंसराज विश्वकर्मा (ओबीसी) शामिल हैं. हालांकि पहले सरकार में भी बनारस का दबदबा था. तब वाराणसी से तीन मंत्री थे, जिनमें अनिल राजभर, रविन्द्र जायसवाल के साथ नीलकंठ तिवारी शामिल थे. लेकिन दूसरे कार्यकाल में जब नीलकंठ तिवारी को मंत्रीपद से हटाया गया तो उनकी जगह दयाशंकर मिश्र को जगह दी गई.
सपा के पीडीए की काट के लिए ओबीसी समाज से मंत्री
राजनीतिक विशलेष्कों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से सांसद हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के जीत का अंतर कम था. इसके अलावा सपा के पीडीए की काट और गाजीपुर की घटना को ध्यान में रखते हुए हंसराज विश्वकर्मा को मंत्री बनाया गया है. बता दें कि गाजीपुर, वाराणसी, मऊ, आजमगढ़, बलिया, चंदौली, मिर्जापुर, सोनभद्र, जौनपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज में अखिलेश यादव के पीडीए फॉर्मूले का काट ढूंढना था.
यूपी में दूसरी बार बढ़ा बनारस का वर्चस्व
इसके अलावा राजनीतिक विशलेषक यह भी कहते हैं कि 2014 में बनारस से पीएम मोदी के सांसद बनने के बाद से यूपी सरकार में बनारस का दबदबा बढ़ना शुरू हो गया था. पंडित कमलापति त्रिपाठी के बाद यह दूसरी बार है, जब बनारस का वर्चस्व बढ़ा है. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे के बाद बीजेपी अलर्ट मोड में है. वह पूर्वांचल के वोटर्स को लेकर सचेत है. क्योंकि बीजेपी के काशी क्षेत्र के 13 में से 10 सीटें हार जाने पर बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व असहज हो गया था. फिर जब हार की समीक्षा की गई तो पता चला कि ओबीसी वोटर्स सपा में शिफ्ट हो गए. यही वजह है कि हंसराज विश्वकर्मा को कैबिनेट में जगह दी गई है.
पूर्वांचल की कास्ट पॉलिटिक्स का चक्रव्यूह
हाल ही में गाजीपुर के करंडा थाना क्षेत्र में विश्वकर्मा समाज की युवती की मौत के बाद बवाल मच गया था. विश्वकर्मा समाज में नाराजगी भी देखी जा रही थी. इसी गुस्से की खाई को पाटने के लिए बीजेपी की यह कोशिश हो सकती है. वहीं अगर पूर्वांचल की जातीय राजनीति की बात करें तो इसे भेदना बीजेपी के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है. बीजेपी भले ही पश्चिमी यूपी में हिंदू-मुस्लिम की राजनीति कर सीटें जीत लेती है. लेकिन पूर्वांचल हमेशा बीजेपी के लिए चैलेंजिग रहा है. पूर्वांचल के अधिकांश सीटों पर ओबीसी मतदाताओं की संख्या ज्यादा है.
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Prashant Rai am currently working as Chief Sub Editor at News18 Hindi Digital, where he lead the creation of hyper-local news stories focusing on politics, crime, and viral developments that directly impact loc…और पढ़ें
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