गाजियाबाद। चुनावी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती के दावे करने वाले महानगर संगठन का हालिया फैसला अब खुद उसी के लिए भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। महानगर स्तर पर की गई नई नियुक्तियों ने पार्टी के अंदर असंतोष, नाराजगी और अविश्वास का माहौल पैदा कर दिया है। संगठन द्वारा महानगर के तीनों महामंत्रियों को एक ही विधानसभा क्षेत्र-शहर विधानसभा-के मंडलों का प्रभारी बनाए जाने के फैसले को कार्यकर्ता खुलकर ‘असंतुलित’, ‘एकतरफा’ और ‘दूरदर्शिता से रहित’ बता रहे हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यह निर्णय संगठनात्मक मजबूती के बजाय आंतरिक समीकरण साधने की कोशिश ज्यादा नजर आ रहा है। आमतौर पर महानगर महामंत्री का पद पूरे जिले या महानगर के संगठनात्मक ढांचे को संतुलित रखने के लिए बनाया जाता है, ताकि हर विधानसभा और हर मंडल तक नेतृत्व की पहुंच बनी रहे। लेकिन इस बार संगठन ने ठीक उलटा कदम उठाते हुए तीनों महामंत्रियों को एक ही विधानसभा में सीमित कर दिया, जिससे बाकी क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं में उपेक्षा की भावना गहराने लगी है। सूत्रों के अनुसार शहर विधानसभा पहले से ही पार्टी का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। ऐसे में संगठन के सबसे प्रभावशाली पदाधिकारियों को उसी क्षेत्र में तैनात करना राजनीतिक रणनीति से ज्यादा ‘सुरक्षित राजनीति’ का संकेत माना जा रहा है।
सवाल यह उठ रहा है कि जब अन्य विधानसभाओं में संगठनात्मक कमजोरी और चुनावी चुनौतियां मौजूद हैं, तो अनुभवी नेतृत्व को वहां भेजने के बजाय मजबूत क्षेत्र में ही क्यों केंद्रित किया गया। पार्टी के कई पुराने कार्यकर्ताओं का कहना है कि महानगर संगठन का यह फैसला जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटा हुआ प्रतीत होता है। उनका आरोप है कि जिन इलाकों में पार्टी पिछले चुनावों में कमजोर रही, वहां नेतृत्व की कमी आज भी बनी हुई है। वार्ड स्तर पर सक्रियता घट रही है, बूथ कमेटियां निष्क्रिय पड़ी हैं और स्थानीय कार्यकर्ता मार्गदर्शन के अभाव में खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। इसके बावजूद संगठन ने संतुलित विस्तार के बजाय एक ही विधानसभा में ‘नेतृत्व की भीड़’ खड़ी कर दी। महानगर कि यह नियुक्ति संगठन के भीतर चल रही गुटबाजी की ओर भी इशारा करती है। कई कार्यकर्ता इसे आंतरिक शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा बता रहे हैं, जहां कुछ नेताओं को एक ही क्षेत्र में प्रभाव बनाए रखने के लिए एकत्र किया गया है। इससे यह संदेश जा रहा है कि संगठन में निर्णय योग्यता के आधार पर नहीं बल्कि समीकरणों और नजदीकियों के आधार पर लिए जा रहे हैं।
महानगर कार्यालय से लेकर स्थानीय स्तर तक इस फैसले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब शीर्ष पदाधिकारी एक ही क्षेत्र में सीमित रहेंगे तो बाकी विधानसभाओं में संगठनात्मक समन्वय कमजोर होना तय है। कई कार्यकर्ताओं ने यह भी आशंका जताई कि इससे चुनावी तैयारी पर सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि कमजोर क्षेत्रों में नेतृत्व की कमी भविष्य में बड़ा नुकसान साबित हो सकती है। जमीनी स्तर पर नाराजगी का आलम यह है कि कई मंडलों के कार्यकर्ता खुद को संगठन से अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। उनका आरोप है कि महानगर संगठन केवल ‘हाई-प्रोफाइल’ क्षेत्रों तक सीमित होता जा रहा है, जबकि मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं और संघर्षशील क्षेत्रों को नजरअंदाज किया जा रहा है। कुछ कार्यकर्ताओं ने तो यहां तक कह दिया कि संगठन अब कार्यकर्ताओं की बजाय पदाधिकारियों के संतुलन बचाने में अधिक व्यस्त दिख रहा है। किसी भी राजनीतिक दल की ताकत उसका व्यापक संगठनात्मक ढांचा होता है, न कि एक क्षेत्र विशेष में नेतृत्व का केंद्रीकरण।
यदि अनुभव और ऊर्जा का समान वितरण न हो तो संगठन धीरे-धीरे कमजोर पडऩे लगता है। वर्तमान फैसले ने इसी खतरे को उजागर कर दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या महानगर नेतृत्व बढ़ते विरोध और असंतोष को देखते हुए अपने फैसले पर पुनर्विचार करेगा या फिर संगठनात्मक संतुलन की अनदेखी जारी रहेगी। फिलहाल गाजियाबाद की राजनीतिक गलियारों में यह मामला सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है और कार्यकर्ताओं की नजरें संगठन की अगली रणनीति पर टिकी हुई हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यदि समय रहते असंतोष को नहीं संभाला गया तो यह विवाद आने वाले चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। महानगर संगठन का यह फैसला अब केवल नियुक्ति का मामला नहीं रहा, बल्कि नेतृत्व की कार्यशैली और संगठन की दिशा पर बड़ा सवाल बन चुका है।
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||


