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Indian seafarers Gulf crisis: गल्प और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच 20 हजार से ज्यादा भारतीय नाविकों की जिंदगी खतरे में पड़ गई है. नेशनल यूनियन ऑफ सीफेयरर्स ऑफ इंडिया (NUSI) ने चेतावनी दी है कि कई जहाज ऐसे इलाकों में फंसे हैं जहां भोजन, दवा और सुरक्षित निकासी तक मुश्किल हो गई है. नाविक लगातार मिसाइल, ड्रोन और सुरक्षा अलर्ट के बीच काम कर रहे हैं. उनके परिवार भारत में बैठकर हर पल डर और बेचैनी में खबरों पर नजर रख रहे हैं. NUSI ने केंद्र सरकार से इस संकट को राष्ट्रीय प्राथमिकता मानते हुए तुरंत निकासी अभियान शुरू करने की मांग की है.

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'बस हमें बचाओ', खाड़ी में 20 हजार भारतीयों पर संकट, न खाना-न दवाZoom

गल्प और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के बीच 20 हजार से ज्यादा भारतीय नाविक फंसे हैं. (फोटो Reuters)

नई दिल्ली: खाड़ी में बढ़ते तनाव ने हजारों भारतीय परिवारों की नींद उड़ा दी है. समुद्र के बीच फंसे ये लोग सैनिक नहीं हैं, लेकिन हालात किसी युद्ध क्षेत्र से कम भी नहीं हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और खाड़ी के आसपास काम कर रहे 20 हजार से ज्यादा भारतीय नाविक इस वक्त ऐसे माहौल में जिंदगी गुजार रहे हैं जहां हर कुछ घंटे में मिसाइल हमले, ड्रोन खतरे और सुरक्षा चेतावनियां मिल रही हैं. जहाज तकनीकी रूप से खुले समुद्री रास्तों पर हैं, लेकिन डर ऐसा है जैसे हर दिशा में बारूद बिछा हो. कई नाविकों के पास पर्याप्त खाना और दवाएं तक नहीं पहुंच पा रही हैं. परिवारों को यह भी नहीं पता कि उनके अपने सुरक्षित वापस लौट पाएंगे या नहीं. भारत के अलग-अलग राज्यों में बैठे परिजन लगातार फोन, मैसेज और न्यूज अलर्ट पर नजर रख रहे हैं. कई नाविक विदेशी झंडे वाले जहाजों पर काम करते हैं, जहां जिम्मेदारी अलग-अलग एजेंसियों में बंटी रहती है. यही वजह है कि संकट और गहरा हो गया है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारत सरकार समय रहते इन नागरिकों को सुरक्षित निकाल पाएगी?

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार नेशनल यूनियन ऑफ सीफेयरर्स ऑफ इंडिया यानी NUSI ने इस पूरे मामले को ‘मानवीय आपदा’ बताते हुए केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. यूनियन का कहना है कि समुद्र में फंसे नाविकों पर लगातार मानसिक दबाव बढ़ रहा है. जहाजों पर काम कर रहे लोग कई-कई घंटों तक हाई अलर्ट पर रहते हैं. नींद पूरी नहीं हो रही. हर गुजरते जहाज और हर अलार्म के साथ खतरे का डर बढ़ जाता है. स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है. भारतीय नाविक लंबे समय से दुनिया की समुद्री सप्लाई चेन की रीढ़ माने जाते हैं. लेकिन संकट की इस घड़ी में वही लोग सबसे ज्यादा असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. NUSI ने सरकार से तत्काल निकासी प्रोटोकॉल लागू करने और इस मामले को राष्ट्रीय प्राथमिकता देने की अपील की है.

मिसाइल, ड्रोन और डर के बीच फंसे भारतीय नाविक

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में गिना जाता है. यहां से हर दिन बड़ी मात्रा में तेल और व्यापारिक सामान गुजरता है. लेकिन मौजूदा तनाव ने इस पूरे इलाके को हाई रिस्क जोन बना दिया है. भारतीय नाविकों को लगातार सुरक्षा चेतावनियां मिल रही हैं. कई जहाजों को अपने रूट बदलने पड़े हैं. कुछ जहाज बंदरगाहों पर रुके हुए हैं, जबकि कई खुले समुद्र में फंसे हैं.
  • NUSI के महासचिव मिलिंद कांडलगांवकर ने बताया कि नाविकों और उनके परिवारों के बीच घबराहट लगातार बढ़ रही है. उनके मुताबिक यह केवल सैन्य खतरा नहीं है. साइबर अटैक, इंश्योरेंस संकट, प्रतिबंध और ऑपरेशनल रोक जैसे कई खतरे एक साथ सामने हैं. भारत सरकार ने ‘ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा’ के तहत नौसैनिक निगरानी बढ़ाई है, लेकिन नाविकों के परिवार अब सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे हैं.
  • भारतीय नाविकों की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि वे सैनिक नहीं, बल्कि नागरिक कर्मचारी हैं. वे वैश्विक व्यापार को चालू रखने के लिए खतरनाक हालात में काम करते हैं. लेकिन सुरक्षा के नाम पर उनके पास सीमित विकल्प ही होते हैं. यही वजह है कि यह संकट अब केवल समुद्री सुरक्षा नहीं, बल्कि मानवीय चिंता का बड़ा मुद्दा बन चुका है.

क्या सरकार जल्द निकासी अभियान शुरू करेगी?

भारत सरकार पर अब तेजी से दबाव बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर क्षेत्रीय संघर्ष और बढ़ा, तो हजारों भारतीय नाविक सीधे युद्ध जैसे हालात में फंस सकते हैं. ऐसे में समय रहते निकासी योजना तैयार करना बेहद जरूरी माना जा रहा है.

खाड़ी में भारतीय नाविकों की स्थिति इतनी गंभीर क्यों हो गई है?

खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरे समुद्री इलाके को बेहद खतरनाक बना दिया है. मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा लगातार बना हुआ है. कई जहाज सुरक्षा कारणों से बंदरगाहों पर रुके हुए हैं, जबकि कुछ समुद्र में फंसे हैं. नाविकों को सीमित संसाधनों में लगातार हाई अलर्ट पर काम करना पड़ रहा है. मानसिक तनाव भी तेजी से बढ़ रहा है.

भारतीय नाविकों के परिवार सबसे ज्यादा किस बात से डरे हुए हैं?

परिवारों को सबसे ज्यादा डर इस बात का है कि उनके अपने सुरक्षित घर लौट पाएंगे या नहीं. लगातार मिल रही युद्ध जैसी खबरों और सुरक्षा अलर्ट ने चिंता बढ़ा दी है. कई परिवार जहाजों की लोकेशन ट्रैक कर रहे हैं और हर घंटे अपडेट का इंतजार कर रहे हैं. उन्हें यह भी चिंता है कि अगर हालात और बिगड़े तो संपर्क टूट सकता है.

NUSI ने सरकार से क्या मांग की है?

NUSI ने केंद्र सरकार से इस संकट को राष्ट्रीय प्राथमिकता मानने की अपील की है. यूनियन चाहती है कि तुरंत निकासी प्रोटोकॉल सक्रिय किए जाएं. साथ ही समुद्र में फंसे नाविकों के लिए भोजन, दवा, मानसिक सहायता और सुरक्षित वापसी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. यूनियन ने ‘NUSI Sahara’ नाम से इमरजेंसी सपोर्ट सिस्टम भी शुरू किया है.

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Sumit KumarSenior Sub Editor

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें

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