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बॉलीवुड का वो सुपरस्टार जो एक समय पर अमिताभ बच्चन को टक्कर देता था, लेकिन करियर के पीक वो अपना सबकुछ छोड़कर चला गया. जब वो वापस लौटा तो न उसे पहले जैसा स्टारडम मिला और न ही परिवार. एक्टर का पत्नी से तलाक हो गया और बच्चे भी अलग-थलग हो गए थे.

नई दिल्ली. विनोद खन्ना एक समय पर बॉलीवुड के सुपरस्टार कहे जाते थे. उन्होंने फिल्मों में खूब दौलत और शोहरत हासिल की. साल 1982 में सुपरस्टार ने अपने करियर के पीक पर सबकुछ त्याग दिया और वो अध्यात्म की खोज में निकल गया था. सबकुछ पीछे छोड़कर विनोद खन्ना ओशो के कम्यून, रजनीशपुरम, ओरेगन के लिए निकल पड़े थे, जबकि उनका परिवार मुंबई में ही था.

विनोद खन्ना पर आरोप लगते थे कि वो अपना परिवार, अपने बच्चों को यूं ही छोड़कर चले गए थे. लेकिन इस बारे में सुपरस्टार ने सिमी ग्रेवाल के शो पर बात की थी. उन्होंने कहा था कि ओशो के शरण में चले जाने से उनकी पारिवारिक जिंदगी पर कोई खास असर नहीं पड़ा था. एक्टर ने कहा था कि वो लगातार अपने परिवार के संपर्क में थे और सबकुछ मुहैया कराते थे.

सुपरस्टार ने कहा था, ‘मैं अपने परिवार के संपर्क में था. ऐसा नहीं था कि मैं भाग गया. मैं सब कुछ उपलब्ध करा रहा था’. जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अब भी अपने इस फैसले को स्वार्थी मानते हैं, तो उन्होंने कहा, ‘हां! जब तक आप स्वार्थी नहीं होंगे, आप ऐसा कुछ कर ही नहीं सकते. क्योंकि यह आपके अपने अस्तित्व की बात है, जिसे उस पार जाना है’.

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एक्टर ने करियर के पीक पर स्टारडम, फिल्में, दौलत, शोहरत सबकुछ छोड़कर ओरेगन आश्रम जाने का फैसला किया था. इस फैसले के पीछे की वजह के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा था कि वो उनका अपना फैसला था. वो काफी बेचैन थे और बेचैनी में उन्होंने वो फैसला लिया था. उन्होंने कहा था, ‘मैं बहुत बेचैन था. मेरे विचार इधर-उधर भटक रहे थे. मैं बहुत गुस्से में था. मैं एक सीमा तक पहुंच गया था. लोग आपके बटन दबा सकते हैं और आपको प्रतिक्रिया देने पर मजबूर कर सकते हैं. सब कुछ आपके नियंत्रण में नहीं होता. लेकिन मैं देखता था कि जब मैं ध्यान करता हूं, तो ये चीजें मुझ पर असर नहीं करतीं’.

आध्यात्म और ध्यान की राह पर चलने के बारे में विनोद खन्ना ने कहा था कि आपको अपना दिमाग कंट्रोल करना पड़ता है. उन्होंने कहा था, ‘यही वो बातें थीं, जिन्होंने मुझे यह कहने पर मजबूर किया कि अब बहुत हो गया, मैंने काफी पैसा कमा लिया. अब अगर मुझे ध्यान में गहराई तक जाना है, तो मुझे पूरा समय देना होगा. मुझे आश्रम में रहना होगा, मुझे अपने गुरु के चरणों में रहना होगा. तो, जाहिर है, मेरे भीतर इसकी जरूरत थी’.

ओशो के ओरेगन स्थित आश्रम जाने के बाद विनोद खन्ना ने खुद को स्टारडम की चकाचौंध से पूरी तरह दूर कर लिया. वो एक साधारण व्यक्ति की तरह काम काज करते थे. आश्रम में विनोद खन्ना ने गार्डन में माली बनने से लेकर टॉयलेट साफ करने तक का काम किया था. ये साल उनके लिए बदलावों से भरा था.

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उन्होंने खुद को ग्लैमर वर्ल्ड से पूरी तरह दूर कर लिया था और आश्रम में उन्हें पहचानना तक मुश्किल हो गया था. लेकिन एक समय ऐसा आया जब विनोद खन्ना का आश्रम में भी मन नहीं लग रहा था. ऐसे में ओशो ने उन्हें भारत वापस लौटने और फिल्मों में नए सिरे से शुरुआत करने की सलाह दी.

विनोद खन्ना ने महेश भट्ट के निर्देशन में बनी फिल्म ‘जुर्म’ से फिल्मों में शानदार वापसी की. जब कई लोगों को लगा था कि खन्ना की स्टारडम खत्म हो चुकी है, तब महेश भट्ट ने उन पर भरोसा जताया. उन्हें मीनाक्षी शेषाद्रि और संगीता बिजलानी के साथ थ्रिलर फिल्म में कास्ट किया. ‘जुर्म’ ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की. इससे विनोद खन्ना ने सालों बाद फिर से अपने करियर की नई शुरुआत की.

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