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कपूर खानदान की बहू अपने जीवन के सबसे भावुक और कठिन दौर का जिक्र किया. अपने पति के निधन के बाद वह मानसिक रूप से इस कदर टूट गई कि थेरेपी का सहारा लेना पड़ा. एक्ट्रेस ने बताया कि उस अकेलेपन और दुख से बाहर निकलना उनके लिए नामुमकिन सा लग रहा था. हालांकि, थेरेपिस्ट से मिलने के बावजूद उन्हें वहां वह सुकून नहीं मिला जिसकी उन्हें तलाश थी. आखिरकार उन्होंने अपनों के साथ से खुद को संभाला.

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साल 2020 में कैसर से हुआ था कपूर खानदान के एक्टर का निधन.

नई दिल्ली. नीतू कपूर ने हाल ही में ऋषि कपूर के निधन के बाद के अपने संघर्षों को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि पति के जाने के बाद का समय उनके लिए भावनात्मक रूप से बेहद कठिन था. इस दुख से उबरने के लिए कई लोगों ने उन्हें थेरेपिस्ट की सलाह दी थी. नीतू कपूर ने बताया कि मुश्किल वक्त में उन्हें महसूस हुआ कि यह तरीका उनके लिए नहीं बना है. ऋषि कपूर के साथ बिताए दशकों के बाद आखिरकार उन्होंने अपने आंतरिक साहस से ही इससे उबरने को भरने का फैसला किया.

वैसे थेरेपी के मामले में नीतू कपूर की सोच थोड़ी अलग है. उन्होंने बताया कि वह व्यक्तिगत रूप से थेरेपी पर ज्यादा भरोसा नहीं करती हैं. उनका मानना है कि इंसान को ऐसे दोस्तों और परिवार की जरूरत होती है, जिनसे वह खुलकर बात कर सके और अपना दर्द बांट सके.

नीतू कपूर के लिए मुश्किल था वक्त

नीतू कपूर ने सोहा अली खान के पॉडकास्ट ऑल अबाउट हर में अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर के बारे में बात की. बातचीत के दौरान उन्होंने पति ऋषि कपूर के निधन के बाद के समय को याद किया. उन्होंने कहा, ‘वो दौर मेरे लिए बेहद कठिन था और उस समय कई लोगों ने मुझे थेरेपिस्ट से मिलने की सलाह दी थी. मैंने लोगों की बात मानकर एक थेरेपिस्ट से बातचीत भी की, लेकिन मुझे अंदर से ऐसा महसूस नहीं हुआ कि यह तरीका मेरे लिए सही है.’

नीतू कपूर को थेरेपी से ज्यादा दोस्तों का मिला सहारा

नीतू कपूर ने कहा, ‘मुझे लगता है कि अच्छे दोस्त किसी भी थेरेपी से ज्यादा जरूरी होते हैं. हर इंसान के पास ऐसे चार-पांच करीबी दोस्त होने चाहिए, जिनसे वह अपने मन की हर बात बिना डर के कह सके. जब इंसान अपने दर्द और परेशानियों को भरोसेमंद लोगों के साथ साझा करता है, तो उसका मन हल्का हो जाता है. कई बार अपने लोगों का साथ ही सबसे बड़ी दवा बन जाता है.’

ऋषि कपूर के निधन के बाद टूट गई थीं नीतू कपूर

उन्होंने आगे कहा, ‘ऋषि कपूर के जाने के बाद मैं अंदर से पूरी तरह टूट चुकी थी. उस समय मैं बहुत दुखी और अकेली महसूस करती थी. जब मैं थेरेपिस्ट के पास बैठती थी तो खुद से सवाल करती थी कि आखिर मैं वहां क्या कर रही हूं. जब तक इंसान खुद अंदर से मजबूत बनने का फैसला नहीं करता, तब तक कोई भी उसे पूरी तरह संभाल नहीं सकता. थेरेपी में मुझे मेडिटेट करने, गिनती करने और अलग-अलग तरीके अपनाने की सलाह दी गई, लेकिन मुझे यह सब अपने लिए सही नहीं लगा.’

खुद को व्यस्त रखने में नीतू कपूर को मिली मजबूती

नीतू कपूर ने कहा, ‘हर इंसान का दुख से बाहर आने का तरीका अलग होता है. कुछ लोगों को थेरेपी से मदद मिलती है और यह अच्छी बात है, लेकिन मेरे लिए दोस्तों, परिवार और काम ने सबसे बड़ा सहारा दिया. काम में खुद को व्यस्त रखने से मुझे मानसिक रूप से मजबूत बनने में मदद मिली. परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने से भी मुझे धीरे-धीरे दुख से बाहर निकलने की ताकत मिली.’ बताते चलें कि ऋषि कपूर का अप्रैल 2020 में कैंसर के चलते निधन हो गया था.

About the Author

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Kamta PrasadSenior Sub Editor

कामता प्रसाद (KP) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 11 सालों का लंबा अनुभव है. वर्तमान में वह न्यूज18 हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कामता को एंटरटेनमेंट …और पढ़ें

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