दिल्ली सरकार ने सड़कों से उठने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए रोड-रडार सिस्टम चालू कर दिया है। डीपीसीसी ने रोड पॉल्यूशन कंट्रोल प्रोग्राम के तहत पूरे शहर की सड़कों पर रियल-टाइम निगरानी शुरू की है। अब गली, सड़कों पर प्रदूषण की पहचान कर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
राजधानी में वायु प्रदूषण के लिए बड़े कारण माने जाने वाले सड़कों से उड़ रही धूल, कचरा और खुले में कूड़ा जलाने जैसी समस्याओं पर अब इससे सीधे और तेज तरीके से कार्रवाई होगी। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने शुक्रवार को रोड पॉल्यूशन कंट्रोल प्रोग्राम शुरू किया, जिसे ऑपरेशनल तौर पर रोड-रडार (रीयल-टाइम एयर पॉल्यूशन डिटेक्शन एक्रॉस रोड्स) नाम दिया है।
इसके तहत दिल्ली की करीब 18,000 किलोमीटर लंबे सड़क नेटवर्क की नियमित निगरानी की जाएगी। इसमें एमसीडी, एनडीएमसी, लोक निर्माण विभाग और दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड के सभी इलाके कवर होंगे। हर महीने पूरे शहर की सड़कों का सर्वे किया जाएगा, ताकि कहीं भी प्रदूषण के स्रोत छूट न जाएं।
हर जिले में 13 फील्ड सर्वेयर तैनात किए
प्रोग्राम के तहत ये सर्वेयर हर कार्यदिवस पर सड़कों का सर्वे करेंगे और निगरानी अधिकारियों की देखरेख में काम करेंगे। हर सर्वेयर को रोज कम से कम 20 किलोमीटर सड़क कवर करनी होगी और कम से कम 70 जियो-टैग्ड, फोटो आधारित शिकायतें दर्ज करनी होगी। पूरे शहर में रोजाना करीब 1000 जगहों की पहचान का लक्ष्य रखा है। इसके लिए एमसीडी-311 मोबाइल एप का इस्तेमाल भी होगा, जिसपर दर्ज की गई शिकायतें सीधे संबंधित विभागों तक पहुंचेंगी।
प्रोग्राम 11 तरह के प्रदूषण स्रोतों पर नजर रखेगा
कच्ची सड़कें, टूटे फुटपाथ, गड्ढों और डिवाइडर से उड़ने वाली धूल, सड़क किनारे पड़ी निर्माण सामग्री, अव्यवस्थित पार्किंग, कचरा ढेर और ओवरफ्लो, खुले में कचरा या बायोमास जलाना, प्लास्टिक जलाना, निर्माण और ध्वस्तीकरण का मलबा, हरियाली की कमी और निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल शामिल हैं। इस सिस्टम की खास बात इसकी ऑटोमेटेड शिकायत रूटिंग है। जैसे ही सर्वेयर एप पर कोई शिकायत दर्ज करेगा, वह बिना किसी देरी के सीधे संबंधित एजेंसी तक पहुंच जाएगी।
साफ हवा की लड़ाई अब जमीन पर : मनजिंदर सिंह
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि रोड रेडार के जरिये सरकार रोजाना निगरानी, रियल-टाइम रिपोर्टिंग और जवाबदेही का सिस्टम लागू कर रही है, ताकि किसी भी प्रदूषण स्रोत को नजरअंदाज न किया जाए। ये पहल स्वच्छ हवा मिशन का हिस्सा है, जिसमें वैज्ञानिक तरीके, मजबूत मॉनिटरिंग और तेज रिस्पॉन्स सिस्टम शामिल है। इस प्रोग्राम की वे खुद नियमित समीक्षा करेंगे, ताकि सभी विभाग अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाएं। हर चिन्हित प्रदूषण स्रोत पर कार्रवाई जरूरी होगी।
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