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होमताजा खबरधर्मवृंदावन जा रहे हैं, तो यहां जानिए कौन सी चीजें लानी हैं और किससे बनानी है दूरी

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वृंदावन-गोवर्धन यात्रा से लौटते समय श्रद्धालु तुलसी की माला, बांके बिहारी जी का प्रसाद और वृंदावन की पवित्र रज घर ला सकते हैं. महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के अनुसार गोवर्धन से पत्थर लाना उचित नहीं माना जाता. यात्रा का उद्देश्य केवल दर्शन नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मकता और सात्विकता अपनाना भी है.

फरीदाबाद: फरीदाबाद और बल्लभगढ़ से हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु वृंदावन और गोवर्धन परिक्रमा के लिए जाते हैं. खासकर गर्मियों के मौसम में लोग परिवार और दोस्तों के साथ ठाकुर जी के दर्शन करने पहुंचते हैं. मान्यता है कि वृंदावन की यात्रा केवल दर्शन तक सीमित नहीं होती बल्कि वहां से कुछ ऐसी पवित्र चीजें भी घर लानी चाहिए जिससे घर में सुख-शांति बनी रहे और सकारात्मकता का वास हो. वहीं कुछ चीजों को घर लाने से बचना भी जरूरी माना गया है.

वृंदावन से क्या लाएं

Local18 से बातचीत में बल्लभगढ़ के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं वृंदावन जाएं तो सबसे पहले श्री बांके बिहारी जी के दर्शन करें. पेड़े का प्रसाद लेकर ठाकुर जी को भोग लगाएं और उसी प्रसाद को ग्रहण करें. यदि व्यक्ति सात्विक जीवन जीता है, तो वृंदावन से तुलसी की माला जरूर लानी चाहिए जिस पर राधा नाम लिखा हो. उसे घर में रखें या शुद्ध अवस्था में गले में धारण करें और पूजा-पाठ करें.

वृंदावन की मिट्टी भी जरूर घर लाएं

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं वृंदावन की रज यानी वहां की मिट्टी भी जरूर घर लानी चाहिए. भगवान श्रीकृष्ण ने जिस भूमि पर नंगे पांव भ्रमण किया वह मिट्टी बेहद पवित्र और शुभ मानी जाती है. साफ-सुथरी जगह की थोड़ी सी मिट्टी घर लाकर प्रतिदिन माथे पर लगानी चाहिए. वृंदावन की रज में विशेष सद्गुण होते हैं जो सकारात्मकता का संचार करते हैं.

गोवर्धन क्षेत्र से पत्थर न लाएं

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं श्रद्धालु गिर्राज महाराज गोवर्धन की परिक्रमा करते हैं, उन्हें इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि वहां से पत्थर का कोई टुकड़ा घर नहीं लाना चाहिए. गिर्राज महाराज स्वयं ठाकुर जी का स्वरूप हैं इसलिए गोवर्धन क्षेत्र से पत्थर उठाकर घर लाना उचित नहीं माना जाता. श्रद्धालु वहां केवल श्रद्धा भाव से परिक्रमा करें और ठाकुर जी का प्रसाद लेकर आएं.

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं यदि कोई अधिक सात्विक व्यक्ति है, तो वह बाल कृष्ण स्वरूप लड्डू गोपाल की मूर्ति भी वृंदावन से ला सकता है. मूर्ति थोड़ी बड़ी, करीब पांच नंबर से ऊपर की होनी चाहिए. साथ ही नित्य समय निकालकर ठाकुर जी की सेवा करनी चाहिए स्नान कराकर चंदन लगाना चाहिए.

वृंदावन से केवल पवित्रता और अच्छे संस्कार लाएं

श्रद्धालुओं को वृंदावन से केवल पवित्रता और अच्छे संस्कार लेकर आने चाहिए वहां की बुराइयां नहीं. यात्रा के दौरान यह संकल्प लेना चाहिए कि किसी की बुराई निंदा और चुगली नहीं करेंगे. काम और क्रोध का त्याग करके लौटें. जब ठाकुर जी के दर्शन हो जाएं तो यही समझना चाहिए कि अब दुनिया की बुराइयों को नहीं देखना है. सभी के हृदय में बांके बिहारी विराजमान हैं और हर व्यक्ति में ठाकुर जी का स्वरूप देखना चाहिए.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

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