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-वित्तीय सलाहकार रविंद्र कुमार तिवारी बोले-महंगाई से तेज बढ़ना चाहिए आपकी पूंजी
-नियमित निवेश योजना, स्वर्ण, संपत्ति और दीर्घकालिक निवेश से मिल सकता है बेहतर लाभ
-धैर्य, अनुशासन और सही वित्तीय योजना ही बनाती है मजबूत भविष्य

उदय भूमि संवाददाता
नई दिल्ली। लगभग अठारह वर्षों से वित्तीय क्षेत्र में लोगों को निवेश संबंधी मार्गदर्शन दे रहे वित्तीय सलाहकार रविंद्र कुमार तिवारी ने आम नागरिकों को महत्वपूर्ण आर्थिक सलाह देते हुए कहा है कि केवल बचत खाते में अधिक धनराशि रखना अब समझदारी भरा निर्णय नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि बदलते आर्थिक परिवेश और बढ़ती महंगाई के दौर में धन को सही दिशा में निवेश करना ही आर्थिक सुरक्षा का सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में अधिकांश बड़े बैंकों में बचत खाते पर औसतन मात्र ढाई से तीन प्रतिशत तक वार्षिक ब्याज प्राप्त होता है, जबकि देश में खुदरा महंगाई दर लगभग चार से पांच प्रतिशत के बीच बनी हुई है। इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि किसी व्यक्ति की पूंजी लंबे समय तक बचत खाते में पड़ी रहती है तो उसकी वास्तविक क्रय शक्ति हर वर्ष कम होती जाती है। यानी धन बढऩे के बजाय धीरे-धीरे अपनी कीमत खोता रहता है। रविंद्र कुमार तिवारी के अनुसार सही वित्तीय योजना के साथ किया गया निवेश व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकता है।

उन्होंने कहा कि यदि पिछले वर्षों में लोगों ने व्यवस्थित तरीके से पारस्परिक निधि, स्वर्ण, अचल संपत्ति अथवा यूनिट लिंक बीमा योजना जैसे विकल्पों में निवेश किया होता तो उन्हें कहीं अधिक लाभ प्राप्त हो सकता था। उन्होंने जानकारी दी कि इक्विटी आधारित पारस्परिक निधियों ने बीते वर्षों में औसतन सोलह से अठारह प्रतिशत तक वार्षिक प्रतिफल दिया है। वहीं यूनिट लिंक बीमा योजनाओं में भी लंबी अवधि में लगभग सत्रह से अठारह प्रतिशत तक लाभ देखा गया है। स्वर्ण और संपत्ति जैसे पारंपरिक निवेश साधनों ने भी औसतन आठ से नौ प्रतिशत तक प्रतिफल प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि निवेश का उद्देश्य केवल धन जमा करना नहीं बल्कि उसे महंगाई से तेज गति से बढ़ाना होना चाहिए। वित्तीय विशेषज्ञों की राय है कि आवश्यक आपातकालीन निधि बचत खाते में रखने के बाद अतिरिक्त धन को योजनाबद्ध निवेश साधनों में लगाना अधिक लाभकारी साबित होता है। रविंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि आज के समय में पारस्परिक निधि में निवेश पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल और पारदर्शी हो चुका है।

नियमित निवेश योजना के माध्यम से छोटे निवेशक भी हर महीने छोटी राशि से निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम भी संतुलित रहता है और लंबी अवधि में बेहतर लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाती है। कर व्यवस्था के संबंध में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि यदि कोई निवेशक इक्विटी पारस्परिक निधि में निवेश करने के बाद एक वर्ष से पहले धन निकालता है तो अल्पकालिक पूंजीगत लाभ कर लागू होता है, जो वर्तमान नियमों के अनुसार लगभग पंद्रह प्रतिशत माना जाता है। वहीं एक वर्ष से अधिक अवधि तक निवेश बनाए रखने पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर लागू होता है, जिसमें निर्धारित सीमा तक कर छूट का भी प्रावधान उपलब्ध है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि बचत खाते में केवल उतनी ही राशि रखें जितनी दैनिक आवश्यकताओं और आपात स्थिति के लिए जरूरी हो। शेष धनराशि को सही वित्तीय योजना के साथ निवेश करना चाहिए, क्योंकि यदि धन बढ़ नहीं रहा है तो महंगाई धीरे-धीरे उसकी वास्तविक कीमत को कम करती रहती है।

वित्तीय सलाहकार का मानना है कि शेयर बाजार में सफल निवेश का सबसे महत्वपूर्ण आधार धैर्य और विश्वास है। जो निवेशक अनुशासन के साथ लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखते हैं, उन्हें भविष्य में बेहतर आर्थिक परिणाम प्राप्त होने की संभावना अधिक रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में भारतीय पूंजी बाजार नए उच्च स्तर स्थापित कर सकता है, इसलिए जागरूक निवेश और दीर्घकालिक वित्तीय योजना ही आर्थिक मजबूती का सबसे बड़ा आधार बनने वाली है। उन्होंने अंत में कहा कि निवेश शुरू करने से पहले अनुभवी वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना आवश्यक है, ताकि व्यक्ति अपनी आय, लक्ष्य और जोखिम क्षमता के अनुसार सही निवेश योजना चुन सके और सुरक्षित आर्थिक भविष्य की नींव रख सके।

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