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होमखेलक्रिकेटगावस्कर-कपिल-अजहर…तीनों कप्तान का शिकार, अकेले सीरीज जीता गया सिरफिरा बॉलर

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सिर पर बैंड और बल्लेबाजों की शामत रुमेश रत्नायके का सिग्नेचर स्टाइल उनके सिर पर बंधा वह सफेद बैंड था, जो उनके घुंघराले बालों को थामे रखता था लेकिन असली जादू उनकी कलाइयों में था. वह गेंद को हवा में दोनों तरफ स्विंग कराने के उस्ताद थे. जब पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग का दौर शुरू होता, तो रत्नायके की सटीकता और भी घातक हो जाती, जिससे बड़े-बड़े बल्लेबाजों के पास कोई जवाब नहीं होता था.

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श्रीलंका की पहली टेस्ट सीरीज जीत के हीरो थे रुमेश रत्नायके ने भारत के खिलाफ 3 टेस्ट में लिए ते 20 विकेट

नई दिल्ली.  80 और 90 के दशक में जब श्रीलंकाई क्रिकेट अपनी पहचान बना रहा था, तब एक तेज़ गेंदबाज़ ऐसा था जिसके सिर पर बंधा सफेद बैंड और हाथ से निकलती आग उगलती गेंदें भारतीय बल्लेबाजों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं थीं वह नाम था रुमेश रत्नायके. तिरछे रन और घंघराले बाल के साथ जब ये गेंदबाज गेंद के साथ भागता था तो बल्लेबाजों के लिए किसी बुरे सपने की तरह होता था.

स्विंग और गति के इस जादुई संगम ने न केवल श्रीलंका को अपनी पहली ऐतिहासिक टेस्ट जीत दिलाई, बल्कि भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक ऐसा घाव दिया जिसे आज भी याद किया जाता है. सिर पर बैंड और बल्लेबाजों की शामत रुमेश रत्नायके का सिग्नेचर स्टाइल उनके सिर पर बंधा वह सफेद बैंड था, जो उनके घुंघराले बालों को थामे रखता था लेकिन असली जादू उनकी कलाइयों में था. वह गेंद को हवा में दोनों तरफ स्विंग कराने के उस्ताद थे. जब पुरानी गेंद से रिवर्स स्विंग का दौर शुरू होता, तो रत्नायके की सटीकता और भी घातक हो जाती, जिससे बड़े-बड़े बल्लेबाजों के पास कोई जवाब नहीं होता था.

1985 की ऐतिहासिक सीरीज़

1985 में भारत की टीम जब श्रीलंका दौरे पर गई, तो किसी ने नहीं सोचा था कि एक अनुभवहीन टीम उसे धूल चटा देगी.  कोलंबो टेस्ट में रत्नायके ने अपनी तूफानी गेंदबाज़ी से 9 विकेट चटकाए और श्रीलंका को टेस्ट इतिहास की पहली जीत दिलाई.  3 मैचों की सीरीज़ में उन्होंने 20 विकेट लिए, जिसकी बदौलत श्रीलंका ने 1-0 से सीरीज़ अपने नाम की. इसी मैच में रत्नायके ने कपिल देव का एक शानदार कैच अपनी ही गेंद पर लपका था, जो आज भी श्रीलंका में याद किया जाता है. इस सीरीज में रुमेश ने सुनील गावस्कर, दिलीप वेंगसरकर, मोहम्मद अजहरुद्दीन, जैसे बड़े नामों को रन बनाने के लिए तरसा दिया था. असंथा डिमेल , सालिया अहंगमा के साथ रुमेश ने श्रीलंका को इतिहास रचने में अहम रोल निभाया.  r

करियर के मुख्य रिकॉर्ड्स और आंकड़े

रत्नायके का करियर चोटों की वजह से छोटा रहा, लेकिन उन्होंने कम समय में ही गहरी छाप छोड़ी. गेंदबाज़ी में  रत्नायके केवल स्विंग पर निर्भर नहीं थे,  उनके पास बाउंसर और यॉर्कर का भी सटीक मिश्रण था. 1985 के वर्ल्ड सीरीज़ के दौरान ऑस्ट्रेलिया में उनकी घातक स्विंग ने बड़े-बड़े दिग्गजों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था.  लॉर्ड्स के मैदान पर इंग्लैंड के खिलाफ 5/69 का स्पेल उनकी क्लास का प्रमाण है. खेल को अलविदा कहने के बाद भी रत्नायके श्रीलंका क्रिकेट से जुड़े रहे.  उन्होंने कई बार राष्ट्रीय टीम के अंतरिम कोच के रूप में जिम्मेदारी संभाली और आज भी हाई-परफॉर्मेंस सेंटर में तेज़ गेंदबाज़ों को तराश रहे हैं.

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Rajeev MishraAssociate editor

मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें

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