कानपुर की ऑर्डनेंस फैक्ट्री ने -50 डिग्री तापमान में भी काम करने वाले खास जूते तैयार किए हैं, जो सियाचिन और लद्दाख में तैनात जवानों को ठंड और संक्रमण से बचाने में मदद करेंगे. खास बात यह है कि भारतीय सेना को इसके शुरुआती सैंपल बेहद पसंद आए हैं, जिसके बाद फैक्ट्री को करीब 14,500 जोड़ी जूतों का पहला बड़ा ऑर्डर भी मिल चुका है.
सर्दी ही नहीं, संक्रमण से भी बचाएंगे जवानों को
सियाचिन और लद्दाख जैसे इलाकों में जवानों को सिर्फ बर्फीली हवाओं का ही सामना नहीं करना पड़ता, बल्कि अत्यधिक ठंड की वजह से पैरों में संक्रमण और गलने जैसी गंभीर समस्याएं भी हो जाती हैं.कई बार सैनिकों को लंबे समय तक बर्फ में ड्यूटी करनी पड़ती है, जिससे उनके पैर सुन्न पड़ जाते हैं.इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह खास जूता डिजाइन किया गया है.जूते में ऐसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हुआ है, जिससे अंदर नमी नहीं जाएगी और पैर लंबे समय तक गर्म और सूखे रहेंगे. इससे संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाएगा.
विदेशी कंपनी के साथ मिलकर तैयार हुआ खास जूता
ऑर्डनेंस इक्विपमेंट फैक्ट्री ने इस प्रोजेक्ट के लिए विदेश की एक बड़ी कंपनी के साथ करार किया है. उसी तकनीक की मदद से यह जूता तैयार किया जा रहा है.पहले ट्रायल के तौर पर 20 जोड़ी जूते भारतीय सेना को भेजे गए थे.सैनिकों ने इन जूतों को बेहद आरामदायक और उपयोगी बताया.इसके बाद फैक्ट्री को बड़ा ऑर्डर मिला है.फैक्ट्री के मुख्य महाप्रबंधक अनिल रंग ने बताया कि यह जूते बेहद ड्यूरेबल हैं और लंबे समय तक खराब नहीं होंगे. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में और बड़े ऑर्डर मिलने की भी उम्मीद है.
कानपुर से देश की सुरक्षा को नई ताकत
कानपुर लंबे समय से रक्षा उपकरण और सेना से जुड़े उत्पाद बनाने के लिए जाना जाता है.अब यह नया जूता शहर के लिए गर्व की बात बन गया है.इससे न सिर्फ भारतीय सेना को फायदा होगा, बल्कि विदेशी आयात पर निर्भरता भी कम होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह स्वदेशी तकनीक विकसित होती रही तो आने वाले समय में भारत रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकता है. कानपुर की यह उपलब्धि उसी दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें
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