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UP Politics: पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत का सियासी असर सीधे उत्तर प्रदेश पर पड़ा है, जहां 2027 में चुनाव होने हैं. ममता बनर्जी के अजेय गढ़ में बीजेपी ने सेंधमारी कर यूपी को भी साधने का काम किया है. पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सुनामी समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के साथ ही अन्य विपक्षी दलों के लिए भी खतरे की घंटी मानी जा रही है.

ममता बनर्जी की हार से क्यों टेंशन में अखिलेश? पश्चिम बंगाल में किस बात पर मंथनZoom

अखिलेश यादव का पश्चिम बंगाल दौरा आज

लखनऊ. वैसे तो यह मौसम के लिए कहा गया है कि बंगाल खाड़ी से उठा पश्चिमी विक्षोभ झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक की फिजा बदल देता है. ऐसा ही कुछ अब सियासी मौसम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार वह हुआ जिसका पूर्वानुमान किसी ने नहीं लगाया था. बीजेपी ने उस किले को फतह किया जो कभी अजेय माना जाता था. बीजेपी ने ना सिर्फ 15 साल की ममता सरकार को उखड फेंका है, बल्कि इसकी गरज यूपी तक पहुंची है. सियासी जानकारों का कहना है कि पश्चिम बंगाल की जीत का असर 2027 विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिलेगा. यही वजह है कि मंगलवार को ममता बनर्जी ने प्रेस कांफ्रेंस में स्पष्ट रूप से कहा कि वे अब इंडिया गठबंधन को मजबूत करेंगी. उन्होंने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव बुधवार को पश्चिम बंगाल पहुंच रहे हैं. अब चर्चा यह है कि आखिर अखिलेश यादव की पश्चिम बंगाल यात्रा के मायने क्या हैं.

दरअसल, पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों ने तमाम सियासी समीकरणों को हिलाकर रख दिया है. बीजेपी ने इस बार वो कर दिखाया जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी. ममता बनर्जी की 15 साल पुरानी तृणमूल कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंककर बीजेपी ने बंगाल की सत्ता पर कब्जा कर लिया. यह जीत सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी लहरें उत्तर प्रदेश तक पहुंच चुकी हैं.

बंगाल की जीत का यूपी पर असर

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पश्चिम बंगाल के नतीजे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए एक बड़े संकेत के रूप में देखे जा रहे हैं. बीजेपी की इस सफलता ने विपक्षी दलों में खासी चिंता पैदा कर दी है. विपक्षी खेमे में अब गठबंधन को मजबूत करने की कोशिशें तेज हो गई हैं. मंगलवार को ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ संदेश दिया कि वे इंडिया गठबंधन को और मजबूत बनाने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगी. उन्होंने यह भी घोषणा की कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव बुधवार को पश्चिम बंगाल पहुंच रहे हैं.

अखिलेश की बंगाल यात्रा के मायने

अखिलेश यादव की इस यात्रा को सिर्फ शिष्टाचार भेंट के रूप में नहीं देखा जा रहा है. यह यात्रा कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है. गठबंधन की मजबूती को लेकर चर्चा हो सकती है. यह इसलिए भी अहम है, क्योंकि 2023 में जब बंगलुरु में इंडी गठबंधन की बैठक हुई थी तो उसमें नीतीश कुमार भी शामिल थे. तब एक मांग उठी थी कि नीतीश कुमार इंडी गठबंधन का कोऑर्डिनेटर बनाया जाए, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. अखिलेश यादव के इस दौरे को भी बंगाल की हार के बाद विपक्षी दलों में एकजुटता बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. इसके अलावा 2027 के यूपी चुनाव को लेकर संभावित सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति पर भी मंथन होगा. क्योंकि जिस तरह से बीजेपी एक के बाद एक क्षेत्रीय क्षत्रपों को निपटा रही है, वह विपक्ष की राजनीति के लिए अच्छा नहीं है. अखिलेश यादव की कोशिश यही है कि समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के बीच बेहतर तालमेल बनाने का प्रयास हो, ताकि बीजेपी की बढ़ती लहर का मुकाबला किया जा सके.

क्या बदल सकता है सियासी समीकरण?

बंगाल में बीजेपी की जीत ने साबित कर दिया है कि क्षेत्रीय दलों की पारंपरिक ताकत को भी चुनौती दी जा सकती है, अगर संगठन और रणनीति सही हो. उत्तर प्रदेश में सपा-बीएसपी-कांग्रेस गठबंधन की पुरानी कहानी को नए सिरे से सोचा जा रहा है. ममता-अखिलेश की मुलाकात का नतीजा यह भी हो सकता है कि विपक्षी पार्टियां 2027 से पहले ही अपनी कमजोरियों को दूर करने और नए गठजोड़ बनाने की दिशा में काम शुरू कर दें.

About the Author

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Amit Tiwariवरिष्ठ संवाददाता

अमित तिवारी, News18 Hindi के डिजिटल विंग में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. वर्तमान में अमित उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और रिसर्च बेस्ड कवरेज कर रहे हैं. अख़बार…और पढ़ें

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