जिले के गोला गोकर्णनाथ छोटी काशी के नाम से प्रख्यात शिव नगरी में एक ऐसे कुआं है, जो अष्टकोण से बना हुआ है. भूतनाथ मंदिर परिसर में स्थित अष्टकोण 8 कोनो वाला कुआं अपनी बनावट और धार्मिक महत्व के कारण खास पहचान रखता है. ऐसा माना जाता है कि यह कुआं काफी प्राचीन सैकड़ो साल पुराना है. आज यह कुआं एक ऐतिहासिक धरोहर और आस्था का प्रतीक है.
भूतनाथ मंदिर का करते हैं दर्शन
सावन के महीने में काफी दूर-दूर से शिव भक्त आते हैं और भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने के बाद भूतनाथ मंदिर पर जाते हैं. जहां पूजा अर्चना करने के बाद भक्त अपनी मनोकामना कुआं के पास जाकर मांगते हैं. हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है कुआं के पास मनोकामना मांगने के लिए लोग हू- हू की आवाज लगाते हैं. वहीं कुछ वक्त कुआं के अंदर सिक्का फेंक कर अपनी मनोकामना मांगते हैं. यहां से जुड़ी लोक कथा श्रद्धालुओं को अपनी और आकर्षित करती है. श्रद्धालु भूतनाथ मंदिर में अपनी मनौती की गांठ बांधते हैं और मनोकामना पूर्ण होने पर खोलते हैं. भगवान शिव के मंदिर से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर रेलवे लाइन किनारे वन क्षेत्र से सटे प्राकृतिक वातावरण में बाबा भूतनाथ का मंदिर है। यहां भव्य मेला लगता है जो आस्था और लोक संस्कृति का परिचायक है.
भूतनाथ मेले की है अनोखी कहानी
एक आस्था पूर्ण किवदंती भी है कि लंकापति राजा रावण की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिवजी रावण की कांवड़ में बैठकर लंका के लिए चले. चलने से पूर्व भगवान शिवजी ने शर्त रखी थी, यदि कहीं किसी स्थान पर रख दिया तो हम वहीं स्थापित हो जाएंगे. गोला पहुंचने पर भगवान शिवजी की माया से रावण को लघुशंका महसूस हुई. तो पशु चरा रहे एक चरवाहे को कांवड़ पकड़ा कर रावण नित्य कर्म से निवृत होने चला गया. शिवजी अपना भार बढ़ाकर यहां स्थापित हो गए. लौटकर रावण वापस आया तो देखा भगवान शिव को स्थापित हो चुके थे. यह देखकर रावण ने चरवाहे का पीछा किया तो वह भय से यहां कुएं में कूद गया और यह स्थान भूतनाथ के नाम से प्रसिद्ध हो गया.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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