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Animal husbandry : गर्मी का प्रकोप बढ़ते ही पशुपालकों के समाने मवेशियों की सुरक्षा बड़ी चुनौती बन जाती है. लू और बढ़ते तापमान से पशुओं को बचाने के लिए विशेष सावधानी बरतना जरूरी है. लोकल 18 से शाहजहांपुर के कृषि एक्सपर्ट एनपी गुप्ता बताते हैं कि उचित खान-पान और प्रबंधन के जरिए हम पशुओं को जानलेवा डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक से सुरक्षित रख सकते हैं. भीषण गर्मी में पशुओं को दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच भूलकर भी बाहर न बांधें. दिन में कम से कम 3 से 4 बार साफ और ताजा पानी पिलाना जरूरी है. शाम के समय चारा देना अधिक फायदेमंद है, जब तापमान कम हो.
एनपी गुप्ता कहते हैं कि पशुओं के रहने का स्थान पूरी तरह हवादार और छायादार होना चाहिए. बंद कमरों में उमस बढ़ जाती है, जो पशुओं के लिए कष्टदायक है. अगर संभव हो, तो उनके बाड़े में पंखे या कूलर का इंतजाम करें. खपरैल या फूस की छत वाले शेड टीन शेड की तुलना में अधिक ठंडे रहते हैं. उनके रहने की जगह पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें.
भीषण गर्मी में पशुओं को दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच भूलकर भी बाहर न बांधें. इस दौरान सूरज की किरणें सबसे तीखी होती हैं, जिससे पशुओं को लू लगने का खतरा सर्वाधिक रहता है. कोशिश करें कि उन्हें किसी पक्के और ठंडे स्थान पर ही रखें. अगर बाहर बांधना मजबूरी हो, तो सुनिश्चित करें कि वहां पर्याप्त छाया उपलब्ध हो.
गर्मी में पशुओं के शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन तेजी से होती है. इससे बचने के लिए उन्हें दिन में कम से कम 3 से 4 बार साफ और ताजा पानी पिलाना जरूरी है. पानी को धूप में रखे बर्तनों या हौदी में न रहने दें, क्योंकि गर्म पानी पीने से पशु बीमार पड़ सकते हैं. हमेशा ताजा पानी ही पिलाएं.
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अत्यधिक गर्मी की वजह पशुओं के दूध देने की क्षमता में गिरावट आ सकती है. जब पशु हीट स्ट्रोक या तनाव में होते हैं, तो उनका मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है. इसलिए, उन्हें पर्याप्त आराम और पोषक तत्व देना जरूरी है. अगर पशु खाना छोड़ दें या सुस्त दिखें, तो यह लू के लक्षण हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत सावधानी बरतनी चाहिए.
गर्मी के मौसम में पशुओं के आहार पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है. पशुओं के भोजन में सूखे चारे की मात्रा कम कर दें और हरा चारा अधिक शामिल करें. हरा चारा रसीला और ठंडा होता है, जो पाचन में सहायक होने के साथ-साथ शरीर में नमी भी बनाए रखता है. शाम के समय चारा देना अधिक फायदेमंद है, जब तापमान कम हो.
पशुओं की ऊर्जा बनाए रखने के लिए उनके पीने के पानी में थोड़ा नमक और गुड़ मिलाना एक बेहतरीन उपाय है. यह मिश्रण न केवल उन्हें हाइड्रेटेड रखता है, बल्कि उनके शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन भी बनाए रखता है. गुड़ से उन्हें तुरंत ऊर्जा मिलती है, जिससे वो सुस्त नहीं पड़ते और भीषण गर्मी का सामना आसानी से कर पाते हैं.
बढ़ते तापमान से राहत देने के लिए पशुओं के शरीर पर दिन में दो-तीन बार ठंडे पानी का छिड़काव करें. भैंसों के मामले में यह और भी जरूरी है क्योंकि उन्हें गर्मी अधिक लगती है. अगर पास में कोई तालाब हो, तो उन्हें वहां ले जाएं या पाइप से नहलाएं. इससे उनके शरीर का आंतरिक तापमान सामान्य बना रहता है और पशु तनावमुक्त रहते हैं.
अगर सभी जरूरी सावधानी रखने के बाद भी पशु हाफ रहा हो, उसकी आंखों से पानी आ रहा हो या शरीर बहुत गर्म हो, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें. गर्मी में टीकाकरण और नियमित जांच भी उतनी ही जरूरी है. जागरूक पशुपालक बनकर ही हम इस मौसम में अपने बेजुबान पशुओं की जान बचा सकते हैं.
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