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-6048 करोड़ का बजट पास, एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी व औद्योगिक विकास पर जोर
-बकायेदारों के लिए ओटीएस योजना लागू, ईवी बस सेवा व हाईटेक सुरक्षा व्यवस्थाओं को मंजूरी

उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 143वीं बोर्ड बैठक कई मायने में बहुत खास रही। शनिवार को संपन्न इस बोर्ड बैठक में एक तरफ 2026-27 के बजट को मंजूरी दी गई तो दूसरी तरफ गंगा एक्सप्रेसवे और नोएडा एयरपोर्ट को जोड़ने के लिए दो प्रमुख मार्गों को बनाने का एलान किया गया। फ्लैट खरीदारों, आवंटियों को राहत देने वाले कई अहम फैसले लिए गए। सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देते हुए ईवी बसों का संचालन शुरू करने का निर्णय लिया गया। बहुमंजिला इमारतों में आगजनी से निपटने के लिए 100 करोड़ रुपये के हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म की खरीद को हरी झंडी मिली। आवंटन दरों में बहुत मामूली वृद्धि की गई। 2013-14 के बाद पहली बार जल शुल्क न बढ़ाने का फैसला लिया गया, यह आवंटियों के लिए बड़ी राहत है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2026-2027 के लिए बजट को मंजूरी दे दी है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के चेयरमैन दीपक कुमार की अध्यक्षता में अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार (वर्चुअल) और सीईओ एनजी रवि कुमार की मौजूदगी में शनिवार को संपन्न बोर्ड बैठक में बजट पर मुहर लग गई है। वित्तीय वर्ष में 2026-27 में 6048 करोड़ रुपये की आमदनी और इतनी ही धनराशि के व्यय का अनुमान लगाया गया है। इस वित्त वर्ष में भी सर्वाधिक जोर जमीन अधिग्रहण, ग्रामीण विकास एवं निर्माण कार्यों पर है, जिस पर करीब 5294 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य है। गांव के विकास के मद में बजट निर्धारित किया गया है।

इसके अलावा इस वित्त वर्ष में इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने तथा सेक्टरों के विकास कार्यों पर भी फोकस रहेगा। इसके साथ ही इस वित्त वर्ष में आमदनी और खर्च की धनराशि भी बराबर रहने का आकलन है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने बताया कि बीते कुछ वर्षों में ग्रेटर नोएडा के प्रति औद्योगिक निवेशकों का रुझान तेजी से बढ़ा है। तमाम निवेशक उद्योग लगाने के लिए जमीन मांग रहे हैं। उनको जमीन उपलब्ध कराने के लिए प्राधिकरण लगातार प्रयासरत है। 2026-27 के बजट में जमीन अधिग्रहण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर अधिक जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस बार जमीन अधिग्रहण पर करीब 1150 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य है। इसके साथ ही निर्माण व विकास कार्यों पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है। इसके लिए लगभग 2176 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। फुटओवर ब्रिज का निर्माण, एसटीपी, विद्युत सबस्टेशन, नए कॉलेजों का निर्माण, वेंडर मार्केट, क्योस्क का निर्माण, एसटीपी, कासना-सूरजपुर का पुनर्विकास, बस शेल्टर, गंगाजल का अवशेष कार्य आदि इन कार्यों में शामिल हैं।

आगामी वित्तीय वर्ष के लिए पूंजीगत भुगतान पर 778 करोड़ रुपये खर्च करने का आकलन है। यह रकम सेक्टरों में मल्टीपरपज हॉल व सामुदायिक केंद्र का निर्माण, नोएडा-ग्रेटर नोएडा मेट्रो रेल,जेवर एयरपोर्ट में अंशदान आदि पर खर्च करने का लक्ष्य है। 2026-27 वित्त वर्ष के लिए ग्रीनरी पर 108 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य है। इस बैठक में चेयरमैन, अपर मुख्य सचिव और सीईओ के अलावा नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव, एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस, एसीईओ प्रेरणा सिंह, एसीईओ सुमित यादव, यीडा के एसीईओ शैलेंद्र भाटिया, एडीएम बच्चू सिंह, ग्रेनो प्राधिकरण के जीएम वित्त स्वतंत्र गुप्ता, ग्रेनो प्राधिकरण के ओएसडी गुंजा सिंह, ओएसडी अभिषेक पाठक, ओएसडी गिरीश झा, ओएसडी मुकेश कुमार सिंह, ओएसडी रामनयन सिंह, जीएम प्लानिंग लीनू सहगल, जीएम प्रोजेक्ट एके सिंह, ओएसडी एनके सिंह, विधि अधिकारी रविंद्र कसाना आदि अधिकारीगण मौजूद रहे।

पहली बार जल मूल्य न बढ़ाने का फैसला

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने पानी के बकाएदारों को कुल बकाया धनराशि एकमुश्त जमा करने का एक अवसर दिया है। बोर्ड ने तीन माह के लिए एकमुश्त समाधान योजना लागू करने पर मुहर लगा दी है। पानी के बकाएदार 30 जून तक कुल बकाया धनराशि के ब्याज पर 40 फीसदी, 31 जुलाई तक 30 फीसदी और 31 अगस्त तक 20 फीसदी छूट प्राप्त कर सकते हैं। इसके बाद ओटीएस योजना स्वतः समाप्त हो जाएगी। गौरतलब है कि सभी श्रेणी के आवंटियों पर करीब 290 करोड़ रुपये पानी का बिल बकाया है, जिनमें बिल्डर सोसाइटियों पर लगभग 146 करोड़, आवासीय आवंटियों पर 65 करोड़, संस्थागत पर 50 करोड़, उद्योगों पर 14.61 करोड़, आवासीय समितियों पर 10 करोड़, शेष आईटी व कॉमर्शियल आवंटियों पर बकाया है। इसके साथ ही ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने इस वर्ष पानी के शुल्क में 10 फीसदी वृद्धि न करने का फैसला लिया है। 2013-14 से जल शुल्क में हर साल 10 फीसदी वृद्धि हो रही थी। जनप्रतिनिधियों, निवासियों और आरडब्ल्यूए की तरफ से जल मूल्य में वृद्धि न करने के लिए कहा गया। निवासियों की परेशानी को समझते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार की तरफ से इस बार जल शुल्क में वृद्धि न करने का प्रस्ताव बोर्ड के समक्ष रखा गया, जिस पर बोर्ड ने सहमति दे दी है। इससे यहां के निवासियों व आवंटियों को बड़ी राहत मिल गई है।

ग्रेनो की 105 मीटर रोड को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने का मार्ग मंजूर
-लॉजिस्टिक हब व डब्ल्यूडीएफसी के पैरलल 6 लेन एलिवेटेड रोड भी मंजूर
-लॉजिस्टिक हब से उद्योेगों का सामान नोएडा एयरपोर्ट तक आसानी से पहुंचेगा

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने आवागमन की सुविधा के मद्देनजर दो अहम परियोजनाओं को मंजूरी दी है। ग्रेटर नोएडा के 105 मीटर रोड को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए 15 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने को बनाई जाएगी और दूसरी परियोजना, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब से डब्ल्यूडीएफसी (डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) के पैरलल 6 लेन एलिवेटेड रोड बनेगी। इन दोनों मार्गों को मास्टर प्लान 2041 में शामिल करने के लिए सीईओ एनजी रवि कुमार के प्रस्ताव पर बोर्ड ने मुहर लगा दी है। बता दें कि 105 मीटर रोड सेक्टर अल्फा टू से हापुड़ बाईपास तक बननी है। इसकी कुल लंबाई 37 किलोमीटर है, जिसमें से अल्फा टू की तरफ से लगभग 6 किलोमीटर सड़क बनी हुई है। जहां पर 105 मीटर रोड समाप्त हो रही है ( हापुड़ बाईपास ), वहां से गंगा एक्सप्रेसवे की दूरी लगभग 15 किलोमीटर है। अगर 105 मीटर रोड को हापुड़ बाईपास से जोड़ दिया जाता है तो नोएडा-ग्रेटर नोएडा के निवासी गंगा एक्सप्रेसवे तक 30 से 45 मिनट में पहुंच सकतेे हैं। इससे लोगों को बहुत सुविधा हो जाएगी। इसी तरह लॉजिस्टक हब से डब्ल्यूडीएफसी (डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) के पैरलल 6 लेन एलिवेटेड रोड बनाए जाने से उद्योगों का माल नोएडा एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल तक आसानी से पहंुच सकेगा। प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार का कहना है कि इन दोनों मार्गों के बन जाने से निवासियों से लेकर उद्यमियों तक सभी को बहुत सुविधा हो जाएगी। उन्होंने कहा कि निवेशकों को विकसित भूखंड उपलब्ध कराने के लिए जमीन अधिग्रहण व आधारभूत परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है।

प्राधिकरण से निर्मित बहुमंजिला फ्लैट आवंटियों के लिए ओटीएस मंजूर

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने ईडब्ल्यूएस से लेकर 135 वर्ग मीटर एरिया तक के बहुमंजिला फ्लैट आवंटियों को बड़ी राहत दे दी है। नोएडा-ग्रेनो प्राधिकरण के चेयरमैन दीपक कुमार की अध्यक्षता में बोर्ड बैठक में बहुमंजिला फ्लैटों के आवंटियों के लिए बकाया प्रीमियम व लीज डीड के विलंब शुल्क के ब्याज पर राहत देने लिए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) को मंजूरी दे दी गई है। यह ओटीएस कार्यालय आदेश जारी होने की तिथि से छह माह के लिए लागू होगी। प्राधिकरण के संपत्ति विभाग की तरफ से बहुमंजिला फ्लैटों के आवंटियों के लिए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) का प्रस्ताव रखा गया, जिस पर बोर्ड ने मुहर लगा दी है। ओटीएस के लागू होने से प्रीमियम की बकाया धनराशि और लीज डीड के विलंब शुल्क पर 80 प्रतिशत तक छूट मिल सकती है और प्रीमियम के डिफॉल्ट धनराशि पर दंड ब्याज नहीं लगेगा।

परिसंपत्तियों की नई आवंटन दरों पर भी ग्रेनो प्राधिकरण बोर्ड ने लगाई मुहर

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए परिसंपत्तियों की नई आवंटन दरें तय कर दी हैं। इस बार सभी तरह की संपत्तियों के मौजूदा आवंटन दरों में 3.58 फीसदी की मामूली वृद्धि की गई है। कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स के आधार पर यह वृद्धि की गई है। सरकारी व अर्द्धसरकारी विभागों को प्रचलित आवासीय दरों पर ही भू-आवंटन किया जाएगा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने बताया कि ग्रेटर नोएडा में निवेश को बढ़ावा देने के लिए वर्तमान आंवटन दरों में कॉस्ट इंफ्लेशन इंडेक्स के हिसाब से मामूली वृद्धि की गई है।

परी चौक व आसपास को जाम मुक्त बनाने पर आईआईटी दिल्ली देगा सुझाव

ग्रेटर नोएडा। परी चौक, नॉलेज पार्क, एक्सपो मार्ट और पी-3 गोलचक्कर और उसके आसपास के एरिया को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने पहल की है। प्राधिकरण आईआईटी दिल्ली को हायर करने जा रहा है, ताकि परी चौक से एलजी चौक और नॉलेज पार्क एरिया तक ट्रैफिक के पूर्ण समाधान का प्लान तैयार किया जा सके। संस्था डिजाइन तैयार करेगी और कॉन्ट्रैक्टर का चयन करने के लिए आरएफपी तैयार करेगी। साथ ही निर्माण के दौरान आईआईटी दिल्ली ही प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग भी करेगी। बता दें, कि परी चौक ग्रेटर नोएडा का सबसे व्यस्ततम चौराहों में से एक है। यहां से रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं। यहां के ट्रैफिक की समस्या को हल करना प्राधिकरण की पहली प्राथमिकता है।

उद्योगों को भरपूर मिलेगी बिजली, ईकोटेक-10 में बनेगा 220 केवी बिजलीघर

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक इकाइयों के लिए भरपूर बिजली उपलब्ध हो सकेगी। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण सेक्टर ईकोटेक-10 में उद्योगों के लिए 220 केवी सबस्टेषन बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए 8945 वर्ग मीटर जमीन आरक्षित की गई है। शनिवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने इस पर मुहर लगा दी है। इससे पहले यहां 132/33 केवी सब स्टेशन प्रस्तावित किया गया था। इस बिजलीघर के बनने से उद्योगोें की वर्तमान के साथ ही भविष्य में बिजली की खपत भी पूरी हो सकेगी। साथ ही आसपास के रिहायशी एरिया में भी बिजली की कमी नहीं रहेगी।

आगजनी से निपटने को दो हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म खरीदेगा ग्रेनो प्राधिकरण

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 143वीं बोर्ड बैठक में बहुत अहम फैसला लिया गया। पहली बार 102 मीटर के दो हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म खरीदने के प्रस्ताव को बोर्ड ने मंजूर कर लिया है। दो हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म की खरीद पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप अपर पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा की तरफ से इसकी मांग की गई थी। इन दो हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म से बहुमंजिला इमारतों में आगजनी की घटना से निपटने में सहूलियत होगी। ग्रेटर नोएडा में बहुमंजिला इमारतों को देखते हुए आगजनी से निपटने के लिए हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म नितांत आवश्यक हैं।

एनडीआरएफ के लिए आवास की किल्लत दूर

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने एनडीआरफ के लिए सेक्टर ओमीक्रॉन वन ए स्थित बहुमंजिला इमारत में 20 एलआईजी व 10 एमआईजी फ्लैट किराए पर देने की अनुमति प्रदान कर दी है। पूर्व में इसी परियोजना में सीआईएसएफ को भी 467 रिक्त फ्लैट किराए पर दिए गए हैं। एनडीआरएफ की टीम का आवास ग्रेटर नोएडा में होने से प्राकृतिक आपदा के समय राहत शीघ्र प्राप्त हो सकेगी। ग्रेटर नोएडा में पहली बार एनडीआरएफ की टुकड़ी यहां निवास करेगी।

ग्रेटर नोएडा के चार रूटों पर चलेंगी 15 ईवी बसें

ग्रेटर नोएडा। ग्रेनो प्राधिकरण बोर्ड ने सिटी बस सेवा के रूप में 15 इलेक्ट्रिक बसें चार रूटों पर चलाने को मंजूरी दे दी है। इन बसों का संचालन यूपी रोडवेज करेगा। फिलहाल छह माह के लिए इसे शुरू किया जा रहा है। छह माह के लिए बसों के संचालन पर 1.80 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसे ग्रेनो प्राधिकरण वहन करेगा। पहला रूट चार मूर्ति चौक से सूरजपुर टी प्वाइंट और परी चौक होते हुए जेवर एयरपोर्ट तक होगा। इस रूट पर 4 बसें चलेंगी। दूसरा रूट चार मूर्ति चौक से 130 मीटर रोड और जिम्स होते हुए नोएडा एयरपोर्ट तक होगा। इस रूट पर भी चार बसें चलेंगी। तीसरा रूट मकौड़ा रोटरी से नासा पार्किंग और सेक्टर पी-7 होते हुए जेवर एयरपोर्ट तक होगा। इस रूट पर भी चार बसें चलेंगी और चौथा रूट औद्योगिक सेक्टर 16 से तिलपता रोटरी, स्वर्णनगरी, यथार्थ हॉस्पिटल और जीबीयू होते हुए जेवर एयरपोर्ट तक होगा। इस रूट पर 3 बसें चलेंगी। बता दें कि इससे पहले भी सिटी बस सेवा शुरू की गई थी, लेकिन सवारी न मिलने के कारण इसे बंद कर दिया गया था। नोएडा एयरपोर्ट शुरू होने से इस बार सवारियों के मिलने की उम्मीद है। इन बसों के चलने से लोगों को काफी सुविधा हो जाएगी। इलेक्ट्रिक बसों से आवाजाही की सुविधा भी होगी और प्रदूषण भी नहीं होगा।

लिगेसी प्रोजेक्ट की पॉलिसी से अब तक 40570 को मिला मालिकाना हक

ग्रेटर नोएडा। अमिताभ कांत समिति के सिफारिशों के आधार पर रियल एस्टेट के लिगेसी प्रोजेक्ट्स की अड़चनों को हल करने के लिए लाई गई पॉलिसी पैकेज का 98 में से 85 प्रोजेक्टों को 25 प्रतिशत धनराशि जमा करने के लिए मांग पत्र जारी किए गए, शेष 13 परियोजनाओं का पूरा पैसा जमा था। 85 में से 73 परियोजनाओं की तरफ से 25 प्रतिषत धनराशि जमा कराई जमा कराई गई। 12 परियोजनाओं ने इस नीति को स्वीकार नहीं किया। अब तक जिन 73 बिल्डर परियोजनाओं को लाभ मिला है, उनके खरीदारों को उनका आशियाना मिलने का रास्ता साफ हुआ है। इन 73 परियोजनाओं में शामिल लगभग 75 हजार फ्लैटों में से अब तक 40570 फ्लैटों की रजिस्ट्री हो चुकी है। दरअसल, ग्रेटर नोएडा के कुल 98 प्रोजेक्ट्स हैं जो कि अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों पर तैयार पॉलिसी के दायरे में आते हैं। इन परियोजनाओं की तरफ से 25 फीसदी धनराशि जमा कराने से प्राधिकरण को लगभग 1592 करोड़ की बकाया धनराशि प्राप्त हुई है। शनिवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण चेयरमैन व अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार के समक्ष ताजा रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।

कार्बन क्रेडिट का प्रस्ताव भी बोर्ड से मंजूर

ग्रेटर नोएडा। प्राधिकरण बोर्ड ने कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्टों के विकास से जुड़े प्रस्ताव को भी मंजूर कर लिया है। प्राधिकरण एएफसी इंडिया के साथ मिलकर इस परियोजना को अमली-जामा पहनाएगा। भारत सरकार की संस्था एएफसी इंडिया ग्रेटर नोएडा में कार्बन क्रेडिट से जुड़े प्रोजेक्टों की पहचान करेगा। कार्बन क्रेडिट से प्राप्त होने वाले राजस्व क्षमता का अनुमान लगाएगी और इस परियोजना के कार्यान्वयन का रोडमैप तैयार करेगा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कई ऐसे प्रोजेक्ट शुरू किए हैं, जो कि कार्बन क्रेडिट के लिहाज से उपयोगी हैं। मसलन, बडे़ पैमाने पर पौधरोपण, ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण, सोलर रूफ, सोलर पार्क की स्थापना, ठोस कचरा प्रबंधन, इलेक्ट्रिक वाहन इंफ्रास्ट्राचर, एलईडी लाइट का उपयोग, एसटीपी का निर्माण आदि शामिल हैं। कार्बन क्रेडिट मिलने से प्राधिकरण को आमदनी भी होगी। ग्रेटर नोएडा का बुनियादी ढांचा पेरिस समझौते के तहत भारत की जलवायु प्रतिबद्धता के अनुरूप है।

ग्रेनो के टेकजोन में बनेगा मेघालय भवन

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर टेकजोन में मेघालय भवन बनने का रास्ता साफ हो गया है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने मेघालय सरकार को 8000 वर्ग मीटर जमीन आवंटित करने पर मुहर लगा दी है। मेघालय सरकार ने अपने अधिकारियों, कर्मचारियों और निवासी आगंतुकों के लिए एनसीआर में आवास की बढ़ती मांग को देखते हुए जमीन उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। नोएडा एयरपोर्ट के चलते ग्रेटर नोएडा प्राथमिकता पर था। प्रदेश सरकार के निर्देश पर ग्रेटर नोएडा के टेकजोन में 8000 वर्ग मीटर जमीन आवंटित करने का निर्णय लिया गया है। मेघालय की तरफ से ग्रेटर नोएडा को 22.81 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा।

केपी-5 में 300 बेड का ईएसआई हॉस्पिटल

प्राधिकरण की तरफ से कर्मचारी राज्य बीमा निगम को हॉस्पिटल बनाने के लिए ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-5 में 29300 वर्ग मीटर जमीन आवंटित की गई है। यह 350 बेड का हॉस्पिटल होगा। प्राधिकरण ने इस हॉस्पिटल के लिए जमीन उपलब्ध करा दिया है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका शिलान्यास किया है। यह लगभग तीन साल में बनकर तैयार हो जाएगा। अभी तक ग्रेटर नोएडा में ईएसआई हॉस्पिटल नहीं है। इस हॉस्पिटल के बनने से यहां रहने वाले कर्मचारियों, श्रमिकों व निवासियों को बहुत बड़ी राहत मिल जाएगी। बोर्ड के समक्ष इस परियोजना का विवरण रखा गया।

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