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भगवान राम की नगरी अयोध्या को अपराजिता और विष्णु दायिनी के नाम से भी जाना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह नगरी अजेय मानी जाती है और भगवान विष्णु के अवतार राम की जन्मभूमि होने के कारण इसे विष्णु प्रिया कहा जाता है. शास्त्रों में इसे मोक्षदायिनी और वैकुंठ का प्रतिरूप भी बताया गया है.

अयोध्या: प्रभु राम की नगरी अयोध्या कई पौराणिक रहस्य से भरी पड़ी है.अयोध्या के कण कण में प्रभु राम का वास है. अयोध्या मर्यादा पुरुषोत्तम की नगरी मानी जाती है, लेकिन इसी अयोध्या को अपराजिता और विष्णु दायिनी के नाम से भी जाना जाता है. तो चलिए इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं आखिर अयोध्या को क्यों कहा जाता है अपराजिता और विष्णु दयानी और क्या है इसका रहस्य. दरअसल, अयोध्या को अपराजिता और विष्णु दायिनी कहे जाने के पीछे गहरी धार्मिक आस्था, पौराणिक मान्यताएं और शास्त्रीय उल्लेख जुड़े हुए हैं.

अयोध्या को क्यों कहा जाता है अपराजिता

अयोध्या केवल एक नगर नहीं, बल्कि सनातन परंपरा में दिव्यता और मोक्ष का प्रतीक माना जाता है. अपराजिता शब्द का अर्थ होता है जिसे कभी पराजित न किया जा सके. मान्यता है कि अयोध्या नगरी देवताओं की विशेष कृपा से संरक्षित रही है. पौराणिक कथाओं के अनुसार इस नगरी पर किसी भी शत्रु का पूर्ण रूप से विजय प्राप्त करना संभव नहीं रहा. यही कारण है कि इसे अपराजिता कहा गया. यह केवल भौतिक शक्ति का नहीं बल्कि आध्यात्मिक सामर्थ्य का भी प्रतीक है जहाँ धर्म और सत्य की विजय सदा स्थापित रहती है.

अयोध्या को क्यों कहा जाता है विष्णु दायिनी

वहीं विष्णु दायिनी नाम का संबंध सीधे भगवान विष्णु से जुड़ा है.अयोध्या को उनकी लीला भूमि माना जाता है, क्योंकि यहीं भगवान राम का जन्म हुआ था जो भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं. इस दृष्टि से अयोध्या को विष्णु की प्रिय नगरी या विष्णु प्रिया भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि यह नगरी स्वयं वैकुंठ धाम का प्रतिरूप है, जो पृथ्वी पर स्थापित है. प्राचीन ग्रंथों जैसे रामायण और स्कंद पुराण में अयोध्या की महिमा का विस्तृत वर्णन मिलता है. इन ग्रंथों में इसे मोक्षदायिनी नगरी कहा गया है अर्थात वह स्थान जहाँ जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिल सकती है.अयोध्या को सप्तपुरी यानी सात पवित्र नगरों में भी शामिल किया गया है जहाँ दर्शन और निवास मात्र से पुण्य की प्राप्ति होती है.

क्या है मान्यताएं

अयोध्या के विद्वान पवन दास शास्त्री ने बताया कि अयोध्या सप्तपुरी में एक मानी जाती है. अयोध्या विष्णु धरा से ही निकालकर इस धरा धाम पर स्थापित हुआ था रामायण में भी वर्णन है भगवान खुद अपने मुख से कहते हैं “जद्यपि सब बैकुंठ बखाना।
वेद पुरान विदित जगु जाना।।
अवधपुरी सम प्रिय नहीं सोऊ।

यह प्रसंग जानउ कोउ कोऊ।।” यह साक्षात बैकुंठ धाम का प्रतिरूप है उसी की छाया रूप इस धरा धाम पर अयोध्या जी के रूप में विद्यमान है, इसीलिए अयोध्या जी को अपराजिता विष्णु प्रिया राम धमदा इत्यादि 7 नाम से जाना जाता है. अयोध्या की पराक्रम की वजह से अयोध्या की पुण्य की वजह से इसको अपराजिता भी कहा जाता है. किसी भी प्रकार का योद्धा यहां पर युद्ध लड़कर जीत नहीं सकता इसलिए इसको अपराजिता कहा गया है. भगवान के हृदय में वास करने वाली अयोध्या बैकुंठ हृदय नगरी है. यह प्रभु राम की अति प्रिय नगरी है. इस नाते इसे विष्णु प्रिया भी कहा जाता है यही इस धाम की महिमा है

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें

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