दिल्ली के हौज खास स्थित ए एन झा डियर पार्क में हिरणों की बढ़ती संख्या और सीमित संसाधनों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम आदेश जारी किया है। 27 अप्रैल को दिए गए फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि पार्क में अधिकतम 38 हिरण ही रखे जा सकते हैं, जबकि शेष को चरणबद्ध तरीके से उपयुक्त वन्यजीव अभयारण्यों में स्थानांतरित किया जाएगा। यह प्रक्रिया केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की निगरानी में तय वैज्ञानिक मानकों के अनुसार पूरी की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि हिरण जैसे वन्यजीवों को सामान्य परिस्थितियों में पिंजरों या सीमित बाड़ों में रखना न तो कानूनी रूप से उचित है और न ही पारिस्थितिक दृष्टि से। अदालत ने कहा कि केवल अत्यंत विशेष परिस्थितियों में ही ऐसी व्यवस्था स्वीकार्य हो सकती है।
यह टिप्पणी वन्यजीव संरक्षण के व्यापक सिद्धांतों को रेखांकित करती है, जिनमें जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रखना प्राथमिकता माना जाता है।न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व आदेश को बरकरार रखते हुए उसे अंतिम रूप दे दिया।अदालत ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को निर्देश दिया कि वह पार्क में बचे हिरणों के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा, पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षित स्टाफ सुनिश्चित करे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि डियर पार्क का संरक्षित वन का दर्जा कायम रहना चाहिए और इसे किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
अदालत ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह सीईसी द्वारा तैयार किए गए वन्यजीव स्थानांतरण संबंधी वैज्ञानिक दिशानिर्देशों की समीक्षा करे और आवश्यक संशोधनों के साथ उन्हें छह महीने के भीतर लागू करने पर विचार करे। इन दिशानिर्देशों में पशुओं की पहचान और टैगिंग, सुरक्षित परिवहन, पशु चिकित्सा देखभाल, उपयुक्त आवास का चयन और स्थानांतरण के बाद निगरानी जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं। ये मानक अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ के दिशानिर्देशों के अनुरूप हैं, जो वैश्विक स्तर पर वन्यजीव संरक्षण के लिए मान्यता प्राप्त संस्था है।
कानूनी स्थिति भी बनी समस्या
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि डियर पार्क का मिनी जू का दर्जा केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण पहले ही रद्द कर चुका है और 2021 में इसका लाइसेंस समाप्त हो गया था। ऐसे में बिना वैध मान्यता के बड़ी संख्या में वन्यजीवों को रखना कानूनी रूप से भी उचित नहीं माना गया।सीईसी ने स्थानांतरण के लिए राजस्थान के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व और मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व का निरीक्षण भी किया है, जिन्हें संभावित पुनर्वास स्थलों के रूप में देखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया तय मानकों के अनुसार और मानवीय तरीके से की जानी चाहिए।इस मामले में अगली सुनवाई 19 जनवरी 2027 को निर्धारित की गई है, जिसमें अदालत निर्देशों के पालन की स्थिति की समीक्षा करेगी। यह फैसला एक बार फिर इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि वन्यजीवों का संरक्षण उनके प्राकृतिक आवास में ही सबसे प्रभावी और टिकाऊ तरीके से संभव है।
बढ़ती आबादी और प्रबंधन की कमी बनी वजह
अदालत ने 26 नवंबर 2025 को सीईसी को डियर पार्क का विस्तृत सर्वे करने का निर्देश दिया था। 6 मार्च 2026 को सौंपी गई रिपोर्ट में पार्क की वहन क्षमता (इकोलॉजिकल कैपेसिटी) यानी किसी क्षेत्र में सीमित संसाधनों के आधार पर कितने जीव सुरक्षित रह सकते हैं, का आकलन किया गया।रिपोर्ट में पाया गया कि हिरणों की संख्या अनियंत्रित रूप से बढ़ गई है, क्योंकि जन्म नियंत्रण और नसबंदी जैसे उपाय प्रभावी रूप से लागू नहीं किए गए। इसके अलावा चारे की उपलब्धता, पशु चिकित्सा सुविधाओं और बाड़ों की स्थिति भी पर्याप्त नहीं पाई गई।
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