Image Slider

Last Updated:

हर महान कलाकार की सफलता के पीछे संघर्ष की एक ऐसी कहानी छिपी होती है, जो अक्सर उनकी उपलब्धियों से भी ज्यादा प्रेरित करती हैं. आज एक ऐसे ही कलाकार की बात कर रहे हैं जिनकी आज पुण्यतिथि है. भारत की मिट्टी में पैदा हुआ एक ऐसा कलाकार जिसकी न हीरो जैसी कद-काठी थी और न ही हीरो जैसा सुपरस्टारडम, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत से सफलता की ऐसी मिसाल लिखी जो आज तक कायम है.

नई दिल्ली. बड़े पर्दे पर गंभीर, संवेदनशील और दमदार किरदारों के लिए मशहूर इरफान खान का जन्म ग्लैमर की चकाचौंध के बीच नहीं हुआ था और न ही अभिनय उन्हें विरासत में मिला था. बेहद साधारण परिवेश में पले-बढ़े इरफान खान कि आंखों ने वो सपना देखा जो पूरा होना लगभग असंभव था. उन्होंने स्टारडम विरासत में नहीं पाया, बल्कि संघर्ष, धैर्य और असाधारण प्रतिभा के दम पर खुद अपनी जगह बनाई.

इरफान खान का जन्म 7 जनवरी 1967 को जयपुर के टोंक में एक मध्यमवर्गीय मुस्लिम पठान परिवार में हुआ था. उनका पूरा नाम साहबजादे इरफान अली खान था. उनके पिता टायर का व्यवसाय करते थे, जबकि परिवार चाहता था कि इरफान भी पारंपरिक रास्ता अपनाएं. लेकिन बचपन से ही इरफान का झुकाव अभिनय और कहानी कहने की दुनिया की ओर था.

जयपुर में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने महसूस कर लिया था कि उनका असली सपना अभिनय है. आर्थिक रूप से परिवार बहुत समृद्ध नहीं था, इसलिए यह राह आसान नहीं थी. इसके बावजूद उन्होंने मेहनत की और देश के प्रतिष्ठित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) में दाखिला हासिल किया. यह उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ. एनएसडी में उन्होंने अभिनय की बारीकियां सीखीं और अपनी कला को मजबूत आधार दिया.

Add News18 as
Preferred Source on Google

एनएसडी से पढ़ने के बावजूद सिल्वर स्क्रीन तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं था. उनका ये रास्ता काफी मुश्किलों से होकर गुजरता है. मुंबई पहुंचने के बाद उनका संघर्ष शुरू हुआ. शुरुआती दिनों में उन्हें फिल्मों में बड़े मौके नहीं मिले.

गुजारा करने के लिए छोटे-मोटे काम, ट्यूशन और सीमित आय वाले प्रोजेक्ट्स करने पड़े. इसी दौर से जुड़ा एक चर्चित किस्सा यह भी है कि उन्होंने गुजारा करने के लिए तकनीकी कामों तक में हाथ आजमाया. वो AC तक ठिक किया करते थे.

rajesh Khanna, rajesh Khanna struggle, rajesh khanna stardom, rajesh khanna love life, rajesh khanna marriage, rajesh khanna dimple kapadia

एक दफा AC ठीक करने के लिए वो सुपरस्टार राजेश खन्ना के घर जा पहुंचे थे. जिंदगी में पहली बार किसी स्टार से मिलकर इरफान खान बेहोश हो गए थे. काका को देखते ही एक्टर का बुरा हाल हो गया था. इरफान खान ने छोटा-मोटा हर काम किया, लेकिन जब उन्हें फिल्मों में ब्रेक नहीं मिला तो, वो वापस लौट गए.

घर पर फैन, एसी रिपेयर करने के दौरान इरफान खान को एहसास हुआ कि वो सिर्फ जिंदगी बिताने के लिए औऱ पैसे कमाने के लिए काम नहीं कर सकते हैं. वो सिर्फ वही काम करना चाहते हैं जिसमें उनका दिल लगे ताकि उन्हें सुकून मिल सके.

फिल्मों में उनका शुरुआती काम सीमित था, लेकिन 1988 की सलाम बॉम्बे! से उन्हें पहला महत्वपूर्ण ब्रेक मिला, भले ही उनका रोल छोटा था. साल 2003 में मकबूल, फिर साल 2006 में द नेम सेक जैसी फिल्मों से इरफान खान को अलग पहचान मिली.

इरफान खान का जलवा सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं था. द लंचबॉक्स, पान सिंह तोमर, पीकू, लाइफ ऑफ पाई, हिंदी मीडियम, तलवार जैसी फिल्मों में काम करने का बाद एक्टर ने हॉलीवुड का रुख किया. वो. उनकी फिल्म जुरैसिक वर्ल्ड (2015) ने दुनियाभर में 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन किया. वहीं द अमेजिंग स्पाइडर-मैन (2012) ने करीब 7100 करोड़ रुपये की कमाई की. कमाई के मामले में इरफान खान की हॉलीवुड फिल्मों ने बड़े- बड़ों को पीछे छोड़ दिया. (एआई की मदद से बनाई फोटो)

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||