9 साल पहले 28 अप्रैल 2017 को जब सिनेमाघर खुले तो इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में एक तूफान आ गया. लगभग ₹250 करोड़ के बड़े बजट में बनी ‘बाहुबली 2: द कन्क्लूजन’ ने रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर धमाका कर दिया, जिसकी गूंज सात समंदर पार तक सुनाई दी. ₹1,800 करोड़ से ज्यादा कमाकर इस फिल्म ने रीजनल सिनेमा और बॉलीवुड के बीच के गैप को कम किया और प्रभास को पहला बिना किसी शक के पैन-इंडिया सुपरस्टार बना दिया. यह सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि एक कल्चरल क्रांति थी जिसने दिखाया कि अगर कहानी दिलचस्प हो, तो भाषा की रुकावटें मायने नहीं रखतीं.
नई दिल्ली. जब 10 जुलाई 2015 को ‘बाहुबली: द बिगिनिंग’ खत्म हुई, तो इसने दर्शकों के मन में एक ऐसा सवाल छोड़ दिया जो अगले दो सालों तक नेशनल बहस का हिस्सा बना रहा- ‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?’ इस एक सवाल ने ‘बाहुबली 2’ के लिए ऐसी हाइप बनाई जो बहुत कम दूसरी फिल्मों को मिली है.
जब फिल्म ‘बाहुबली 2’ 28 अप्रैल 2017 को रिलीज हुई, तो दर्शक इतनी ज्यादा संख्या में थिएटर में आए कि सुबह 4 बजे के शो भी फुल हो गए. फिल्म का बजट लगभग ₹250 करोड़ था, जिसे उस समय बहुत रिस्की माना जा रहा था, लेकिन राजामौली के विजन पर भरोसा काम आया.
फिल्म ने पहले दिन भारत में ₹121 करोड़ का नेट कलेक्शन करके सबको चौंका दिया. रिलीज के साथ ही यह फिल्म वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर हंगामा मचाने लगी थी और आखिरकार ₹1810 करोड़ से ज्यादा की कमाई करके इतिहास रच दिया.
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अकेले हिंदी हार्टलैंड में, फिल्म ने ₹510 करोड़ से ज्यादा की कमाई की, जो उस समय किसी भी प्योर बॉलीवुड फिल्म के लिए एक सपना था. ‘बाहुबली 2’ की सफलता ने प्रभास को रातोंरात ग्लोबल पहचान दिला दी. उनकी फिजीक, उनकी आंखों की तेजी और ‘अमरेंद्र बाहुबली’ के रूप में उनके दिखाए गए ग्रेस ने दर्शकों को मोहित कर लिया.
प्रभास नॉर्थ इंडिया से लेकर साउथ इंडिया तक घर-घर में मशहूर हो गए. राणा दग्गुबाती (भल्लालदेव) के साथ उनकी दुश्मनी और अनुष्का शेट्टी (देवा सेना) के सेल्फ-रिस्पेक्ट ने फिल्म को एपिक स्टेटस दिया. एसएस राजामौली ने साबित कर दिया कि इंडियन फिल्ममेकर्स कम रिसोर्स में भी हॉलीवुड फिल्मों जैसी शान हासिल कर सकते हैं.
फिल्म के बैटल सीन, महिष्मती किंगडम का शानदार सेट और बेहतरीन वीएफएक्स ने इसे एक विजुअल ट्रीट बना दिया. ‘बाहुबली 2’ ने हमेशा के लिए रीजनल भाषाओं (तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम) और हिंदी के बीच के गैप को कम कर दिया, जिससे आज की पैन-इंडियन फिल्मों के लिए रास्ता बना.
आज 28 अप्रैल 2026 को जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो ‘बाहुबली 2’ सिर्फ एक हिट ही नहीं लगती, बल्कि यह इंडियन सिनेमा के सेल्फ-कॉन्फिडेंस की कहानी भी लगती है. इसने मेकर्स को बड़े सपने देखने की हिम्मत दी. 9 साल बाद भी लोग इस फिल्म को बड़े चाव के साथ देखना पसंद करते हैं.
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