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भारत में मिठाइयों की कोई कमी नहीं, लेकिन कुछ मिठाइयां अपनी खास परंपरा और अनोखे स्वाद की वजह से अलग पहचान बना लेती हैं. ऐसा ही नाम है “राम जी पेड़ा”, जो गुड़ से तैयार होने के कारण शुगर फ्री माना जाता है और तेजी से लोगों की पसंद बन रहा है. खास बात यह है कि इस पेड़े को सबसे पहले अयोध्या भेजा जाता है, जहां भगवान राम को भोग लगाने के बाद ही देश-विदेश के बाजारों में पहुंचाया जाता है. यही वजह है कि यह मिठाई आज स्वाद के साथ आस्था और भरोसे का भी प्रतीक बन चुकी है.
इस पेड़े की सबसे बड़ी खासियत इसका पारंपरिक और देशी तरीका है. इसे लकड़ी के चूल्हे पर शुद्ध दूध, गुड़ और देशी घी से तैयार किया जाता है. यही वजह है कि इसमें अलग तरह की सोंधी खुशबू और प्राकृतिक मिठास होती है, जो लोगों को बेहद पसंद आ रही है.
इस अनोखे पेड़े को बनाने में सफाई और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाता है. गुड़ से तैयार होने के कारण इसे शुगर-फ्री माना जाता है, जिससे यह स्वास्थ्य के प्रति सजग लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. खास बात यह है कि इस पेड़े को विदेशों में भी खूब पसंद किया जा रहा है, क्योंकि यह पारंपरिक स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहतर विकल्प माना जा रहा है.
इस सफलता के पीछे युवा उद्यमी मनीष मिश्रा की अहम भूमिका है. उन्होंने गांव की गरीब और बेरोजगार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सपना देखा और उसे साकार किया. सबसे पहले महिलाओं को पेड़ा बनाने की ट्रेनिंग दी, फिर उन्हें जरूरी कच्चा माल उपलब्ध कराया.
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धीरे-धीरे यह पहल एक बड़े समूह में बदल गई और आज करीब 500 महिलाएं इससे जुड़कर नियमित आय अर्जित कर रही हैं. इनमें मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी इस पहल को और भी खास बनाती है, क्योंकि यह सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश देती है. इन महिलाओं की ओर से बनाए गए पेड़ों की एक और खास परंपरा है, जो इसे और अधिक धार्मिक महत्व देती है.
हर बैच तैयार होने के बाद सबसे पहले इन पेड़ों को अयोध्या भेजा जाता है, जहां भगवान राम को भोग लगाया जाता है. इसके बाद ही इन्हें देश और विदेश के बाजारों में भेजा जाता है. यह परंपरा इस उत्पाद को आस्था से जोड़ती है और ग्राहकों के बीच इसकी विश्वसनीयता को बढ़ाती है.
संस्था के प्रबंधक के अनुसार, रामजी का पेड़ा अब रूस और यूरोप जैसे देशों में भी निर्यात किया जा रहा है. जैसे ही ऑर्डर मिलता है, महिलाओं का समूह तेजी से काम में जुट जाता है और दो दिनों के भीतर बड़ी मात्रा में पेड़े तैयार कर लिए जाते हैं. इसके बाद इन्हें पारंपरिक तरीके से मटकों में पैक किया जाता है और अयोध्या भेजा जाता है, जहां भोग लगाने के बाद ही इन्हें ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है.
यह पहल न सिर्फ स्वाद और परंपरा का संगम है, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की भी एक मजबूत कहानी है. “रामजी का पेड़ा” आज एक ब्रांड बन चुका है.
गुड़ से बने इस पेड़े की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह शुगर फ्री होता है, जिस वजह से इसकी देश-विदेश के बाजारों में मांग है. मंदिरों में भोग लगाने के बाद ही इसकी देश-विदेश में सप्लाई की जाती है.
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