Image Slider

होमताजा खबरदेशLive: ‘टॉक्सिक वर्क एनवायरमेंट था’, राघव ने फिर गिराया वीडियो बम, बहुत बोले

Last Updated:

Raghav Chadha News Live: आम आदमी पार्टी में बगावत के बीच नया मोड़ तब आया जब विक्रम साहनी ने दावा किया कि अरविंद केजरीवाल ने उनसे सांसद पद से इस्तीफा देने को कहा था. केजरीवाल ने बगावत को रोकेने की कोशिश की थी लेकिन तब तक बहुत देर हो चुका था. सात राज्यसभा सांसदों के एक साथ पार्टी छोड़ने से AAP को बड़ा झटका लगा है. इस पूरे घटनाक्रम ने पार्टी के अंदरूनी संकट और नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं. केजरीवाल ने बीजेपी पर साजिश का आरोप लगाया है, जबकि बागी नेताओं का कहना है कि उन्होंने अपने फैसले खुद लिए हैं. अब सवाल यह है कि क्या इस बगावत की जानकारी पहले से थी और क्या इसे रोका जा सकता था. इस बीच राघव चड्ढा ने नया वीडियो जारी किया है और उन्होंने इसमें बताया है कि उन्होंने BJP क्यों ज्वाइन किया है.

Live: 'टॉक्सिक वर्क एनवायरमेंट था', राघव ने फिर गिराया वीडियो बम, बहुत बोले Zoom

AAP में बगावत के बीच विक्रम साहनी का बड़ा खुलासा.

Raghav Chadha News Live: क्या वाकई अरविंद केजरीवाल को राघव चड्ढा और अन्य सांसदों की बगावत की भनक पहले से थी, या फिर सब कुछ उनके हाथ से अचानक निकल गया? आम आदमी पार्टी के भीतर जो कुछ हुआ, वह किसी राजनीतिक झटके से कम नहीं था. पार्टी के कई बड़े चेहरे एक साथ अलग हो गए और इससे केजरीवाल की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठने लगे. अब इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया है, जब विक्रम साहनी ने दावा किया कि खुद केजरीवाल ने उनसे इस्तीफा देने को कहा था. हालांकि उन्होंने यह भी दावा किया कि केजरीवाल ने इस बगावत को रोकने की कोशिश की थी लेकिन तब तक काफी देर हो चुका था. यह बयान सिर्फ एक आरोप नहीं बल्कि उस अंदरूनी उथल-पुथल की तरफ इशारा करता है, जो लंबे समय से पार्टी के भीतर सुलग रही थी. सवाल यही है कि क्या यह बगावत अचानक हुई या इसके संकेत पहले से मौजूद थे.  ताजा बयान में विक्रम साहनी ने साफ कहा कि 22 अप्रैल को उनकी केजरीवाल से मुलाकात हुई थी और उसी दौरान उनसे सांसद पद छोड़ने को कहा गया. उन्होंने यह भी कहा कि यह धारणा पूरी तरह गलत है कि उन्होंने पार्टी छोड़ने की योजना के बारे में पहले ही जानकारी दे दी थी. इस बयान ने पूरे घटनाक्रम को और उलझा दिया है. अब यह मामला सिर्फ राजनीतिक दलबदल का नहीं, बल्कि भरोसे और नेतृत्व के संकट का बन गया है. पार्टी के भीतर किसे क्या पता था, किसने किसे गुमराह किया, और किसने आखिरी समय में फैसला बदला ये सभी सवाल अब और गहरे हो गए हैं. इधर राघव चड्ढा ने फिर एक वीडियो बम पटक दिया है. अपने इस वीडियो में उन्होंने बहुत कुछ कहा है.

  • Raghav Chadha News Live: चड्ढा ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन के 15 साल आम आदमी पार्टी (AAP) को दिए और खुद को संगठन का संस्थापक सदस्य बताया. उनके मुताबिक वह राजनीति में करियर बनाने के लिए नहीं आए थे, बल्कि एक विचार और आंदोलन के साथ जुड़े थे, जिसमें उन्होंने पूरी मेहनत और समर्पण लगाया.
  • Raghav Chadha News Live: उन्होंने पार्टी की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब AAP पहले जैसी नहीं रही. चड्ढा के अनुसार पार्टी में अब ‘टॉक्सिक वर्क एनवायरमेंट’ बन गया है, जहां काम करने और संसद में बोलने तक पर रोक लगाई जाती है, जिससे वह खुद को असहज महसूस करने लगे थे.
  • Raghav Chadha News Live: अपने फैसले को सही ठहराते हुए चड्ढा ने कहा कि उन्हें लगने लगा था कि वह ‘सही व्यक्ति हैं, लेकिन गलत पार्टी में हैं.’ उन्होंने बताया कि उन्होंने कई विकल्पों पर विचार किया जैसे राजनीति छोड़ना या पार्टी के भीतर सुधार की कोशिश करना लेकिन अंत में उन्होंने नया राजनीतिक मंच चुनने का फैसला किया.
  • Raghav Chadha News Live: चड्ढा ने यह भी कहा कि यह फैसला अकेले उनका नहीं है, बल्कि सात सांसदों ने मिलकर पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया है. उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कदम किसी डर या दबाव में नहीं, बल्कि निराशा और असंतोष के कारण उठाया गया है, और वह आगे भी जनता के मुद्दों को पहले की तरह उठाते रहेंगे.
  • Raghav Chadha News Live: चड्ढा ने यह भी कहा कि यह फैसला अकेले उनका नहीं है, बल्कि सात सांसदों ने मिलकर पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया है. उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कदम किसी डर या दबाव में नहीं, बल्कि निराशा और असंतोष के कारण उठाया गया है, और वह आगे भी जनता के मुद्दों को पहले की तरह उठाते रहेंगे.

केजरीवाल की कोशिशें

  • पार्टी सूत्रों के मुताबिक केजरीवाल ने आखिरी समय तक इस बगावत को रोकने की कोशिश की लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. कई सांसदों के बीच असंतोष पहले से था और नेतृत्व को लेकर मतभेद लगातार बढ़ रहे थे. जब तक केजरीवाल को पूरी स्थिति का अंदाजा हुआ, तब तक कई नेता अपना मन बना चुके थे. यही वजह रही कि उनके प्रयास असरदार नहीं हो सके और एक के बाद एक बड़े चेहरे पार्टी छोड़ते चले गए.
  • विक्रम साहनी ने अपने बयान में यह भी साफ किया कि उन्होंने बीजेपी में शामिल होने का फैसला खुद लिया, ताकि वह पंजाब के लिए बेहतर काम कर सकें. उन्होंने कहा कि उनके बारे में जो बातें फैलाई जा रही हैं, वह भ्रामक हैं. वहीं, केजरीवाल ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को दबाव में लाकर तोड़ा जा रहा है. इससे राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है.

केजरीवाल की ‘डैमेज कंट्रोल’ कोशिश

बगावत के बाद केजरीवाल ने तुरंत डैमेज कंट्रोल शुरू किया. उन्होंने सार्वजनिक रूप से बीजेपी पर हमला बोला और कहा कि यह लोकतंत्र के खिलाफ साजिश है. पार्टी ने राज्यसभा चेयरमैन के पास भी शिकायत दर्ज कराई और बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह कदम बहुत देर से उठाया गया? कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर नेतृत्व पहले सक्रिय होता, तो शायद स्थिति अलग होती.

राघव चड्ढा और अंदरूनी असंतोष

राघव चड्ढा का नाम इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम माना जा रहा है. सूत्रों के अनुसार उन्होंने ही बाकी सांसदों को जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई. पार्टी के भीतर फैसलों को लेकर असंतोष, नेतृत्व शैली पर सवाल और भविष्य की रणनीति को लेकर मतभेद लंबे समय से मौजूद थे. यह बगावत उसी असंतोष का नतीजा मानी जा रही है.

AAP के सामने बड़ा संकट

इस घटनाक्रम ने AAP की आंतरिक मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जो पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से निकली थी वह अब अपने ही नेताओं को संभालने में संघर्ष करती नजर आ रही है. पंजाब और दिल्ली में पार्टी की पकड़ मजबूत है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर यह झटका उसकी छवि को नुकसान पहुंचा सकता है.

क्या केजरीवाल को बगावत की पहले से जानकारी थी?

इस पर स्पष्ट जवाब अभी सामने नहीं आया है. विक्रम साहनी के बयान से लगता है कि कुछ संकेत जरूर थे, लेकिन पूरी स्थिति की गंभीरता शायद नेतृत्व को समय पर समझ नहीं आई. यही वजह रही कि रोकथाम के प्रयास देर से हुए.

विक्रम साहनी के दावे का क्या मतलब है?

साहनी का कहना कि उनसे इस्तीफा मांगा गया था, यह दिखाता है कि पार्टी के भीतर पहले से तनाव था. इसका मतलब यह भी हो सकता है कि नेतृत्व कुछ नेताओं से असंतुष्ट था और हालात पहले ही बिगड़ चुके थे.

क्या यह बगावत AAP के भविष्य को प्रभावित करेगी?

हां, यह घटनाक्रम पार्टी की छवि और संगठन दोनों पर असर डाल सकता है. अगर नेतृत्व समय रहते हालात नहीं संभाल पाया, तो आगे भी टूट की आशंका बनी रह सकती है.

About the Author

authorimg

Sumit KumarSenior Sub Editor

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||