बुजुर्ग ने दी सलीम के जिंदा होने की जानकारी
इस बीच दिसंबर 2025 में आरोपी अपने गांव में पुश्तैनी मकान बेचने पहुंचा तो लोगों ने उसको पहचान लिया। 26 साल बाद उसे जिंदा देखकर लोग हैरान हुए। अपराध शाखा की टीम उसकी तलाश में गांव पहुंची तो एक बुजुर्ग ने उसके जिंदा होने की जानकारी दी।
पुलिस उपायुक्त संजीव कुमार यादव ने बताया कि इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी की टीम ने आरोपी से पूछताछ की। आरोपी ने बताया कि 2000 में जेल से बाहर आने के बाद वह करनाल, अंबाला के अलावा हरियाणा के कई इलाकों में छिपकर रहने लगा। हरियाणा में उसने लोहे की अलमारी बनाने का काम शुरू कर दिया।
2010 में लोनी में पहचान बदलकर खोली दुकान
करीब 10 साल बाद 2010 में वह अपनी पहचान बदलकर अशोक विहार, लोनी, गाजियाबाद में रहने लगा। यहां उसने महिलाओं के कपड़े और उनसे जुड़े सामान की दुकान खोल ली। बाद में वह सलीम अहमद से सलीम वास्तिक हो गया। अपने बयानों को लेकर वह आसपास के लोगों में चर्चा का विषय बना रहने लगा।
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