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सलीम खान उर्फ सलीम वास्तिक की एक छोटी सी गलती ने उसे 26 साल बाद दोबारा सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। दरअसल 1995 में नाबालिग की हत्या के बाद सलीम खान कभी अपने गांव नहीं गया था। 

2000 में जेल से जमानत पर बाहर आने के कुछ समय बाद आरोपी ने अपने ही गांव अपनी ही मौत की अफवाह फैला दी। गांव में रहने वाले उसके भाई ने हार्ट अटैक से उसकी मौत के बारे में लोगों को बताया। 

सलीम भी कभी गांव नहीं पहुंचा तो वहां के लोगों ने उसकी मौत पर यकीन कर लिया गया। अब जब कभी भी पुलिस की टीम उसकी तलाश में गांव पहुंचती तो गांव वाले उसकी मौत की बात कर टीम को वापस भेज देते थे। 

 




Killer Salim Wastik Story Selling Ancestral Home in Village Becomes a Snare Police Launch Investigation

सलीम वास्तिक की फाइल फोटो
– फोटो : अमर उजाला


बुजुर्ग ने दी सलीम के जिंदा होने की जानकारी

इस बीच दिसंबर 2025 में आरोपी अपने गांव में पुश्तैनी मकान बेचने पहुंचा तो लोगों ने उसको पहचान लिया। 26 साल बाद उसे जिंदा देखकर लोग हैरान हुए। अपराध शाखा की टीम उसकी तलाश में गांव पहुंची तो एक बुजुर्ग ने उसके जिंदा होने की जानकारी दी।


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यूट्यूबर सलीम वास्तविक


करनाल, अंबाला के अलावा हरियाणा के कई इलाकों में छिपकर रहा

बुजुर्ग ने टीम को बताया कि लोनी में रहने वाला सलीम वास्तिक ही हत्यारा सलीम खान है। इसके बाद अपराध शाखा की टीम ने चुपचाप अपनी पड़ताल की। बाद में जब इस बात की पुष्टि हो गई की सलीम वास्तिक की सलीम खान है तो उसे दबोच लिया गया। कोर्ट में पेश कर उसे जेल भेज दिया गया है। 

 


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सलीम की पुरानी फोटो
– फोटो : अमर उजाला


पुलिस उपायुक्त संजीव कुमार यादव ने बताया कि इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी की टीम ने आरोपी से पूछताछ की। आरोपी ने बताया कि 2000 में जेल से बाहर आने के बाद वह करनाल, अंबाला के अलावा हरियाणा के कई इलाकों में छिपकर रहने लगा। हरियाणा में उसने लोहे की अलमारी बनाने का काम शुरू कर दिया। 


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सलीम की पुरानी फोटो
– फोटो : अमर उजाला


2010 में लोनी में पहचान बदलकर खोली दुकान

करीब 10 साल बाद 2010 में वह अपनी पहचान बदलकर अशोक विहार, लोनी, गाजियाबाद में रहने लगा। यहां उसने महिलाओं के कपड़े और उनसे जुड़े सामान की दुकान खोल ली। बाद में वह सलीम अहमद से सलीम वास्तिक हो गया। अपने बयानों को लेकर वह आसपास के लोगों में चर्चा का विषय बना रहने लगा।


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