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-मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘जुलूस’ पर आधारित प्रस्तुति ने दर्शकों को किया भावुक
-विद्यार्थियों के अभिनय, संगीत और संवादों ने बांधा समां
-मुख्य अतिथि शालिनी सिंह ने रचनात्मक शिक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों पर दिया जोर

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शास्त्री नगर स्थित नेहरू वर्ल्ड स्कूल में शनिवार को आयोजित वार्षिक हिन्दी नाट्य समारोह सांस्कृतिक उत्साह, रचनात्मकता और देशभक्ति के रंगों से सराबोर रहा। विद्यालय परिसर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपनी अभिनय प्रतिभा, साहित्यिक समझ और सामाजिक चेतना का प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए उपस्थित अतिथियों, अभिभावकों और शिक्षकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि समर्पित शिक्षाविद, खेलों की प्रबल समर्थक एवं समाजसेवी शालिनी सिंह रहीं, जो वर्तमान में नोएडा सिटीजन फोरम की कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। हाल ही में प्रकाशित उनका कविता संग्रह  ‘बेबाक हूं, बेअदब नहीं’ साहित्यिक जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। समारोह में विद्यालय के पूर्व विद्यार्थी भी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जिन्होंने लगभग 11 वर्ष पूर्व इसी नाट्य प्रस्तुति को सफलतापूर्वक मंचित किया था।

कार्यक्रम का शुभारंभ एक प्रेरणादायी गीत से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को ऊर्जा और सकारात्मकता से भर दिया। इसके पश्चात विद्यालय की एक्जीक्यूटिव हेड सूजन होम्स और सीनियर विभाग की प्रधानाध्यापिका मंजुला सिंह ने मुख्य अतिथि एवं अन्य आमंत्रित अतिथियों का स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत एवं सम्मान किया। समारोह के दौरान विद्यार्थियों द्वारा विद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई, जिसमें वर्षभर की शैक्षणिक, सांस्कृतिक और खेल उपलब्धियों का उल्लेख किया गया। इस वर्ष की मुख्य प्रस्तुति ‘बोल’ नाटिका रही, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में देशभक्ति, स्वदेशी भावना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के महत्व को जागृत करना था। औपनिवेशिक शासनकाल की पृष्ठभूमि पर आधारित यह नाटक उन अनगिनत भारतीयों के संघर्ष को दर्शाता है जिनकी आवाजों को दबाने का प्रयास किया गया, लेकिन जिन्होंने अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद रखना नहीं छोड़ा।

यह नाटिका प्रसिद्ध साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘जुलूस’ से प्रेरित थी, जिसे आधुनिक प्रस्तुति शैली के साथ मंचित किया गया। नाटक की विशेषता यह रही कि इसमें प्रख्यात शायर फैज अहमद फैज की प्रसिद्ध शायरी  ‘बोल कि लब आजाद हैं तेरे’ को भी शामिल किया गया। इस गीत के माध्यम से उस दौर की मानसिकता को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया, जब कुछ भारतीय ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष को अराजकता मानते थे, जबकि स्वतंत्रता सेनानी उसे आजादी की आवाज समझते थे। विद्यार्थियों ने संवाद, संगीत और मंच सज्जा के माध्यम से उस ऐतिहासिक कालखंड को जीवंत कर दिया। कक्षा 9 से 12 तक के लगभग 40 विद्यार्थियों ने नाटक ‘बोल’ में भाग लेते हुए प्रतिरोध, साहस, आत्मसम्मान और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। भावपूर्ण अभिनय, प्रभावशाली संवाद अदायगी और सशक्त मंच संचालन ने दर्शकों को भावुक कर दिया।

कई अवसरों पर दर्शकों की तालियों की गूंज ने विद्यार्थियों का उत्साह और बढ़ा दिया। मुख्य अतिथि शालिनी सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यालयों में इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि नाटक केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि समाज, इतिहास और विचारों को समझने का सशक्त मंच है। उन्होंने विद्यार्थियों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए उन्हें रचनात्मक अभिव्यक्ति को जीवन का हिस्सा बनाने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में उपस्थित अभिभावकों और अतिथियों ने विद्यार्थियों की प्रतिभा और विद्यालय के प्रयासों की खुलकर प्रशंसा की।

समारोह के अंत में सीनियर स्कूल की प्रधानाचार्या मंजुला सिंह ने सभी अतिथियों, अभिभावकों और विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं बल्कि संस्कार, संवेदनशीलता और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित करना भी है। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना बनाए रखने का संदेश दिया। सांस्कृतिक चेतना, साहित्यिक गहराई और देशभक्ति के संदेश से परिपूर्ण यह वार्षिक हिन्दी नाट्य समारोह विद्यार्थियों और दर्शकों के लिए यादगार अनुभव बन गया तथा विद्यालय की समग्र शिक्षा और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर गया।

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