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-1995 में किशोर के अपहरण व हत्या में उम्रकैद का दोषी, जमानत पर छूटकर हुआ था फरार
-पहचान बदलकर चार साल से लोनी में रह रहा था, बार-बार बदलता रहा ठिकाना
-धार्मिक कुरीतियों पर वीडियो बनाकर बना यूट्यूबर, क्राइम ब्रांच ने भेजा तिहाड़ जेल

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। लोनी क्षेत्र में पहचान छिपाकर रह रहे हत्या के दोषी यूट्यूबर सलीम अहमद उर्फ सलीम वास्तिक को दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। करीब 25 वर्ष से फरार चल रहे सलीम वास्तिक ने वर्ष 1995 में 13 वर्षीय किशोर संदीप बंसल के अपहरण के बाद उसकी हत्या की थी। इस मामले में दिल्ली की कड़कडड़ूमा कोर्ट ने सलीम वास्तिक और उसके साथी अनिल कुमार को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ अपील के दौरान वर्ष 2000 में अंतरिम जमानत मिलने पर सलीम जेल से बाहर आया और इसके बाद फरार हो गया। पुलिस रिकॉर्ड में लंबे समय तक उसका कोई सुराग नहीं मिला, यहां तक कि उसे मृत घोषित किए जाने की स्थिति भी बन गई थी। एसीपी लोनी सिद्धार्थ गौतम के अनुसार दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम 24 अप्रैल की रात लोनी पहुंची और स्थानीय पुलिस को सूचना देकर आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद उसे तिहाड़ जेल भेज दिया गया।
जांच में सामने आया कि सलीम वास्तिक ने फरारी के दौरान अपनी पहचान बदल ली थी। वह पंजाब, हरियाणा और अंबाला में छिपकर रहने के बाद वर्ष 2010 से लोनी क्षेत्र में बस गया था। पिछले चार वर्षों से वह अलग-अलग मकान बदलकर रह रहा था ताकि पहचान उजागर न हो सके।

लोनी की नसबंदी कॉलोनी में उसने महिलाओं के कपड़ों और घरेलू सामान की दुकान भी संचालित की तथा बाद में जैकेट आयात-निर्यात का व्यापार शुरू किया। इसी दौरान उसने ‘सलीम वास्तविक एक्स मुस्लिमÓ नाम से यूट्यूब चैनल शुरू किया और धार्मिक रूढि़वादिता व कुरीतियों के खिलाफ वीडियो और पॉडकास्ट बनाकर चर्चा में आ गया। वर्ष 2026 की 27 फरवरी को उसके कार्यालय में जानलेवा हमला भी हुआ था, जिसके बाद वह सार्वजनिक रूप से सुर्खियों में आया। पुलिस जांच में अमरोहा के दो आरोपियों द्वारा हमला किए जाने का खुलासा हुआ था, जिनमें एक पुलिस मुठभेड़ में मारा गया जबकि दूसरा भी बाद में एनकाउंटर में ढेर हुआ। स्थानीय लोगों के अनुसार सलीम वास्तिक लोनी में कई बार मकान बदल चुका था। वह कभी अपने भाई के घर तो कभी अलग कॉलोनियों में किराए या खरीदे मकानों में रहता रहा। अशोक विहार पुराने चेकपोस्ट के पास उसने 50 गज का मकान भी बनाया था, जहां उसकी पत्नी अफसाना और बच्चे रहते थे। गिरफ्तारी के बाद उसके मकान पर ताला लटका मिला और परिवार के ठिकाने की जानकारी किसी को नहीं है।

परिजनों ने बताया कि हत्या के मामले के बाद परिवार ने उससे संबंध लगभग समाप्त कर लिए थे। गिरफ्तारी के समय परिवार को भी उसके पुराने अपराध की पूरी जानकारी नहीं थी। बताया गया कि पहले उसकी मां ने ही जमानत कराई थी, जिसके बाद वह फरार हो गया था। दिल्ली क्राइम ब्रांच की कार्रवाई के साथ ही 31 वर्ष पुराने चर्चित अपहरण-हत्या कांड की फाइल एक बार फिर खुल गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से फरार आरोपी की गिरफ्तारी बड़ी सफलता मानी जा रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

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