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न एसी कमरा, न महंगा सेटअप! बांस-बल्ली के देसी मचान पर मशरूम उगा बनीं लखपति

 

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Mushroom Farming Success Story: नगरा प्रखंड के अफौर गांव की राधिका देवी ने साबित कर दिया है कि अगर हुनर और हौसला हो, तो बेरोजगारी की बेड़ियां काटी जा सकती हैं. कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली राधिका आज जिले में मशरूम वाली दीदी के नाम से मशहूर हैं. जीविका और कृषि विभाग से प्रशिक्षण लेकर उन्होंने मात्र ₹10000 के शुरुआती निवेश से मशरूम उत्पादन शुरू किया.आज वह आत्मनिर्भरता का बड़ा चेहरा बन चुकी हैं. राधिका देवी की खासियत उनका देसी जुगाड़ है. वे लकड़ी और बांस के मचान बनाकर कम लागत में जैविक मशरूम उगाती हैं. उनकी मशरूम की मांग इतनी अधिक है कि उन्हें बाजार नहीं जाना पड़ता. शहर के डॉक्टर, वकील और शिक्षक एडवांस पैसे देकर घर से ही मशरूम खरीद ले जाते हैं. राधिका न सिर्फ खुद कमाई कर रही हैं. बल्कि 20 से अधिक अन्य महिलाओं को भी ट्रेनिंग देकर रोजगार से जोड़ चुकी हैं. वे मशरूम से अचार, बिस्कुट और पाउडर जैसे उत्पाद बनाकर कमाई को दोगुना करने का मंत्र भी सिखाती हैं.

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