संभल में घूमने के लिए कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल मौजूद हैं, लेकिन इनमें से 5 जगहें खास तौर पर पर्यटकों को आकर्षित करती हैं. तोता-मैना की कब्र, चोर कुआं, चक्की का पाट, मृत्युंजय कूप और सिरसी की जारत जैसे स्थल इतिहास, रहस्य और आस्था का अनोखा संगम पेश करते हैं. यही वजह है कि दूर-दूर से लोग इन जगहों को देखने आते हैं.
संभल में घूमने के लिए 5 ऐतिहासिक जगहें बहुत खास हैं. तोता-मैना की कब्र, प्रेम कहानी की निशानी है. चोर कुआ और चक्खी का पाट अपने रहस्य और इतिहास के लिए मशहूर है. मृत्युंजय कूप का जल पवित्र माना जाता है. सिरसी की जारत धार्मिक आस्था का केंद्र है. इन जगहों को देखने दूर-दूर से पर्यटक आते हैं. इतिहास, संस्कृति और आस्था का अनोखा संगम होने से ये स्थल संभल की पहचान बन गए हैं. घूमने के लिए ये जगहें सच में बेस्ट हैं.
मुरादाबाद के संभल में स्थित तोता मैना की कब्र एक अमर प्रेम कहानी की निशानी है. कहा जाता है कि तोता और मैना दो प्रेमी थे जिनका मिलन समाज को मंजूर नहीं था. दोनों ने एक साथ जान दे दी. जिसके बाद लोगों ने यहीं उनकी कब्र बना दी. यह जगह सच्चे प्रेम और बलिदान का प्रतीक मानी जाती है.हर साल प्रेमी जोड़े यहाँ मन्नत मांगने आते हैं.
कब्र के पास बना छोटा पार्क और शांत माहौल इसकी खासियत है. इतिहास और लोककथाओं से जुड़ी यह जगह संभल की पहचान है. दूर-दूर से पर्यटक यहाँ प्रेम की इस अनोखी दास्तान को देखने आते हैं. इसके साथ ही आसपास के जिलों के लोग भी यहां पर घूमने के लिए आते हैं और यहां पर फोटोशूट से लेकर यहां का इतिहास तक सब कुछ जानने का प्रयास करते हैं. पर्यटकों के लिए यह जगह भी एक आकर्षण का केंद्र है.
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संभल में मौजूद चोर कुआ अपने नाम और रहस्यमयी इतिहास के लिए मशहूर है. कहा जाता है कि मुगलकाल और उससे पहले के समय में यहाँ चोरों को सजा देने के लिए इस कुएं का इस्तेमाल होता था. अपराधियों को पकड़कर इसी कुएं में डाल दिया जाता था. इसलिए इसे चोर कुआ कहा गया. इसके साथ ही इसे धीरे-धीरे सुल्ताना डाकू का कुआं भी कहा जाने लगा. बताया जाता था कि यह सुल्ताना डाकू अपनी सल्तनत चलाते थे.
कुछ लोककथाओं के अनुसार चोर इसी कुएं के रास्ते भागते थे या छिपते थे. कुआ काफी गहरा और पुराना है. जिसकी बनावट भी रहस्य पैदा करती है. समय के साथ यह जगह ऐतिहासिक धरोहर बन गई. आज दूर-दूर से लोग इसे देखने आते हैं. इसका रहस्य और इतिहास पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है. इसके साथ ही आसपास के अलावा दूर दराज के लोग भी यहां पर इसे देखने के लिए आते हैं.
संभल के ऐतिहासिक किले की दीवार पर टंगा चक्की का पाट आल्हा-ऊदल की वीरता और पृथ्वीराज चौहान के शासनकाल की याद दिलाता है. मान्यता है कि आल्हा-ऊदल ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हुए इसे एक ही छलांग में दीवार पर टांग दिया था. यह 16वीं शताब्दी की धरोहर मानी जाती है. इस धरोहर को देखने के लिए आज भी दूर-दूर से लोग आते हैं. लेकिन वर्तमान में यह धरोहर जिला प्रशासन ने अपने पास संजोकर रख रही है.
मृत्युंजय कुंड संभल के हयातनगर इलाके में स्थित है. यह पवित्र कुंड खासतौर पर उन लोगों के लिए आशा की किरण बन चुका है. जिन्हें मृत्यु का डर सताता है या जो अकाल मृत्यु के भय में जी रहे हैं. कहते हैं कि इस कुंड में स्नान, दर्शन और पूजन करने से मृत्यु का भय समाप्त होता है और व्यक्ति को लंबी आयु प्राप्त होती है. यही नहीं, इस कुंड की महिमा इतनी ज्यादा है कि यहां स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है और मृत्यु के बाद उन्हें मोक्ष मिल जाता है.
संभल के सिरसी की मजार सैयद जमालुद्दीन उर्फ दादा मखदूम साहब की है. जहां पर बहुत अच्छी मान्यता है. बताया जाता है कि इस मजार पर जन्म से गूंगे लोग भी बोलने लगते हैं और जो भी अपनी मन्नत लेकर जाता है, उसकी मन्नत इस मजार पर पूरी होती है. इस मजार पर हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई, सभी धर्म के लोग जाते हैं. इसके साथ यहां की अजब गजब मानता भी दूर-दूर तक मशहूर है यहां पर जीव का चढ़ावा चढ़ता है. जो भी यहां मन्नत मांगता है उसकी हर मनोकामना पूरी होती है.
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